वर्षों से बंद उद्योगों में फिर गूंजेगा उत्पादन की आवाज-सहकारिता के सहारे रोजगार और समृद्धि का नया अध्याय शुरू

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड में सहकारिता आधारित औद्योगिक विकास को नई दिशा देने की महत्वाकांक्षी पहल के तहत उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ (यूसीएफ) ने वर्षों से निष्क्रिय पड़ी सहकारी औद्योगिक

📘 इन्हें भी पढ़ें

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड में सहकारिता आधारित औद्योगिक विकास को नई दिशा देने की महत्वाकांक्षी पहल के तहत उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ (यूसीएफ) ने वर्षों से निष्क्रिय पड़ी सहकारी औद्योगिक इकाइयों के पुनरुद्धार का खाका तैयार कर लिया है। इस योजना के अंतर्गत रानीखेत स्थित को-ऑपरेटिव ड्रग फैक्ट्री (सीडीएफ) और हल्दूचैड़ स्थित उत्तराखंड स्टेट मेडिसिन एंड पैरामेडिकल्स लिमिटेड (यूएमपीएल) को आधुनिक तकनीक और अत्याधुनिक संसाधनों से सुसज्जित कर पुनः संचालित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह पहल केवल औद्योगिक इकाइयों को पुनर्जीवित करने तक सीमित नहीं रहेगी,बल्कि प्रदेश में रोजगार,आयुर्वेदिक औषधि निर्माण,किसान कल्याण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगी। सूबे के सहकारिता मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार सहकारिता क्षेत्र को आर्थिक विकास और आत्मनिर्भरता का सशक्त आधार बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी सोच के अनुरूप लंबे समय से बंद पड़ी सहकारी इकाइयों को नए स्वरूप में विकसित कर उन्हें उत्पादन और रोजगार के प्रमुख केंद्रों के रूप में स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यूसीएफ द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना के अनुसार दोनों इकाइयों में व्यापक नवीनीकरण,आधुनिक मशीनरी की स्थापना,अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का विकास तथा गुणवत्ता आधारित उत्पादन प्रणाली लागू की जाएगी। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड प्राकृतिक औषधीय संपदा से समृद्ध राज्य है और यहां उत्पादित जड़ी-बूटियों एवं औषधीय पौधों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए इन इकाइयों को आधुनिक आयुर्वेदिक औषधि निर्माण केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे राज्य की पारंपरिक आयुर्वेदिक विरासत को भी नया विस्तार मिलेगा। आयुर्वेदिक औषधियों के उत्पादन का बनेगा बड़ा केंद्र
पुनर्जीवित होने के बाद दोनों इकाइयों में पारंपरिक एवं आधुनिक आयुर्वेदिक औषधियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाएगा। इनमें चूर्ण,वटी,रस,भस्म,तैल,आसव-अरिष्ट,गुग्गुल तथा पाक-अवलेह जैसी औषधियां शामिल रहेंगी। महाशंख वटी,आरोग्यवर्धिनी वटी,त्रिफला चूर्ण,अश्वगंधा चूर्ण,अर्जुनारिष्ट,दशमूलारिष्ट,महानारायण तैल और अभ्रक भस्म जैसे उत्पादों का निर्माण कर उन्हें राष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि इन इकाइयों को उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप विकसित कर उत्तराखंड को आयुर्वेदिक औषधि निर्माण के क्षेत्र में एक मजबूत पहचान दिलाई जाए। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक उत्पादन प्रक्रिया के माध्यम से उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी,जिससे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा की संभावनाएं बढ़ेंगी। डॉ.धन सिंह रावत ने कहा कि दोनों इकाइयों के पूर्ण संचालन से स्थानीय स्तर पर 200 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इससे रानीखेत,हल्दूचैड़ तथा आसपास के क्षेत्रों के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध होगा। इसके अलावा औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती करने वाले 500 से 1000 किसानों को भी इन इकाइयों से सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि कच्चे माल की आपूर्ति,परिवहन,प्रसंस्करण,पैकेजिंग,विपणन और वितरण जैसी गतिविधियों से हजारों लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्राप्त होगी। सहकारिता मंत्री ने बताया कि दोनों इकाइयों के पूर्ण क्षमता से संचालन के बाद लगभग 100 करोड़ रुपये वार्षिक कारोबार का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अनुमान है कि इससे प्रतिवर्ष 10 से 15 करोड़ रुपये तक का लाभ अर्जित किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि आधुनिक उत्पादन प्रणाली और गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के बल पर सीडीएफ और यूएमपीएल को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धी संस्थाओं के रूप में विकसित किया जाएगा। डॉ.रावत ने कहा कि उत्तराखंड में औषधीय एवं सुगंधित पौधों की अपार संभावनाएं हैं। राज्य सरकार किसानों को औषधीय खेती से जोड़ने,युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है। सीडीएफ और यूएमपीएल का पुनर्संचालन इसी व्यापक सोच का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल उद्योगों को पुनर्जीवित करने का प्रयास नहीं है,बल्कि सहकारिता आधारित औद्योगिक विकास का एक आदर्श मॉडल बनेगी। इससे आयुर्वेद,किसान कल्याण,रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास को एक साथ नई दिशा मिलेगी। उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ की यह पहल प्रदेश में आत्मनिर्भरता,आर्थिक समृद्धि और सहकारिता आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

नवीनतम समाचार – Dainik Himalya Times

नवीनतम समाचार

Loading...