हरेला पर भागीरथी कला संगम ने जगाई हरित चेतना-गंगा दर्शन मंदिर परिसर से प्रकृति संरक्षण का दिया सशक्त संदेश

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक संस्कृति,प्रकृति के प्रति आस्था और पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक हरेला महापर्व के अवसर पर देवभूमि श्रीनगर की अग्रणी सामाजिक,सांस्कृतिक एवं धार्मिक संस्था भागीरथी

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक संस्कृति,प्रकृति के प्रति आस्था और पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक हरेला महापर्व के अवसर पर देवभूमि श्रीनगर की अग्रणी सामाजिक,सांस्कृतिक एवं धार्मिक संस्था भागीरथी कला संगम ने श्रीक्षेत्र स्थित गंगा दर्शन राधा-कृष्ण मंदिर परिसर में वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित कर प्रकृति संरक्षण का प्रेरणादायी संदेश दिया। हरियाली के इस महाअभियान में संस्था के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया तथा उनके संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया। करीब दो घंटे तक चले इस अभियान के दौरान मंदिर परिसर और उसके आसपास के क्षेत्र में पौधारोपण किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं,बल्कि समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना,धार्मिक स्थलों को हरित स्वरूप प्रदान करना और नई पीढ़ी को प्रकृति से जोड़ना भी रहा। उपस्थित सदस्यों ने कहा कि वृक्ष मानव जीवन के आधार हैं और इनका संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। संस्था के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद बड़थ्वाल ने सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भागीरथी कला संगम केवल सांस्कृतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है,बल्कि समाज,संस्कृति,धर्म,स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी निरंतर सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य ऐसे जनहितकारी कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में सकारात्मक चेतना का संचार करना तथा भागीरथी कला संगम को जनसेवा की अग्रणी संस्था के रूप में स्थापित करना है। संस्था के निर्देशक ने कहा कि इस प्रकार के सामूहिक कार्यक्रम संगठन की ऊर्जा,एकजुटता और सामाजिक दायित्व की भावना को और अधिक मजबूत करते हैं। उन्होंने बताया कि भविष्य में भी वृक्षारोपण,स्वच्छता अभियान,सांस्कृतिक संरक्षण,धार्मिक आयोजनों और सामाजिक जन-जागरूकता से जुड़े अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे,ताकि देवभूमि श्रीनगर की सांस्कृतिक पहचान और पर्यावरणीय विरासत को और अधिक सशक्त बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि भागीरथी कला संगम वर्षों से श्रीनगर क्षेत्र में स्वच्छता अभियान,पर्यावरण संरक्षण,सांस्कृतिक आयोजनों,धार्मिक कार्यक्रमों और सामाजिक सरोकारों से जुड़े अभियानों में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाता रहा है। संस्था का प्रयास केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं,बल्कि समाज में सेवा,सहयोग,संस्कार और प्रकृति संरक्षण की भावना को मजबूत करना है। इस अवसर पर संस्था के उपाध्यक्ष मुकेश नौटियाल,सचिव पदमेंद्र रावत,वरिष्ठ संरक्षक रमेश चंद्र थपलियाल,भगत सिंह बिष्ट,दीनबंधु सिंह चौहान,रवि पुरी,संजय कोठारी,राजेंद्र रावत,रघुवीर सिंह रावत,प्रमोद नौडियाल,किशोरी लाल नौटियाल,धर्मेंद्र कुमार,हरेंद्र तोमर,अवधेश मणि लाल,यमुना प्रसाद काला सहित संस्था के अनेक सदस्य उपस्थित रहे और सभी ने पौधों के संरक्षण तथा हरित श्रीनगर के निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया। हरेला महापर्व पर आयोजित इस प्रेरणादायी कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि प्रकृति की सेवा ही मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। जब सामाजिक,सांस्कृतिक और धार्मिक संस्थाएं पर्यावरण संरक्षण का दायित्व अपने हाथों में लेकर आगे आती हैं,तब समाज में जनजागरण की एक नई चेतना जन्म लेती है। भागीरथी कला संगम का यह अभियान निश्चित रूप से हरित,स्वच्छ और संस्कारित देवभूमि श्रीनगर के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में याद किया जाएगा।

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