
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। अखिल भारत हिन्दू महासभा संगठन ने देश के पांच महत्वपूर्ण राज्यों बिहार,उत्तराखंड,दिल्ली,हरियाणा एवं हिमाचल प्रदेश में बड़ा संगठनात्मक निर्णय लेते हुए प्रदेश समितियों तथा उनके अंतर्गत संचालित सभी प्रकोष्ठों और विंगों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। यह घोषणा अखिल भारत हिन्दू महासभा संगठन की राष्ट्रीय महामंत्री डॉ.इंदिरा तिवारी द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि महाराज के निर्देश एवं मार्गदर्शन में की गई। संगठन की ओर से जारी इस महत्वपूर्ण निर्णय को हिन्दू महासभा के व्यापक पुनर्गठन अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। बताया गया कि संगठन को अधिक सक्रिय,अनुशासित,प्रभावशाली एवं जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। संगठनात्मक समीक्षा के दौरान यह महसूस किया गया कि कई राज्यों में संगठन को नई ऊर्जा,नई सोच और मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है,जिसके चलते पुनर्गठन प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया। राष्ट्रीय महामंत्री डॉ.इंदिरा तिवारी ने जानकारी देते हुए कहा कि अब इन पांचों राज्यों में सबसे पहले व्यापक सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के माध्यम से युवाओं,मातृशक्ति,सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा समाज के विभिन्न वर्गों को संगठन से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। सदस्यता अभियान पूर्ण होने के बाद प्रदेश,जिला,महानगर,तहसील,वार्ड एवं ग्राम स्तर तक नई समितियों का गठन चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नई प्रदेश समितियों का गठन प्रारंभिक रूप से छह माह के लिए किया जाएगा। इस अवधि के दौरान संगठन विस्तार,जनसंपर्क,सक्रियता एवं कार्यशैली के आधार पर पदाधिकारियों का मूल्यांकन किया जाएगा। बेहतर कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं को संगठन में आगे बढ़ने एवं पदोन्नति का अवसर प्रदान किया जाएगा। डॉ.इंदिरा तिवारी ने कहा कि संगठन आने वाले समय में विशेष प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन भी करेगा,जिसमें कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को संगठन की विचारधारा,राष्ट्रवाद,सनातन संस्कृति तथा सामाजिक समरसता के संदेश को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि परम पूज्य स्वामी चक्रपाणि जी महाराज के नेतृत्व में संगठन राष्ट्रहित एवं सनातन मूल्यों को लेकर निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने अखिल भारत हिन्दू महासभा के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1915 में भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय सहित अनेक राष्ट्रनायकों के मार्गदर्शन में स्थापित यह संगठन देश की प्रथम राष्ट्रवादी राजनीतिक संगठनात्मक धारा रहा है,जिसने हिंदू समाज एवं सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए समय-समय पर महत्वपूर्ण संघर्ष किए। राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि महाराज की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन एवं न्यायिक संघर्ष में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा है। वर्ष 2006 से इलाहाबाद उच्च न्यायालय तथा बाद में सर्वोच्च न्यायालय में भी वे प्रमुख पक्षकार के रूप में जुड़े रहे और हिंदू पक्ष की मजबूती से पैरवी की। संगठन को नई दिशा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा डॉ.इंदिरा तिवारी के नेतृत्व में छह सदस्यीय विशेष समिति का भी गठन किया गया है। इस समिति में मनोज अलुंगल,अनुपम मिश्रा,राजकुमार सिंह,पवन पुनिया,नरेंद्र सैनी एवं जगविजय सिंह लोधी को शामिल किया गया है। यह समिति सदस्यता अभियान,संगठन विस्तार एवं नई इकाइयों के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। हिन्दू महासभा संगठन ने स्पष्ट किया है कि आगामी संगठनात्मक ढांचा पूर्ण पारदर्शिता,अनुशासन एवं संगठन हित को सर्वोपरि रखते हुए तैयार किया जाएगा। राजनीतिक एवं सामाजिक गलियारों में इस निर्णय को हिन्दू महासभा के बड़े रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है,जिसका प्रभाव आने वाले समय में कई राज्यों की संगठनात्मक गतिविधियों पर दिखाई दे सकता है।