
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखण्ड की आध्यात्मिक,ऐतिहासिक एवं पौराणिक श्रीक्षेत्र श्रीनगर में श्रावण मास का प्रथम सोमवार अपार श्रद्धा,अटूट आस्था और शिवभक्ति के अनुपम उत्साह के साथ मनाया गया। पुण्यसलिला मां अलकनंदा के पावन तट पर बसा सम्पूर्ण श्रीनगर प्रातःकाल से ही हर-हर महादेव,बम-बम भोले और ॐ नमः शिवाय के गगनभेदी जयघोष,शंखनाद,मंदिरों की घंटियों की मधुर अनुगूंज तथा वैदिक मंत्रोच्चार से शिवमय हो उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं कैलाशपति भगवान भोलेनाथ की दिव्य कृपा सम्पूर्ण श्रीक्षेत्र पर बरस रही हो। सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें नगर के सभी प्रमुख शिवालयों में उमड़ने लगी थीं। माथे पर चंदन और भस्म,हाथों में गंगाजल,बेलपत्र,धतूरा,दुग्ध,पंचामृत तथा पूजा सामग्री लिए श्रद्धालुओं का सैलाब नगर की प्रत्येक सड़क और गली को शिवभक्ति के रंग में रंगता दिखाई दिया। श्रावण का प्रथम सोमवार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं,बल्कि सनातन संस्कृति,भारतीय आध्यात्मिक परंपरा,सेवा,संयम,प्रकृति संरक्षण और लोकमंगल की जीवंत अभिव्यक्ति बनकर सामने आया। श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ से परिवार की सुख-समृद्धि,उत्तम स्वास्थ्य,राष्ट्र की उन्नति,विश्व शांति,पर्यावरण संरक्षण तथा समस्त मानवता के कल्याण की कामना की। श्रावण के प्रथम सोमवार की सुबह हुई हल्की वर्षा ने श्रीनगर की आध्यात्मिक छटा को और अधिक मनोहारी बना दिया। फुहारों के बीच भी श्रद्धालुओं की आस्था तनिक भी कम नहीं हुई। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं प्रकृति भगवान आशुतोष का अभिषेक कर रही हो। हाथों में गंगाजल,दुग्ध,बेलपत्र और पूजा सामग्री लिए श्रद्धालु निरंतर शिवालयों की ओर बढ़ते रहे। सुबह लगभग नौ बजे वर्षा थमने के बाद मंदिरों में श्रद्धालुओं का जनसैलाब और अधिक बढ़ गया तथा देर शाम तक जलाभिषेक,दुग्धाभिषेक,पंचामृताभिषेक,रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना का क्रम निरंतर चलता रहा। श्रीनगर के ऐतिहासिक कमलेश्वर महादेव,नागेश्वर महादेव,कटकेश्वर महादेव,कोटेश्वर महादेव,महादेव,अष्टावक्र,तैलेश्वर,महादेव सहित नगर एवं आसपास के सभी शिवालयों में प्रातः ब्रह्ममुहूर्त से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। गढ़वाल मंडल के विभिन्न जनपदों तथा दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे। अनेक भक्तों ने मां अलकनंदा से पवित्र जल भरकर भगवान शिव का अभिषेक किया,जबकि कई श्रद्धालुओं ने दिनभर व्रत रखकर रुद्राभिषेक,शिव सहस्रनाम एवं महामृत्युंजय जाप किया। भक्तों ने भगवान शिव का विधिवत जलाभिषेक,दुग्धाभिषेक,पंचामृताभिषेक एवं रुद्राभिषेक कर बेलपत्र,धतूरा,आक के पुष्प,भस्म,चंदन तथा सुगंधित पुष्प अर्पित किए। मंदिर परिसरों में महामृत्युंजय मंत्र,रुद्राष्टाध्यायी,शिवमहिम्न स्तोत्र,शिव चालीसा एवं भजन-कीर्तन की मधुर स्वर लहरियों ने सम्पूर्ण वातावरण को भक्तिमय बना दिया। नगर एवं आसपास के लगभग सभी शिवालयों में महिला श्रद्धालुओं की सहभागिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही। विभिन्न महिला मंडलियों ने भगवान शिव के भजन,शिव चालीसा,रुद्राष्टक एवं मंगल गीतों का सामूहिक गायन कर पूरे वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। ढोलक,मंजीरे,झांझ और मंदिरों की घंटियों की मधुर अनुगूंज के बीच गूंजते हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोषों ने सम्पूर्ण श्रीनगर को शिवमय बना दिया। महिलाएं,युवा,बच्चे और बुजुर्ग पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ भगवान शिव की आराधना में लीन दिखाई दिए। श्रीनगर के निकट सरणा गांव में स्थित तैलेश्वर महादेव मंदिर में महिला मंगल दल सरणा द्वारा आयोजित सामूहिक भजन-कीर्तन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। शिवभक्ति से ओत-प्रोत भजनों की मधुर स्वर लहरियों,ढोलक और मंजीरे की थाप पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे। पूरा मंदिर परिसर देर तक हर-हर महादेव के गगनभेदी जयघोष से गुंजायमान रहा। भजन-कीर्तन के उपरांत सभी श्रद्धालुओं ने भगवान शिव से सुख-समृद्धि,उत्तम स्वास्थ्य,राष्ट्र की उन्नति,विश्व शांति तथा समस्त मानवता के कल्याण की सामूहिक प्रार्थना की। ऐतिहासिक एवं सिद्धपीठ कमलेश्वर महादेव मंदिर के महन्त आशुतोष महाराज ने कहा कि श्रावण मास भगवान शिव की आराधना का सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वाधिक पुण्यदायी काल माना गया है। इस पवित्र माह में श्रद्धा,निष्काम भाव और पूर्ण समर्पण के साथ की गई शिव उपासना व्यक्ति के जीवन में मानसिक शांति,आध्यात्मिक चेतना,सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक संतुलन का संचार करती है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव केवल संहार के देव नहीं बल्कि करुणा,त्याग,समरसता,लोककल्याण और प्रकृति संरक्षण के भी प्रतीक हैं। इसलिए शिवभक्ति तभी सार्थक है जब उसके साथ मानव सेवा,गौसेवा,पर्यावरण संरक्षण,स्वच्छता और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का भाव जुड़ा हो। उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिकाधिक वृक्षारोपण,जल संरक्षण,नशामुक्ति और लोकसेवा जैसे कार्यों को अपनाकर भगवान शिव के आदर्शों को जीवन में उतारने का आह्वान किया। नागेश्वर महादेव मंदिर के महन्त नितिन पुरी ने कहा कि भगवान भोलेनाथ समस्त सृष्टि के कल्याणकारी और सहज कृपालु देव हैं। श्रावण मास में श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया जलाभिषेक,रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप व्यक्ति के जीवन से नकारात्मकता को दूर कर आत्मबल,धैर्य,साहस और आध्यात्मिक संतुलन प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में भगवान शिव का त्याग,तप,सरलता और समभाव का संदेश अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि धर्म को केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रखें,बल्कि प्रेम,भाईचारा,करुणा और सामाजिक समरसता को अपने जीवन का आधार बनाएं। सच्ची शिवभक्ति वही है,जो प्रत्येक प्राणी में शिव का स्वरूप देखकर सेवा और सद्भाव का मार्ग अपनाने की प्रेरणा दे। कटकेश्वर महादेव मंदिर के महन्त महेश गिरी ने कहा कि श्रावण मास आत्मशुद्धि,तप,संयम,साधना और आत्मचिंतन का श्रेष्ठ अवसर है। भगवान शिव का जीवन त्याग,धैर्य,तपस्या,समानता और लोककल्याण का अनुपम संदेश देता है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता की दौड़ में अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर होना समाज के लिए चिंताजनक है। इसलिए युवाओं को भारतीय संस्कृति,सनातन परंपराओं,धार्मिक आस्थाओं और आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना के स्थान नहीं बल्कि संस्कार,सेवा,सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना के जीवंत केंद्र हैं। यदि नई पीढ़ी अपने धर्म और संस्कृति से जुड़ी रहेगी तो भारत की सनातन परंपरा सदैव सशक्त और जीवंत बनी रहेगी। उन्होंने प्रकृति संरक्षण,जल संवर्धन,स्वच्छता और समाज सेवा को भी शिव आराधना का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया। श्रावण मास के प्रथम सोमवार पर श्रीनगर में श्रद्धा,भक्ति और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। एक ओर हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और अभिषेक में लीन रहे,वहीं दूसरी ओर मंदिरों से मानव सेवा,पर्यावरण संरक्षण,सामाजिक समरसता,संस्कार और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संदेश भी समाज तक पहुंचाया गया। दिनभर शिवालयों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़,भक्ति संगीत,वैदिक मंत्रोच्चार,धार्मिक अनुष्ठान और हर-हर महादेव के जयघोषों ने सम्पूर्ण श्रीनगर को शिवमय बना दिया। श्रावण के प्रथम सोमवार का यह पावन पर्व श्रद्धा,आस्था,सेवा और सनातन संस्कृति की अमिट छाप छोड़ गया।