13 वर्षों की समर्पित सेवाओं को सलाम-डॉ.अजेय विक्रम सिंह का हरिद्वार मेडिकल कॉलेज स्थानांतरण

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। किसी भी संस्थान की पहचान केवल उसके भवनों और संसाधनों से नहीं,बल्कि वहां कार्य करने वाले समर्पित और दूरदर्शी लोगों से बनती है। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। किसी भी संस्थान की पहचान केवल उसके भवनों और संसाधनों से नहीं,बल्कि वहां कार्य करने वाले समर्पित और दूरदर्शी लोगों से बनती है। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ.अजेय विक्रम सिंह ऐसे ही व्यक्तित्व रहे,जिन्होंने अपने 13 वर्षों के सेवाकाल में चिकित्सा,चिकित्सा शिक्षा,प्रशिक्षण,शोध और प्रशासनिक प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए संस्थान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। अब उनका स्थानांतरण राजकीय मेडिकल कॉलेज हरिद्वार हो गया है,लेकिन श्रीनगर में उनकी कार्यशैली, नेतृत्व क्षमता और सेवा भाव की छाप लंबे समय तक याद की जाएगी। डॉ.अजेय विक्रम सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान एनेस्थीसिया विभाग को शैक्षणिक दृष्टि से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके सतत प्रयासों से विभाग को स्नातक (यूजी) के साथ-साथ स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों की मान्यता प्राप्त हुई। आज विभाग में आठ सीटों पर डिग्री एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। विभाग से अब तक चार बैच सफलतापूर्वक प्रशिक्षण प्राप्त कर देश और प्रदेश के विभिन्न सरकारी एवं निजी अस्पतालों में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। यह उपलब्धि मेडिकल कॉलेज की शैक्षणिक गुणवत्ता और उनके नेतृत्व का प्रमाण मानी जाती है। चिकित्सा शिक्षा के साथ-साथ उन्होंने समाज में जीवन रक्षक तकनीकों के प्रति जागरूकता फैलाने का भी सराहनीय कार्य किया। कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) जैसी जीवन बचाने वाली तकनीक को आमजन तक पहुंचाने के उद्देश्य से उन्होंने एक व्यापक प्रशिक्षण अभियान चलाया। इस अभियान के तहत मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों,जूनियर रेजिडेंट,इंटर्न,एमबीबीएस विद्यार्थियों,नर्सिंग अधिकारियों,वार्ड अटेंडेंट,ब्लड बैंक कर्मियों,सुरक्षा कर्मियों,पौड़ी और टिहरी के नर्सिंग छात्रों,पुलिस एवं अग्निशमन विभाग के जवानों के साथ-साथ विद्यालयों के विद्यार्थियों को भी प्रशिक्षण दिया। अब तक 3600 से अधिक लोगों को सीपीआर का प्रशिक्षण देकर उन्होंने समाज में आपातकालीन चिकित्सा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी दूरदर्शी सोच का एक और महत्वपूर्ण परिणाम यह रहा कि राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में पहली बार राष्ट्रीय स्तर की एनेस्थीसिया कॉन्फ्रेंस का सफल आयोजन हुआ। इस सम्मेलन में देशभर के प्रतिष्ठित एनेस्थीसिया विशेषज्ञों ने भाग लिया,जिससे मेडिकल कॉलेज को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली और शोध एवं अकादमिक गतिविधियों को भी नई दिशा प्राप्त हुई। डॉ.अजेय विक्रम सिंह ने केवल एक कुशल चिकित्सक और शिक्षक के रूप में ही नहीं,बल्कि एक सक्षम प्रशासक के रूप में भी अपनी अलग पहचान बनाई। लगभग पौने दो वर्ष तक बेस अस्पताल श्रीनगर के चिकित्सा अधीक्षक के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित,अनुशासित और मरीज केंद्रित बनाया। सीमित संसाधनों के बावजूद बेहतर प्रबंधन,टीम भावना और सकारात्मक नेतृत्व के माध्यम से उन्होंने अस्पताल की कार्यप्रणाली में कई उल्लेखनीय सुधार किए। मरीजों की सुविधाओं में वृद्धि,चिकित्सकीय सेवाओं की गुणवत्ता और कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उनके प्रयासों को व्यापक सराहना मिली। सहकर्मियों के बीच डॉ.अजेय विक्रम सिंह अपनी सरलता,सहज व्यवहार,अनुशासित कार्यशैली और सकारात्मक नेतृत्व के लिए विशेष रूप से जाने जाते रहे। उन्होंने सदैव युवा चिकित्सकों और विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए उन्हें बेहतर चिकित्सक बनने के लिए प्रेरित किया। यही कारण है कि उनके स्थानांतरण की खबर से मेडिकल कॉलेज परिवार में भावुक माहौल देखने को मिला। स्थानांतरण के अवसर पर आयोजित विदाई समारोह में राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.आशुतोष सयाना,वरिष्ठ चिकित्सकों,शिक्षकों,रेजिडेंट डॉक्टरों तथा कर्मचारियों ने डॉ.अजेय विक्रम सिंह के योगदान को याद करते हुए उन्हें भावभीनी विदाई दी। सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे राजकीय मेडिकल कॉलेज हरिद्वार में भी अपनी कार्यकुशलता,समर्पण और नेतृत्व क्षमता से चिकित्सा सेवाओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे। डॉ.अजेय विक्रम सिंह का श्रीनगर से स्थानांतरण केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं,बल्कि उस अध्याय का समापन है जिसने चिकित्सा शिक्षा,स्वास्थ्य सेवाओं और मानवीय संवेदनाओं के क्षेत्र में कई प्रेरणादायक उपलब्धियां दर्ज कीं। उनकी सेवाएं राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के इतिहास में लंबे समय तक सम्मान के साथ याद की जाएंगी।

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