
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखण्ड के लोकपर्व हरेला के पावन अवसर पर प्रकृति संरक्षण,हरित पर्यावरण और सतत विकास का संदेश देते हुए गुरुवार को केंद्रीयकृत प्रशिक्षण केंद्र,सशस्त्र सीमा बल श्रीनगर गढ़वाल,गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान तथा वन विभाग पौड़ी के संयुक्त तत्वावधान में वृहद वृक्षारोपण अभियान आयोजित किया गया। पर्यावरण संरक्षण के इस प्रेरणादायी आयोजन में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपकर हरित उत्तराखण्ड के निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया गया। कार्यक्रम का आयोजन गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान के नवीन परिसर में किया गया,जहां अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक पौधारोपण करते हुए प्रकृति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। इसके साथ ही वन विभाग पौड़ी के सहयोग से भी संयुक्त रूप से वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया,जिसमें पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप देने पर विशेष बल दिया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि हरेला केवल एक पारंपरिक पर्व नहीं,बल्कि प्रकृति के साथ हमारे आत्मीय संबंध,पर्यावरणीय संतुलन और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का प्रतीक है। जलवायु परिवर्तन,बढ़ते प्रदूषण और घटते वन क्षेत्र जैसी चुनौतियों के बीच प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह पौधारोपण के साथ-साथ उनके संरक्षण का भी संकल्प ले। कार्यक्रम के दौरान औषधीय,फलदार एवं छायादार पौधों का रोपण किया गया। उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने पौधों की नियमित देखभाल,संरक्षण तथा हरित आवरण बढ़ाने की शपथ लेते हुए लोगों से भी अपने जीवन के प्रत्येक महत्वपूर्ण अवसर पर एक पौधा लगाने और उसे वृक्ष बनने तक संरक्षित रखने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण को संतुलित नहीं रखते,बल्कि स्वच्छ वायु,जल संरक्षण,जैव विविधता और मानव जीवन की सुरक्षा के लिए भी अत्यंत आवश्यक हैं। यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति प्रकृति संरक्षण को अपना नैतिक दायित्व मानकर आगे आए,तो पर्यावरणीय चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव है। कार्यक्रम के माध्यम से प्रकृति संरक्षण,हरित उत्तराखण्ड,स्वच्छ पर्यावरण और जन-जागरूकता का सशक्त संदेश दिया गया। आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं,बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। हरेला महापर्व पर आयोजित यह अभियान प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और हरित भविष्य के निर्माण की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल बनकर उभरा।