
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। तेजी से बढ़ती डिजिटल दुनिया ने जहां जीवन को सरल और सुविधाजनक बनाया है,वहीं बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के बीच ऑनलाइन बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) का निर्माण,डाउनलोड करना,देखना,संग्रहित करना अथवा किसी भी डिजिटल माध्यम से उसका प्रसार करना न केवल घोर अनैतिक कृत्य है,बल्कि भारतीय कानून के तहत गंभीर दंडनीय अपराध भी है। ऐसे अपराध बच्चों के सम्मान,अधिकारों और सुरक्षित बचपन पर सीधा हमला हैं। इसी गंभीर विषय को लेकर पौड़ी पुलिस लगातार सक्रिय भूमिका निभा रही है। जनजागरूकता अभियान चलाने के साथ-साथ ऑनलाइन निगरानी को और अधिक प्रभावी बनाया गया है ताकि बच्चों के विरुद्ध होने वाले साइबर अपराधों पर समय रहते अंकुश लगाया जा सके। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बाल यौन शोषण सामग्री से जुड़े किसी भी अपराध में संलिप्त व्यक्ति के विरुद्ध तत्काल मुकदमा दर्ज कर कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पौड़ी पुलिस के अनुसार ऑनलाइन बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) देखने,डाउनलोड करने,संग्रहित करने अथवा उसका प्रचार-प्रसार करने वाले व्यक्तियों की तकनीकी माध्यमों से लगातार निगरानी की जा रही है। ऐसे मामलों में अब तक जनपद के विभिन्न थानों में कुल 9 अभियोग दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें थाना थलीसैंण में 2,थाना पैठाणी में 1,कोतवाली कोटद्वार में 1,महिला थाना श्रीनगर में 2,थाना सतपुली में 1,थाना लैंसडाउन में 1 तथा कोतवाली पौड़ी में 1 मुकदमा पंजीकृत किया गया है। सभी मामलों में तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच जारी है तथा दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं,बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। अभिभावकों,शिक्षकों और नागरिकों की सजगता से ही बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल वातावरण तैयार किया जा सकता है। बच्चों को इंटरनेट का सुरक्षित उपयोग सिखाना,उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर सकारात्मक और संतुलित निगरानी रखना तथा किसी भी संदिग्ध लिंक,संदेश या आपत्तिजनक सामग्री से दूर रहने के लिए जागरूक करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। पौड़ी पुलिस ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी के मोबाइल,कंप्यूटर या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण से संबंधित कोई भी आपत्तिजनक सामग्री दिखाई दे तो उसे किसी भी परिस्थिति में आगे साझा न करें। ऐसी सामग्री का प्रसार स्वयं भी अपराध की श्रेणी में आता है। इसके बजाय तत्काल संबंधित पुलिस अथवा साइबर हेल्पलाइन को सूचना दें,ताकि समय रहते आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सके। पुलिस ने अभिभावकों से यह भी आग्रह किया है कि वे बच्चों के साथ खुलकर संवाद करें और उन्हें यह विश्वास दिलाएं कि यदि इंटरनेट पर कोई व्यक्ति उन्हें असहज महसूस कराता है,अनुचित संदेश भेजता है या किसी प्रकार का दबाव बनाता है,तो वे बिना डर के तुरंत अपने माता-पिता,शिक्षक अथवा किसी भरोसेमंद व्यक्ति को इसकी जानकारी दें। पौड़ी पुलिस ने दोहराया है कि बच्चों के विरुद्ध साइबर अपराधों के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई गई है। आधुनिक तकनीकी संसाधनों और साइबर जांच प्रणाली के माध्यम से ऐसे अपराधियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। संदेश स्पष्ट है-बच्चों की सुरक्षा हम सभी की नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है। एक जागरूक समाज,सतर्क अभिभावक और जिम्मेदार डिजिटल नागरिक ही बच्चों को सुरक्षित,सम्मानजनक और भयमुक्त ऑनलाइन वातावरण उपलब्ध करा सकते हैं।