माल्टा के छिलकों से सजे सपनों को मिली उड़ान-पहाड़ की महिलाओं ने गढ़ी समृद्धि और स्वाभिमान की नई कहानी

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड के पहाड़ों में अब विकास की नई कहानी केवल सड़कों,भवनों और योजनाओं तक सीमित नहीं है,बल्कि गांवों की महिलाओं के हाथों से तैयार हो रहे स्थानीय

📘 इन्हें भी पढ़ें

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड के पहाड़ों में अब विकास की नई कहानी केवल सड़कों,भवनों और योजनाओं तक सीमित नहीं है,बल्कि गांवों की महिलाओं के हाथों से तैयार हो रहे स्थानीय उत्पाद आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण का नया अध्याय लिख रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की सोच अब धरातल पर साकार होती दिखाई दे रही है। जनपद पौड़ी गढ़वाल में ग्रामोत्थान परियोजना के अंतर्गत शुरू हुई एक अभिनव पहल ने माल्टा के उन छिलकों को,जिन्हें कभी अनुपयोगी समझकर फेंक दिया जाता था,आज ग्रामीण महिलाओं की आय,सम्मान और स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बना दिया है। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में माल्टा केवल एक फल नहीं,बल्कि यहां की कृषि,संस्कृति और ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है। वर्षों तक माल्टा का उपयोग फल और जूस तक ही सीमित रहा,जबकि उसके छिलके कचरे के रूप में नष्ट हो जाते थे। लेकिन अब वेस्ट टू वेल्थ की अवधारणा के तहत यही छिलके मूल्यवर्धित हर्बल उत्पादों में परिवर्तित होकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहे हैं। जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया के कुशल निर्देशन और ग्रामोत्थान परियोजना के तकनीकी सहयोग से उमंग स्वायत्त सहकारिता द्वारा संचालित बेडू एवं फल प्रसंस्करण इकाई में महिलाओं ने एक अनूठा नवाचार किया है। यहां माल्टा के छिलकों से माल्टा पील फेस पैक,फेस स्क्रब,हर्बल उबटन और अन्य प्राकृतिक सौंदर्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों में मुल्तानी मिट्टी,चंदन,गुलाब पाउडर,हल्दी,बेसन और नीम जैसे प्राकृतिक अवयवों का उपयोग किया जाता है,जिससे ये पूरी तरह हर्बल,सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल बनते हैं। बाजार में रासायनिक उत्पादों के बढ़ते दुष्प्रभावों के बीच प्राकृतिक और हर्बल उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे समय में पहाड़ की महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे ये उत्पाद न केवल उपभोक्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं,बल्कि उत्तराखंड की पारंपरिक ज्ञान-परंपरा और प्राकृतिक संसाधनों की उपयोगिता को भी नई पहचान दिला रहे हैं। इस पहल की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इससे ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। जो महिलाएं कभी घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित थीं,वे आज उत्पादन,पैकेजिंग,ब्रांडिंग और विपणन की जिम्मेदारी संभालते हुए आत्मनिर्भर उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और उनमें आत्मविश्वास का भी अभूतपूर्व संचार हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार माल्टा के छिलकों में प्रचुर मात्रा में विटामिन-सी,प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट तथा त्वचा को पोषण देने वाले अनेक तत्व मौजूद होते हैं। यही कारण है कि विश्वभर में सिट्रस आधारित स्किन केयर उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। उत्तराखंड में तैयार किए जा रहे इन उत्पादों को हिलांस जैसे स्थानीय ब्रांडों के माध्यम से बाजार तक पहुंचाया जा रहा है,जिससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने लगी है। ग्रामोत्थान परियोजना के जिला परियोजना प्रबंधक कुलदीप बिष्ट ने बताया कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप स्थानीय संसाधनों को स्थानीय लोगों की आजीविका से जोड़ने का कार्य निरंतर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल उत्पाद निर्माण तक सीमित नहीं है,बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने,पलायन रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक प्रभावी कदम है। आज पौड़ी गढ़वाल की यह पहल पूरे उत्तराखंड के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है। यह साबित कर रही है कि यदि स्थानीय संसाधनों का वैज्ञानिक और रचनात्मक उपयोग किया जाए तो पहाड़ की चुनौतियों को अवसरों में बदला जा सकता है। माल्टा के छिलकों से तैयार हो रहे ये हर्बल उत्पाद केवल सौंदर्य प्रसाधन नहीं,बल्कि महिला सशक्तिकरण,नवाचार और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की सशक्त पहचान बन चुके हैं। निस्संदेह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की दूरदर्शी सोच और स्थानीय प्रशासन के प्रभावी प्रयासों से शुरू हुई यह पहल भविष्य में प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक मॉडल के रूप में स्थापित होगी और उत्तराखंड को आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

नवीनतम समाचार – Dainik Himalya Times

नवीनतम समाचार

Loading...