उत्तराखंड की शिक्षा में नवाचार का नया अध्याय-हर डायट में आधुनिक प्रशिक्षण और मानसिक स्वास्थ्य पर रहेगा विशेष फोकस

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक,नवाचार आधारित और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार ने महत्वपूर्ण पहल करते हुए राज्य के सभी जिला शिक्षा

📘 इन्हें भी पढ़ें

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक,नवाचार आधारित और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार ने महत्वपूर्ण पहल करते हुए राज्य के सभी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) को शैक्षणिक उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। प्रदेश के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अब शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में पारंपरिक पद्धतियों के स्थान पर नवाचार,आधुनिक शिक्षण तकनीकों,मानसिक स्वास्थ्य,नैतिक मूल्यों तथा सामाजिक सरोकारों को प्रमुखता दी जाएगी,ताकि शिक्षक बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित कर सकें। शनिवार को विद्यालयी शिक्षा महानिदेशालय स्थित समग्र शिक्षा सभागार में आयोजित राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) तथा प्रदेश के सभी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए शिक्षा मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का आधार सक्षम और प्रशिक्षित शिक्षक होते हैं,इसलिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी,व्यवहारिक और तकनीक आधारित बनाया जाना समय की आवश्यकता है। डॉ.धन सिंह रावत ने कहा कि प्रत्येक डायट अपने स्तर पर नवाचार आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करे। प्रशिक्षण कार्यशालाओं में आधुनिक शिक्षण पद्धतियों,डिजिटल तकनीक,रचनात्मक गतिविधियों तथा व्यवहारिक शिक्षण मॉडल को शामिल किया जाए,ताकि शिक्षक विद्यालयों में बच्चों की सीखने की क्षमता को और अधिक विकसित कर सकें। उन्होंने विशेष रूप से निर्देश दिए कि सभी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नशामुक्ति अभियान,पर्यावरण संरक्षण,सामाजिक एवं भावनात्मक अधिगम,नैतिक शिक्षा तथा मानसिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अनिवार्य सत्र आयोजित किए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिक्षक को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी प्रशिक्षण दिया जाना आवश्यक है, जिससे वे विद्यार्थियों में तनाव,अवसाद अथवा अन्य मानसिक समस्याओं के शुरुआती संकेतों की पहचान कर समय रहते उचित मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध करा सकें। शिक्षा मंत्री ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों को समाज से जोड़ने पर भी बल देते हुए निर्देश दिए कि कार्यशालाओं में पद्मश्री सम्मानित व्यक्तित्वों,साहित्यकारों,लेखकों,शिक्षाविदों,अभिभावकों तथा ग्राम प्रधानों को भी आमंत्रित किया जाए,ताकि शिक्षकों को समाज के विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवों से सीखने और विद्यार्थियों तक प्रेरणादायक संदेश पहुंचाने का अवसर मिल सके। बैठक में उन्होंने प्रदेश के सभी डायटों को विषयवार शैक्षणिक उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने बताया कि विभिन्न डायटों को कक्षा 1 से 8 तथा कक्षा 9 से 12 तक के लिए सामाजिक अध्ययन,राजनीति विज्ञान,अंग्रेजी,मनोविज्ञान,पर्यावरण अध्ययन,भौतिक विज्ञान,रसायन विज्ञान,जीव विज्ञान,शैक्षिक प्रौद्योगिकी सहित अनेक विषयों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन विषयों में गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री,प्रशिक्षण मॉड्यूल तथा नवाचार आधारित शिक्षण संसाधनों का विकास प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। डॉ.रावत ने वित्तीय वर्ष 2023-24 एवं 2025-26 में स्वीकृत मॉडल डायट के निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं को अगले तीन माह के भीतर हर हाल में पूरा किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विभागीय बजट का समयबद्ध और पूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाए तथा विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। बैठक में विद्यालयी शिक्षा महानिदेशक आकांक्षा कोण्डे,एससीईआरटी की निदेशक वंदना गब्र्याल,माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनोद कुमार सिमल्टी,प्राथमिक शिक्षा निदेशक के.एस.रावत,अपर निदेशक बेसिक शिक्षा पदमेन्द्र सकलानी,उप निदेशक जे.पी.काला,प्रदेश के सभी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों के प्राचार्य तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने शिक्षा मंत्री को विभिन्न योजनाओं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रगति से अवगत कराया तथा निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूर्ण करने का भरोसा दिलाया। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन निर्देशों को प्रभावी ढंग से धरातल पर लागू किया गया,तो उत्तराखंड में शिक्षक प्रशिक्षण की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा और विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों के अनुरूप और अधिक सशक्त एवं परिणामोन्मुख बन सकेगी।

नवीनतम समाचार – Dainik Himalya Times

नवीनतम समाचार

Loading...