
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखण्ड के लोकजीवन,संस्कृति और प्रकृति से जुड़े हरेला महापर्व की धूम गुरुवार को श्रीनगर एवं आसपास के क्षेत्रों में पूरे उत्साह,उल्लास और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ देखने को मिली। विद्यालयों,सहकारी संस्थाओं तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों ने एक पेड़-एक जीवन की भावना को आत्मसात करते हुए वृहद वृक्षारोपण अभियान चलाया। बच्चों से लेकर शिक्षकों और कर्मचारियों तक सभी ने पौधारोपण कर हरित उत्तराखण्ड और स्वच्छ पर्यावरण के निर्माण का संकल्प लिया। एंजेल्स हेवन स्कूल खंदूखाल में हरेला पर्व रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पर्यावरणीय गतिविधियों के साथ हर्षोल्लास से मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ छात्र-छात्राओं द्वारा फलदार पौधों के रोपण से हुआ। बच्चों को बताया गया कि हरेला केवल एक पर्व नहीं,बल्कि प्रकृति के प्रति प्रेम,संरक्षण और संवर्धन की हमारी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि वे लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करेंगे और धरती को हरा-भरा बनाए रखने में सक्रिय योगदान देंगे। विद्यालय में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। छात्र-छात्राओं ने हरेला पर आधारित मनमोहक प्रस्तुतियां दीं,प्रकृति संरक्षण पर प्रेरक कविताओं का पाठ किया तथा प्रकृति संकल्प का सामूहिक वाचन कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। रंग-बिरंगी प्रस्तुतियों और लोक संस्कृति से ओतप्रोत कार्यक्रमों ने उपस्थित अतिथियों को भावविभोर कर दिया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक आर.पी.भट्ट,प्रधानाचार्या विभा भट्ट,शिक्षिका शशिकला,विवेक,गीता,कमला तथा सुभाष सहित समस्त शिक्षकगण उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने बच्चों की रचनात्मक प्रस्तुतियों एवं पर्यावरण के प्रति उनकी जागरूकता की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। इधर आंचल डेयरी दुग्ध उत्पादन सहकारी संघ लिमिटेड श्रीनगर में भी हरेला पर्व पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। परिसर में खाली भूमि पर फलदार एवं छायादार पौधों का रोपण किया गया। कार्यक्रम के दौरान उत्तराखण्ड की पारंपरिक शुभकामना जी रैया,जागी रैया,जुग-जुग बची रैया की मंगलध्वनि के बीच प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया गया। डेयरी के प्रबंधक श्रवण कुमार शर्मा एवं सभी अधिकारियों-कर्मचारियों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया और लोगों से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने का आह्वान किया। वहीं विकास खण्ड खिर्सू के राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय सौडू (क्वीसू) में भी हरेला पर्व वृक्षारोपण के साथ धूमधाम से मनाया गया। विद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए तथा छात्र-छात्राओं को वृक्षों के महत्व,जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के विषय में जानकारी दी गई। विद्यालय के प्रधानाध्यापक शंकर मणि थपलियाल,सहायक अध्यापिका सुबोध चमोली,शैफाली कुंवर एवं अनुज कुमार नौडियाल ने विद्यार्थियों के साथ पौधारोपण करते हुए उन्हें पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया। तीनों संस्थानों में आयोजित कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं,बल्कि नई पीढ़ी में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता,पर्यावरण संरक्षण की भावना और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करना रहा। वक्ताओं ने कहा कि आज बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के दौर में वृक्षारोपण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि प्रत्येक नागरिक वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाकर उसका संरक्षण करे,तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ,सुरक्षित और हरित वातावरण उपलब्ध कराया जा सकता है। हरेला महापर्व पर आयोजित इन कार्यक्रमों ने यह संदेश दिया कि प्रकृति का संरक्षण ही मानव जीवन का संरक्षण है। जब विद्यालय,सहकारी संस्थाएं और समाज एक साथ पर्यावरण के लिए आगे आते हैं,तभी हरित उत्तराखण्ड का सपना साकार हो सकता है। हरेला के अवसर पर लिया गया यह संकल्प निश्चित रूप से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल सिद्ध होगा।