
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित तीन दिवसीय नेपाल-भारत साहित्य महोत्सव 2026 में उत्तराखंड की सांस्कृतिक और साहित्यिक चेतना का भव्य प्रतिनिधित्व देखने को मिला। 29 से 31 मई 2026 तक आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक आयोजन में हिमालयन साहित्य एवं कला परिषद् श्रीनगर उत्तराखण्ड के पंद्रह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने प्रतिभाग कर न केवल उत्तराखंड की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया,बल्कि अपनी प्रभावशाली रचनात्मक उपस्थिति से सभी का ध्यान भी आकर्षित किया। क्रांतिधरा साहित्य अकादमी मेरठ उत्तर प्रदेश एवं हिंदी अकादमी नेपाल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस भव्य महोत्सव में भारत,नेपाल और भूटान सहित विभिन्न देशों के साहित्यकारों,चिंतकों एवं सांस्कृतिक हस्तियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम साहित्य,संस्कृति,भाषा और भारत-नेपाल मैत्री संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला साबित हुआ। हिमालयन साहित्य एवं कला परिषद् श्रीनगर के प्रतिनिधिमंडल में कविराज नीरज नैथानी,विमल बहुगुणा,रक्षा उनियाल,डॉ.प्रकाश चमोली,मीनाक्षी चमोली,देवेंद्र उनियाल,माधुरी नैथानी,कौशल्या नैथानी,आरती रावत पुंडीर,शम्भू प्रसाद भट्ट स्नेहिल,देवी भट्ट,संजय नौडियाल,अनीता नौडियाल,गोपाल कृष्ण नौटियाल तथा मंजू नौटियाल शामिल रहे। सभी साहित्यकारों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं एवं काव्य पाठ के माध्यम से उत्तराखंड की लोक-संस्कृति,लोकजीवन,प्रकृति और मानवीय संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। महोत्सव में नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री झलनाथ खनाल,भूटान से समिति अध्यक्ष जनार्दन अधिकारी,भारत से वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.विजय पंडित,नेपाल-भारत मैत्री संघ के अध्यक्ष शैलेन्द्र मोहन झा,भूटान के साहित्यकार अच्युत घिमिरे तथा लक्ष्मी दास की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। इस अवसर पर आयोजित काव्य गोष्ठियों,साहित्यिक विमर्शों एवं सांस्कृतिक सत्रों में श्रीनगर गढ़वाल के साहित्यकारों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से श्रोताओं का भरपूर स्नेह और सम्मान प्राप्त किया। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को उनके साहित्यिक योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया,जिसे उत्तराखंड के साहित्यिक जगत के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। प्रतिभागियों ने कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक आयोजन केवल साहित्य के आदान-प्रदान का माध्यम नहीं होते,बल्कि विभिन्न देशों की संस्कृति,भाषा,परंपराओं और मानवीय मूल्यों को एक-दूसरे के निकट लाने का सशक्त मंच भी प्रदान करते हैं। काठमांडू में आयोजित यह महोत्सव भारत-नेपाल की सांस्कृतिक मित्रता और साहित्यिक साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ करने वाला साबित हुआ। हिमालयन साहित्य एवं कला परिषद् श्रीनगर उत्तराखण्ड की यह सहभागिता निस्संदेह उत्तराखंड के साहित्यिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज होगी,जिसने देवभूमि की साहित्यिक प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का कार्य किया है।