
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। पुलिस को अक्सर कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्था के रूप में देखा जाता है,लेकिन कई अवसर ऐसे भी आते हैं जब वर्दी के पीछे छिपी मानवीय संवेदनाएं समाज के सामने एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरती हैं। ऐसा ही एक मार्मिक और हृदयस्पर्शी मामला श्रीनगर गढ़वाल में सामने आया,जहां पौड़ी पुलिस ने न केवल अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया,बल्कि मानवता,संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की ऐसी मिसाल पेश की,जिसने हर संवेदनशील व्यक्ति को भावुक कर दिया। बेस चिकित्सालय श्रीकोट में उपचार के दौरान एक 70 वर्षीय वृद्ध महिला का निधन हो गया था। महिला की पहचान तत्काल नहीं हो सकी और न ही कोई परिजन उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचा। ऐसे में चौकी श्रीकोट पुलिस ने शव को नियमानुसार मोर्चरी में सुरक्षित रखकर उसकी पहचान कराने के लिए हर संभव प्रयास शुरू किए। पुलिस कंट्रोल रूम,डीसीआरबी,सोशल मीडिया तथा अन्य माध्यमों से लगातार कई दिनों तक महिला के परिजनों और पहचान की तलाश की जाती रही। लंबे प्रयासों के बाद 1 जून 2026 को मृतका की पहचान रुद्रप्रयाग निवासी बिजली देवी (70 वर्ष) के रूप में हुई। हालांकि पहचान होने के बाद भी परिस्थितियां आसान नहीं थीं। महिला के एचआईवी पॉजिटिव होने के कारण परिवारजन अंतिम संस्कार और अन्य प्रक्रियाओं को लेकर भयभीत थे तथा आगे आने से हिचकिचा रहे थे। ऐसी विषम परिस्थितियों में चौकी प्रभारी श्रीकोट राजेश असवाल और उनकी टीम ने असाधारण संवेदनशीलता का परिचय दिया। पुलिस ने परिजनों से लगातार संवाद स्थापित कर उन्हें विश्वास में लिया और आश्वस्त किया कि सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पुलिस की निगरानी में सुरक्षित रूप से पूरी कराई जाएंगी। पुलिस की पहल और समझाइश के बाद परिजन मौके पर पहुंचे,जिसके उपरांत पंचायतनामा एवं पोस्टमार्टम की समस्त कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद पुलिस कर्मियों ने परिजनों की उपस्थिति में मृतका को पूर्ण सम्मान,गरिमा और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम विदाई दिलाई। यह घटना केवल एक प्रशासनिक कार्यवाही नहीं,बल्कि मानवता के प्रति पुलिस की संवेदनशील प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण बन गई। जिस समय एक वृद्ध मां का अंतिम सफर अनिश्चितता और उपेक्षा के बीच अटका हुआ था,उस समय पौड़ी पुलिस उसके सम्मान और गरिमा की रक्षा के लिए आगे आई और यह संदेश दिया कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक संवेदनाएं पहुंचाना भी पुलिस की जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उल्लेखनीय है कि शव की पहचान न होने की स्थिति में शासनादेशों के अनुरूप शव को मेडिकल संस्थान को सौंपने का प्रयास किया गया था,किंतु विशेष परिस्थितियों के कारण यह संभव नहीं हो सका। इसके बाद भी पुलिस ने हार नहीं मानी और लगातार प्रयास जारी रखे,जिसके परिणामस्वरूप मृतका की पहचान संभव हो सकी। इस पूरी कार्यवाही में चौकी प्रभारी श्रीकोट राजेश असवाल,आरक्षी हरीश लिंगवाल,होमगार्ड रमेश खरे तथा अंतिम संस्कार से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। उनके इस मानवीय कार्य की स्थानीय लोगों द्वारा भी मुक्तकंठ से प्रशंसा की जा रही है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि पुलिस केवल कानून की संरक्षक ही नहीं,बल्कि कठिन परिस्थितियों में मानवता की सबसे मजबूत साथी भी बन सकती है।