हिमालय की धड़कनों को शब्द दे रहा हिमालय बुलेटिन-शोध और ज्ञान की नई इबारत लिखता नया अंक प्रकाशित

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। हिमालयी क्षेत्रों से जुड़े सामाजिक,आर्थिक,पर्यावरणीय और भौगोलिक मुद्दों पर शोध को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। जियोग्राफिकल सोसाइटी ऑफ सेंट्रल

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। हिमालयी क्षेत्रों से जुड़े सामाजिक,आर्थिक,पर्यावरणीय और भौगोलिक मुद्दों पर शोध को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। जियोग्राफिकल सोसाइटी ऑफ सेंट्रल हिमालया द्वारा प्रकाशित प्रतिष्ठित समीक्षित शोध पत्रिका हिमालयन बुलेटिन का द्वितीय खंड,प्रथम अंक ऑनलाइन प्रकाशित हो गया है। अंतरराष्ट्रीय मानक क्रमांक (ISSN-3108-2130) से युक्त यह शोध पत्रिका हिमालयी अध्ययन,शोध और अकादमिक विमर्श के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रही है। नवीनतम अंक में कुल दस शोध आलेख शामिल किए गए हैं,जिनमें आठ विस्तृत शोध पत्र,एक शोध संचार और एक पुस्तक समीक्षा सम्मिलित है। इस अंक की विशेषता यह है कि इसमें हिमालयी क्षेत्रों से जुड़े समकालीन और ज्वलंत विषयों पर गहन अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। शोध पत्रों में अरुणाचल प्रदेश में कृषि पद्धतियों के बदलते स्वरूप,उत्तराखंड में आय वृद्धि और सामाजिक विकास,गढ़वाल हिमालय की पारंपरिक कृषि प्रणाली,हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की पहचान,उत्तराखंड में वृद्धजन जीवन स्तर,चंबा जिले में टिकाऊ आजीविका मॉडल तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों जैसे विषयों पर शोध आधारित विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। इसके अतिरिक्त शोध संचार खंड में दार्जिलिंग हिमालय के लेप्चा समुदाय की पर्यावरण संरक्षण संबंधी परंपराओं को रेखांकित किया गया है,जो पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति संरक्षण के अद्भुत संबंध को उजागर करता है। वहीं पुस्तक समीक्षा खंड शोधार्थियों और विद्यार्थियों को नवीन अकादमिक दृष्टिकोण प्रदान करने का कार्य करेगा। जियोग्राफिकल सोसाइटी ऑफ सेंट्रल हिमालया की अध्यक्ष प्रो.अनिता रुडोला ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हिमालयन बुलेटिन केवल एक शोध पत्रिका नहीं,बल्कि हिमालयी क्षेत्रों की समस्याओं,संभावनाओं और विकास संबंधी विमर्श को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन रही है। उन्होंने पत्रिका के सभी शोधकर्ताओं,लेखकों और संपादकीय मंडल को बधाई देते हुए कहा कि इसमें प्रकाशित शोध निश्चित रूप से विद्यार्थियों,शोधार्थियों और नीति निर्माताओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे। उन्होंने पत्रिका के बुनियादी संरक्षक प्रोफेसर कमलेश कुमार,मुख्य संपादक प्रोफेसर विश्वंभर प्रसाद (वी.पी.) सती,सह-संपादक डॉ.राजेश भट्ट तथा सचिव डॉ.किरण त्रिपाठी सहित सम्पूर्ण संपादकीय टीम के प्रयासों की सराहना की। प्रो.रुडोला ने प्रो.वी.पी.सती को न्यू हमबोल्ट की संज्ञा देते हुए कहा कि उनके व्यापक अंतरराष्ट्रीय अनुभव,गहन शोध दृष्टि और अकादमिक नेतृत्व के कारण हिमालयन बुलेटिन निरंतर गुणवत्ता और वैश्विक पहचान की ओर अग्रसर है। विश्व के विभिन्न देशों की उनकी यात्राओं और अनुभवों का लाभ भी इस शोध पत्रिका को मिल रहा है। पत्रिका का संपादकीय मंडल भी अंतरराष्ट्रीय स्तर का है,जिसमें उज्बेकिस्तान,पोलैंड,भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के प्रतिष्ठित शिक्षाविद् एवं विशेषज्ञ शामिल हैं। यह विविधता पत्रिका को वैश्विक दृष्टिकोण और उच्च अकादमिक गुणवत्ता प्रदान करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में जब हिमालय जलवायु परिवर्तन,आपदाओं,पलायन और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहा है,तब इस प्रकार के शोध आधारित प्रकाशन नीति निर्माण,सतत विकास और क्षेत्रीय योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। हिमालयन बुलेटिन का यह अंक भी इसी दिशा में एक सार्थक और दूरगामी प्रयास माना जा रहा है। पत्रिका का नवीन अंक विद्यार्थियों,शोधार्थियों,शिक्षकों,योजनाकारों,पर्यावरणविदों तथा नीति निर्माताओं के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराया गया है,जिससे अधिक से अधिक लोग हिमालयी अध्ययन और शोध गतिविधियों से जुड़ सकें। हिमालयी समाज,संस्कृति,पर्यावरण और विकास से जुड़े विषयों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सामने लाने का यह प्रयास आने वाले समय में शोध और ज्ञान की नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाला साबित होगा।

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