
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। सड़क दुर्घटनाओं में लगातार हो रही जनहानि को रोकने और युवाओं को यातायात नियमों के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से कोटद्वार स्थित भगवंत ग्लोबल विश्वविद्यालय (बीजीयू) में सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में युवाओं को सुरक्षित यातायात के महत्व से अवगत कराने के साथ-साथ हेलमेट एवं फर्स्ट एड किट वितरित कर जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश दिया गया। कार्यशाला का नेतृत्व करते हुए क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) विमल पाण्डेय ने विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाएं केवल एक व्यक्ति को नहीं,बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करती हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक का यह नैतिक दायित्व है कि वह यातायात नियमों का पालन करे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करे। उन्होंने विद्यार्थियों को हेलमेट और सीट बेल्ट के नियमित उपयोग,वाहन चलाते समय मोबाइल फोन से दूरी बनाए रखने,निर्धारित गति सीमा का पालन करने तथा नशे की हालत में वाहन न चलाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि थोड़ी सी लापरवाही जिंदगी भर का दर्द बन सकती है,जबकि यातायात नियमों का पालन जीवन की सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल है। कार्यक्रम के दौरान सड़क दुर्घटनाओं के बाद अपनाई जाने वाली त्वरित प्रतिक्रिया और गोल्डन ऑवर की महत्ता पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि दुर्घटना के बाद का पहला घंटा घायल व्यक्ति के जीवन को बचाने में निर्णायक भूमिका निभाता है। इस दौरान प्राथमिक उपचार,एंबुलेंस सेवा से तत्काल संपर्क और दुर्घटना पीड़ितों की सुरक्षित सहायता के बारे में व्यावहारिक जानकारी साझा की गई। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक) अंशुल बिष्ट ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा को केवल एक अभियान नहीं,बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे स्वयं नियमों का पालन करें और अपने परिवार तथा समाज में भी जागरूकता फैलाने का कार्य करें। कार्यक्रम के दौरान चयनित छात्र-छात्राओं को हेलमेट एवं फर्स्ट एड किट वितरित किए गए। वक्ताओं ने कहा कि हेलमेट सड़क दुर्घटनाओं में सिर की गंभीर चोटों से बचाने वाला सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच है और इसका नियमित उपयोग अनेक बहुमूल्य जिंदगियों को बचा सकता है। कार्यशाला में मौजूद विद्यार्थियों ने सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने,वाहन चलाते समय सतर्कता बरतने तथा समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं,शिक्षकगण एवं विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि सड़क सुरक्षा केवल सरकारी नियम नहीं,बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन और परिवार की सुरक्षा से जुड़ा सामाजिक दायित्व है। युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाकर सुरक्षित और जिम्मेदार समाज का निर्माण किया जा सकता है।