
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय ने शोध,नवाचार एवं अकादमिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि अपने नाम दर्ज की है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने उत्तराखंड में समावेशी विकास,आजीविका एवं सामाजिक विकास विषय पर आधारित महत्वपूर्ण शोध ग्रंथ का विधिवत लोकार्पण किया। यह पुस्तक उत्तराखंड के सामाजिक,आर्थिक,भौगोलिक एवं प्राकृतिक परिवेश को केंद्र में रखकर तैयार की गई एक गंभीर शोध कृति है,जिसमें राज्य के समावेशी विकास,आजीविका के विविध आयामों,सामाजिक परिवर्तन तथा सतत विकास से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की वास्तविक पहचान उसकी शोध संस्कृति,ज्ञान सृजन और समाज के प्रति उसकी बौद्धिक प्रतिबद्धता से होती है। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से तैयार होने वाले ऐसे शोध ग्रंथ न केवल विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं,बल्कि समाज,शासन और नीति-निर्माताओं के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध होते हैं। उन्होंने पुस्तक के सभी संपादकों,लेखकों एवं शोधकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि भविष्य में भी विश्वविद्यालय में इसी प्रकार के गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को निरंतर प्रोत्साहन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में समावेशी विकास,ग्रामीण अर्थव्यवस्था,आजीविका के अवसर,प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण तथा सामाजिक विकास जैसे विषय अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन विषयों पर गंभीर अध्ययन एवं शोध से न केवल नई नीतियों के निर्माण में सहायता मिलेगी,बल्कि राज्य के समग्र एवं संतुलित विकास को भी नई दिशा प्राप्त होगी। इस अवसर पर पुस्तक की प्रतियां विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय को भी भेंट की गईं,ताकि शोधार्थी,प्राध्यापक,विद्यार्थी एवं विभिन्न विषयों के अध्ययनकर्ता इस महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ का लाभ उठा सकें। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह पुस्तक आने वाले समय में उत्तराखंड के विकास संबंधी अध्ययन एवं शोध के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में स्थापित होगी। यह शोध ग्रंथ विशेष रूप से उत्तराखंड के सामाजिक परिवर्तन,ग्रामीण विकास,रोजगार एवं आजीविका,प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग,आर्थिक विकास,सामाजिक समावेशन तथा जनकल्याण से जुड़े विविध विषयों पर आधारित है। पुस्तक में प्रस्तुत शोध आलेख राज्य की वर्तमान चुनौतियों एवं संभावनाओं का वैज्ञानिक एवं तथ्यपरक विश्लेषण करते हैं। यही कारण है कि यह पुस्तक शोधार्थियों,शिक्षकों,नीति-निर्माताओं,विकास योजनाओं से जुड़े विशेषज्ञों,सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी संदर्भ ग्रंथ सिद्ध होगी। पुस्तक का संयुक्त संपादन विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग की डॉ.रुक्मणी,एपीबी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रुद्रप्रयाग के अर्थशास्त्र विभाग के डॉ.ओमीन पंत,विश्वविद्यालय के वानिकी एवं प्राकृतिक संसाधन विभाग की डॉ.हिमशिखा गुसाईं तथा अर्थशास्त्र विभाग के डॉ.ठाकुर देव पांडेय द्वारा किया गया है। चारों संपादकों ने अपने अनुभव एवं शोध दृष्टि के माध्यम से इस ग्रंथ को एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक स्वरूप प्रदान किया है। पुस्तक में डॉ.प्रेरणा त्रिवेदी,प्रो.राज बहादुर,डॉ.नेहा राज,अनुज सिंह,डॉ.महेश कुमार सहित शोधार्थियों श्यामलेंदु दास,लक्ष्मी डोभाल,आश्मिता यादव,विशाल सिंह,वैशाली जोशी,श्रुति जड़ली,गरिमा आर्या,हेमलता नेगी,विवेक नैथानी,अंतिम त्यागी,रेखा राणा तथा आकांक्षा सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सभी लेखकों एवं शोधकर्ताओं ने अपने-अपने विषयों पर गहन अध्ययन और शोध के आधार पर पुस्तक को समृद्ध बनाया है। कार्यक्रम के अंत में पुस्तक के संपादकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन,कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह,संबंधित विभागाध्यक्षों तथा सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह शोध ग्रंथ उत्तराखंड में समावेशी विकास एवं सामाजिक परिवर्तन पर होने वाले भविष्य के अनुसंधानों को नई दिशा देगा। साथ ही यह युवा शोधार्थियों में शोध के प्रति रुचि बढ़ाने तथा विश्वविद्यालय की शोध परंपरा को और अधिक सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह लोकार्पण केवल एक पुस्तक का विमोचन नहीं,बल्कि उत्तराखंड के समग्र,समावेशी एवं सतत विकास की दिशा में ज्ञान,शोध और सामाजिक चिंतन को नई ऊर्जा प्रदान करने वाला एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक कदम माना जा रहा है।