निराशा के दौर में आशा का दीप-डॉ.चमोला की अनमोल प्रेरणादायिनी प्रसंग बनी प्रेरणा का नया ग्रंथ

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक चेतना से समृद्ध धरती श्रीनगर से साहित्य जगत को एक और मूल्यवान कृति प्राप्त हुई है। वरिष्ठ शिक्षाविद,साहित्यकार एवं चिंतक डॉ.अखिलेश चन्द्र

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक चेतना से समृद्ध धरती श्रीनगर से साहित्य जगत को एक और मूल्यवान कृति प्राप्त हुई है। वरिष्ठ शिक्षाविद,साहित्यकार एवं चिंतक डॉ.अखिलेश चन्द्र चमोला वाचस्पति की नवप्रकाशित पुस्तक अनमोल प्रेरणादायिनी प्रसंग का प्रकाशन साहित्य प्रेमियों,शिक्षाविदों और समाज के जागरूक वर्गों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। वर्तमान समय में जब समाज नैतिक मूल्यों के क्षरण,मानसिक तनाव,सामाजिक विघटन और सांस्कृतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है,ऐसे दौर में यह पुस्तक केवल साहित्यिक रचना नहीं बल्कि जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाली प्रेरणा-पुस्तिका के रूप में सामने आई है। पुस्तक में संकलित प्रसंग भारतीय संस्कृति,मानवीय संवेदनाओं,नैतिक आदर्शों और जीवन-दर्शन के ऐसे आयामों को उजागर करते हैं,जो पाठकों को आत्ममंथन के साथ-साथ जीवन में आगे बढ़ने की ऊर्जा प्रदान करते हैं। डॉ.चमोला द्वारा रचित यह कृति समाज के प्रत्येक वर्ग,विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होने की क्षमता रखती है। पुस्तक में वर्णित प्रसंग संघर्ष,धैर्य,आत्मविश्वास,कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय मूल्यों के संरक्षण का संदेश देते हैं। सरल,सहज और प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत सामग्री पाठकों को सीधे आत्मिक स्तर पर स्पर्श करती है। संस्कारों और जीवन मूल्यों का जीवंत दस्तावेज अनमोल प्रेरणादायिनी प्रसंग में ऐसे अनेक प्रेरक प्रसंगों का समावेश किया गया है जो व्यक्ति को निराशा से आशा की ओर,भ्रम से स्पष्टता की ओर तथा नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर अग्रसर करते हैं। पुस्तक भारतीय संस्कृति की उस विरासत को भी सशक्त स्वर देती है,जिसमें मानवता,करुणा,सेवा,त्याग और सद्भावना को जीवन का आधार माना गया है। पुस्तक के लेखक डॉ.अखिलेश चन्द्र चमोला ने कहा कि आज की तेज रफ्तार जीवनशैली में मनुष्य बाहरी उपलब्धियों के पीछे दौड़ते हुए आंतरिक शांति और नैतिक मूल्यों से दूर होता जा रहा है। ऐसे समय में यह पुस्तक पाठकों को आत्मबल,आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच प्रदान करने का विनम्र प्रयास है। उन्होंने कहा कि पुस्तक का प्रत्येक प्रसंग वास्तविक जीवन के अनुभवों और गहन चिंतन से प्रेरित है,जिसका उद्देश्य समाज में नैतिक जागरूकता और मानवीय संवेदनाओं को सुदृढ़ करना है। श्रीनगर गढ़वाल सहित प्रदेशभर के शिक्षाविदों,साहित्यकारों,सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध जनों ने पुस्तक के प्रकाशन का स्वागत करते हुए इसे वर्तमान समय की आवश्यकता बताया है। उनका मानना है कि यह कृति केवल पढ़ने के लिए नहीं,बल्कि जीवन में आत्मसात करने योग्य प्रेरक मार्गदर्शिका है। पुस्तक समाज में सकारात्मक सोच,सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों के पुनर्स्थापन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में जहां युवा वर्ग अनेक प्रकार की चुनौतियों और भ्रमों से जूझ रहा है,वहां अनमोल प्रेरणादायिनी प्रसंग जैसी पुस्तकें उन्हें सही दिशा,आत्मविश्वास और जीवन के वास्तविक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करेंगी। यह कृति न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि सामाजिक,सांस्कृतिक और नैतिक जागरण का भी प्रभावी माध्यम बन सकती है। निस्संदेह डॉ.अखिलेश चन्द्र चमोला की यह नवीन कृति साहित्य,संस्कृति और समाज के मध्य एक सशक्त सेतु का कार्य करेगी तथा पाठकों के जीवन में नई चेतना,नई ऊर्जा और नई प्रेरणा का संचार करेगी।

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