
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। नगर निगम श्रीनगर द्वारा प्रस्तावित व्यावसायिक शुल्क में भारी वृद्धि के विरोध में अब शहर के व्यापारी और होटल कारोबारी खुलकर मैदान में उतर आए हैं। व्यापार सभा श्रीकोट गंगानाली तथा होटल एसोसिएशन श्रीनगर ने संयुक्त रूप से नगर निगम की इस नीति पर कड़ा विरोध जताते हुए महापौर को अलग-अलग ज्ञापन सौंपे हैं। दोनों संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शुल्क वृद्धि के निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो व्यापारी और होटल व्यवसायी व्यापक जनआंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे। व्यापार सभा श्रीकोट गंगानाली के अध्यक्ष नरेश नौटियाल के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि पहाड़ी क्षेत्रों की परिस्थितियां मैदानी क्षेत्रों से पूरी तरह भिन्न हैं। जहां मैदानी क्षेत्रों में वर्षभर व्यापारिक गतिविधियां संचालित होती हैं,वहीं श्रीनगर सहित पर्वतीय क्षेत्रों में सीमित अवधि का सीजन ही व्यापार का मुख्य आधार होता है। ऐसे में अत्यधिक व्यावसायिक शुल्क थोपना व्यापारियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने जैसा है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि वर्तमान समय में ऑनलाइन बाजार और बड़े-बड़े मॉल स्थानीय व्यापारियों के सामने गंभीर चुनौती बन चुके हैं। ऐसे हालात में शुल्क में भारी बढ़ोतरी छोटे एवं मध्यम व्यापारियों की कमर तोड़ने का काम करेगी। व्यापारियों ने नगर निगम पर मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्य बाजार क्षेत्रों में पर्याप्त शौचालय व्यवस्था नहीं है तथा कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। जब तक व्यापारियों को आवश्यक सुविधाएं नहीं मिलतीं,तब तक अतिरिक्त शुल्क वसूलना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। व्यापार सभा श्रीकोट गंगानाली के अध्यक्ष नरेश नौटियाल ने कहा कि श्रीनगर का व्यापारी वर्ग हमेशा नगर निगम के विकास कार्यों का समर्थन करता आया है,लेकिन बिना पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराए अत्यधिक शुल्क वृद्धि करना व्यापारियों के हितों के साथ न्याय नहीं है। उन्होंने कहा कि नगर निगम को पहले स्वच्छता,पार्किंग,शौचालय और कूड़ा प्रबंधन जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं को मजबूत करना चाहिए। यदि व्यापारी हितों की अनदेखी की गई तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होगा। दूसरी ओर होटल एसोसिएशन श्रीनगर ने भी महापौर को ज्ञापन भेजकर प्रस्तावित व्यावसायिक शुल्क वृद्धि का विरोध दर्ज कराया। एसोसिएशन के अध्यक्ष अप्पल रतूड़ी ने कहा कि पहाड़ों में होटल व्यवसाय पहले से ही सीमित सीजन पर निर्भर है। वर्ष के कुछ महीनों में ही व्यवसाय चलता है,जबकि पूरे साल स्टाफ,रखरखाव,बिजली-पानी और अन्य खर्चों का भार उठाना पड़ता है। ऐसे में मैदानी क्षेत्रों की तर्ज पर शुल्क निर्धारण करना व्यवहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि होटल व्यवसायी किसी भी शुल्क वृद्धि के विरोधी नहीं हैं,लेकिन वृद्धि तार्किक और व्यावहारिक होनी चाहिए। होटल एसोसिएशन ने पूर्व निर्धारित शुल्क में अधिकतम 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का सुझाव देते हुए कहा कि इससे व्यवसायियों पर अनावश्यक बोझ नहीं पड़ेगा और वे समय पर शुल्क जमा कर सकेंगे। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष अप्पल रतूड़ी ने कहा कि चारधाम यात्रा और पर्यटन से जुड़े होटल व्यवसायी पहले ही कई आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। पहाड़ों की विशेष परिस्थितियों को नजरअंदाज कर भारी शुल्क वृद्धि लागू करना होटल उद्योग को नुकसान पहुंचा सकता है। हमारी मांग है कि सरकार और नगर निगम पहाड़ी क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक निर्णय लें। हम विकास के विरोधी नहीं हैं,बल्कि ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जिसमें विकास भी हो और व्यापार भी सुरक्षित रह सके। व्यापार सभा और होटल एसोसिएशन के इस संयुक्त विरोध ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि श्रीनगर का व्यापारिक समुदाय इस मुद्दे को लेकर गंभीर है। दोनों संगठनों ने नगर निगम प्रशासन से शीघ्र संवाद स्थापित कर समाधान निकालने की मांग की है। व्यापारियों और होटल व्यवसायियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में व्यापक जनसमर्थन के साथ आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। इस अवसर पर व्यापार सभा श्रीकोट गंगानाली के महासचिव त्रिभुवन सिंह राणा,उपाध्यक्ष अनिल पोखरियाल,संगठन मंत्री प्रदीप रावत,कोषाध्यक्ष देवानन्द रतूड़ी,संतोष बुटोला,आशुतोष पोखरियाल,गणेश उनियाल,दीपक रमोला,विनोद लिंगवाल,चंद्रभूषण सेमवाल,मनमोहन रावत,अर्जुन रावत,शशिकांत घिल्डियाल,प्रशांत पंत,माधव भट्ट सहित बड़ी संख्या में व्यापारी उपस्थित रहे। सभी व्यापारियों ने एक स्वर में कहा कि नगर निगम द्वारा प्रस्तावित व्यावसायिक शुल्क वृद्धि को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा तथा व्यापारी हितों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष किया जाएगा। फिलहाल पूरे शहर की निगाहें नगर निगम प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं,क्योंकि यह मुद्दा सीधे श्रीनगर की व्यापारिक और पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ है।