
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जो राष्ट्र अपने वीरों का सम्मान करता है,वही इतिहास में गौरवशाली बनकर अमर होता है। कारगिल के अमर शहीदों का अदम्य साहस,मातृभूमि के प्रति समर्पण और सर्वोच्च बलिदान सदैव राष्ट्रवासियों के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत रहेगा। इसी भावना के साथ कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को कोटद्वार स्थित एक निजी वेडिंग प्वाइंट में आयोजित वीर सैनिक सम्मान समारोह देशभक्ति,सम्मान और भावनात्मक श्रद्धा का अद्भुत संगम बन गया। स्थानीय विधायक एवं विधानसभा अध्यक्षा ऋतु खंडूड़ी भूषण की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी मुख्य अतिथि तथा कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों,पूर्व सैनिकों,वीर नारियों,वीर माताओं एवं सैनिक परिवारों को सम्मानित कर उनके अतुलनीय योगदान को नमन किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार मनोज इष्टवाल द्वारा लिखित पुस्तक कण्वाश्रम (भरत से भारतवर्ष) का लोकार्पण भी किया गया। अपने संबोधन में विधानसभा अध्यक्षा ऋतु खंडूड़ी भूषण ने कहा कि कारगिल के वीरों,पूर्व सैनिकों और सैनिक परिवारों का सम्मान करना उनके लिए गर्व और भावनात्मक गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि एक सैनिक की बेटी होने के कारण वे सैनिकों के त्याग,अनुशासन,समर्पण और संघर्ष को निकटता से समझती हैं। मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर जवानों का बलिदान सदैव राष्ट्र को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीरभूमि भी है,जहां की मिट्टी में राष्ट्रभक्ति रची-बसी है। यहां के सैनिकों ने हर युद्ध और हर चुनौती में अदम्य साहस का परिचय देकर देश का गौरव बढ़ाया है। वीर सैनिकों,वीरांगनाओं और उनके परिवारों का सम्मान करना समाज और राष्ट्र का नैतिक दायित्व है। मुख्य अतिथि सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि जब भी उन्हें सैनिकों और पूर्व सैनिकों के बीच आने का अवसर मिलता है तो वे स्वयं को मंत्री नहीं,बल्कि उनके परिवार का सदस्य महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके जीवन पर सैन्य परिवेश का गहरा प्रभाव रहा है और सैनिकों का अनुशासन,समर्पण तथा राष्ट्रप्रेम उन्हें सदैव प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के डीएनए में देशभक्ति बसती है। देवभूमि ने देश को सर्वाधिक वीर सैनिक दिए हैं और राज्य का लगभग 17.5 प्रतिशत सैन्य योगदान इसकी गौरवशाली सैन्य परंपरा का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सैनिकों के सम्मान एवं कल्याण के लिए वन रैंक-वन पेंशन,नेशनल वॉर मेमोरियल का निर्माण,रक्षा बजट में ऐतिहासिक वृद्धि तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे के विकास जैसे कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने भी शहीद परिवारों की अनुग्रह राशि में वृद्धि,वीरता पुरस्कारों की सम्मान राशि बढ़ाने,शहीद के आश्रित को सरकारी नौकरी,आवेदन अवधि दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष करने तथा वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों एवं पूर्व सैनिकों को राज्य परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा जैसी अनेक जनहितकारी योजनाएं लागू की हैं। विशिष्ट अतिथि कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक स्मृति दिवस नहीं,बल्कि भारत के वीर सैनिकों के अदम्य साहस,अद्वितीय पराक्रम और राष्ट्रभक्ति को नमन करने का पावन अवसर है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के सैनिकों ने देश की सीमाओं की रक्षा में सदैव अग्रणी भूमिका निभाई है और उनका शौर्य देश के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा। उन्होंने युवाओं से सैनिकों के अनुशासन,समर्पण और राष्ट्रसेवा की भावना से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। समारोह के दौरान वीर सैनिकों,वीर नारियों और वीर माताओं का सम्मान होते ही पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। वातावरण देशभक्ति,गौरव और भावनाओं से ओत-प्रोत हो गया। उपस्थित लोगों ने खड़े होकर कारगिल के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके अद्वितीय बलिदान को शत-शत नमन किया। कार्यक्रम में उत्तराखंड गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष डॉ.राजेन्द्र प्रसाद अणथ्वाल,मेयर शैलेंद्र सिंह रावत,भाजपा जिलाध्यक्ष राज गौरव नौटियाल,सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल जयवीर सिंह नेगी सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक,वीर नारियां,वीर माताएं,सैनिक परिवार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।