हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षभर हरे चारे की कमी से जूझ रहे दुग्ध उत्पादकों के लिए श्रीनगर आंचल दुग्ध उत्पादन सहकारी संघ लिमिटेड ने एक दूरदर्शी और किसान हितैषी पहल की है। दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने तथा पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संघ ने अपने परिसर में एक एकड़ भूमि पर उच्च गुणवत्ता वाली सुपर नैपीयर घास का सफल उत्पादन किया है। इस पहल से न केवल पौड़ी जनपद बल्कि पूरे गढ़वाल मंडल के हजारों पशुपालकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। दुग्ध संघ द्वारा आगामी 15 जुलाई से सुपर नैपीयर घास की लगभग पांच लाख कटिंग किसानों,दुग्ध उत्पादक समितियों एवं दुग्ध संघों को मात्र एक रुपये प्रति कटिंग की अत्यंत रियायती दर पर उपलब्ध कराई जाएगी। यह कदम पर्वतीय क्षेत्रों में हरे चारे की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार सुपर नैपीयर घास अत्यधिक पौष्टिक,तेजी से बढ़ने वाली तथा बार-बार कटाई योग्य चारा फसल है। एक बार रोपण के बाद लंबे समय तक इसका उत्पादन लिया जा सकता है, जिससे पशुपालकों को वर्षभर हरा चारा उपलब्ध रहेगा। इससे पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होगा, दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी और पशुपालकों की आय भी बढ़ेगी। इस योजना का सबसे बड़ा सामाजिक पक्ष यह है कि पर्वतीय क्षेत्रों की माताओं और बहनों को अब हरे चारे के लिए घने जंगलों का रुख कम करना पड़ेगा। आज भी अनेक महिलाएं प्रतिदिन कई किलोमीटर दूर जंगलों में घास काटने जाती हैं,जहां उन्हें गुलदार,भालू और अन्य जंगली जानवरों के खतरे का सामना करना पड़ता है। यदि गांवों के आसपास ही सुपर नैपीयर घास का उत्पादन बढ़ता है तो महिलाओं की कठिन मेहनत कम होगी,उनका समय बचेगा और वन्यजीवों से होने वाले जोखिम में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। श्रीनगर आंचल दुग्ध उत्पादन सहकारी संघ लिमिटेड की यह पहल पर्वतीय कृषि एवं पशुपालन के लिए एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है। संघ के इस प्रयास से दुग्ध उत्पादन को नई गति मिलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी मजबूत होंगे। इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने में दुग्ध संघ के प्रबंधक श्रवण कुमार शर्मा की विशेष भूमिका रही है। उनके प्रयासों से किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुपर नैपीयर घास का उत्पादन किया गया है,ताकि अधिक से अधिक पशुपालक इसका लाभ उठा सकें। क्षेत्र के किसान एवं दुग्ध उत्पादक संघ की इस पहल की सराहना कर रहे हैं और इसे पर्वतीय क्षेत्रों में दुग्ध विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मान रहे हैं। कृषि एवं पशुपालन से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि इस मॉडल का व्यापक स्तर पर विस्तार किया गया तो आने वाले वर्षों में गढ़वाल के पर्वतीय क्षेत्रों में चारे की समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है। इससे दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा,पशुपालकों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी और पर्वतीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।