
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
देवप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय,श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर के छात्रों को प्रेरित किया कि संस्कृत का ध्वज सदैव ऊंचा रखें। प्रबोधन कार्यशाला में व्याख्यान देते हुए पद्मभूषण कोश्यारी ने कहा कि हम और तुम जिस दिन नहीं रहेंगे,संस्कृत उस दिन भी रहेगी। उन्होंने श्री रघुनाथ बालगुरुकुलम् के बटुकों से संवाद भी किया। इससे पहले उन्होंने संगम पर गंगा आरती की। निदेशक प्रो पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने कोश्यारी को सम्मानित किया। महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल कोश्यारी ने श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में प्रबोधन कार्यशाला में व्याख्यान देते हुए कहा कि शास्त्र पढ़ने से मन की शुद्धि होती है,इससे हमारे अनेक भ्रम दूर होते हैं। श्री रघुनाथ बाल गुरुकुलम् के बटुकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वे मोबाइल के इस्तेमाल से जितना हो सके दूर रहें और स्वयं में गुरुकुल के संस्कार कूट-कूट कर भरें। संस्कारों के आधार पर ही व्यक्ति राम भी बनता है और रावण भी। व्यक्ति की सफलता उसके संकल्प पर निर्भर होती है। अभी से आप जो संकल्प ले लेंगे,निश्चित रूप से वही बनेंगे। उन्होंने ब्रह्मचारियों से कहा कि गुरुकुल एक आवासीय विद्यालय ही नहीं,दुर्व्यसनों से दूर रखने का भी कार्य करता है। यह हमारी अनावश्यक इच्छाओं को पास फटकने नहीं देता है और सफलता के लिए विषय-वासनाओं से दूर रहना आवश्यक है। हमारे अवतारी ईश्वर श्रीराम और श्रीकृष्ण ने भी गुरुकुलों में ही अध्ययन किया है। गुरुकुल से निकले बच्चे राष्ट्र निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करते हैं। पद्मभूषण श्री कोश्यारी ने कहा कि संस्कृत संस्कारों की भाषा है। यह हमारे जन्म से आरंभ होती है और हमारे अंतिम संस्कारों तक साथ रहती है। यह भाषा शाश्वत और सार्वभौम है। जब हम और तुम भी नहीं रहेंगे,संस्कृत तब भी रहेगी। संस्कृत के महत्त्व और लोगों की इसके प्रति बढ़ती रुचि यह संकेत देती है कि एक दिन संस्कृत पूरे देश की भाषा बन जाएगी। परिसर निदेशक प्रो.पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने कोश्यारी को सम्मानित करते हुए कहा कि यह हमारे परिसर का सौभाग्य है कि आप हमारे छात्रों को आशीर्वाद देने पहुंचे। कोश्यारी ने संगम पर विधायक विनोद कंडारी के साथ गंगा आरती और पूजन किया। कार्यशाला में डॉ.अरविन्द सिंह गौर,डॉ.सुरेश शर्मा,डॉ.सुमिति सैनी,डॉरवींद्र उनियाल,अंकुर वत्स,रजत गौतम छेत्री,डॉ.मनीषा आर्या,डॉ.सोमेश बहुगुणा आदि उपस्थित थे।