
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। हिमालय केवल पर्वत श्रृंखला नहीं,बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन,संस्कृति और जल संसाधनों का आधार है। बदलते जलवायु परिदृश्य में हिमालयी क्षेत्रों के संरक्षण,जल सुरक्षा और आपदा जोखिम को समझना आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। इसी उद्देश्य के साथ आयोजित हिम-केयर प्रशिक्षण एवं इंटर्नशिप कार्यक्रम ने युवाओं को हिमालयी क्षेत्रों की जमीनी चुनौतियों से जोड़ते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर के भूगोल विभाग तथा इन्द्रप्रस्थ कॉलेज फॉर वीमेन,दिल्ली विश्वविद्यालय के हिमालयी अनुसंधान केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में संचालित हिम-केयर (हिमालयी जलवायु अनुकूलन एवं लचीलापन शिक्षा कार्यक्रम) के अंतर्गत आयोजित एक माह का प्रशिक्षण एवं इंटर्नशिप कार्यक्रम बुधवार को गरिमापूर्ण समापन समारोह के साथ संपन्न हो गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जनपद के नंदरूल एवं राजल गांवों तथा उत्तराखंड के टिहरी जनपद के जखन्याली,मंदार और कठुली गांवों का व्यापक क्षेत्रीय अध्ययन किया। अध्ययन के दौरान प्रतिभागियों ने स्थानीय ग्रामीण समुदायों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी आजीविका,प्राकृतिक संसाधनों,पारंपरिक ज्ञान,पर्यावरणीय चुनौतियों तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को निकटता से समझने का प्रयास किया। क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों ने प्राकृतिक संसाधनों का मानचित्रण,जल स्रोतों की वर्तमान स्थिति का वैज्ञानिक मूल्यांकन,पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों का प्रलेखन तथा सामुदायिक जल प्रबंधन की कार्यप्रणालियों का अध्ययन किया। साथ ही जल सुरक्षा,प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण,आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा जलवायु परिवर्तन के प्रति स्थानीय समुदायों की अनुकूलन क्षमता का भी विस्तृत विश्लेषण किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल शैक्षणिक अध्ययन तक सीमित नहीं रहा,बल्कि प्रतिभागियों को हिमालयी क्षेत्रों की वास्तविक समस्याओं से जोड़ते हुए उनके समाधान के लिए वैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टिकोण विकसित करना भी था। प्रतिभागियों ने अपने अध्ययन के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों की समस्याओं,चुनौतियों तथा उनके संभावित समाधान संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव भी प्रस्तुत किए। समापन समारोह के मुख्य अतिथि जी.बी.पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान,गढ़वाल प्रादेशिक केंद्र के निदेशक डॉ.के.चन्द्रशेखर ने प्रतिभागियों एवं आयोजकों को सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को हिमालयी क्षेत्रों की जमीनी वास्तविकताओं से परिचित कराने के साथ-साथ वैज्ञानिक अनुसंधान को नई दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों द्वारा किए गए अध्ययन को विस्तृत शोध प्रतिवेदन के रूप में तैयार करने का सुझाव देते हुए कहा कि इससे भविष्य में नीति निर्माण और विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण आधार उपलब्ध होगा। कार्यक्रम निदेशक एवं वरिष्ठ प्रोफेसर मोहन सिंह पंवार ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते मानवीय दबाव के कारण हिमालयी क्षेत्रों के जल स्रोत लगातार प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे समय में जल स्रोतों का संरक्षण,प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन और स्थानीय समुदायों की सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण एवं क्षेत्रीय अध्ययन भविष्य में जल संरक्षण,पर्यावरणीय संतुलन और सामुदायिक विकास के प्रभावी मॉडल सिद्ध होंगे तथा विश्वविद्यालय भविष्य में भी ऐसे शोध आधारित कार्यक्रम निरंतर आयोजित करता रहेगा। इस अवसर पर उच्च पर्वतीय पादप कार्यिकी अनुसंधान केंद्र के निदेशक एवं अध्यक्ष प्रो.विजय कांत पुरोहित,डॉ.धीरज कुमार शर्मा,डॉ.हसीबुर रहमान तथा डॉ.रंजन कर्माकर ने भी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए हिमालयी पारिस्थितिकी के संरक्षण में युवा शोधकर्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। दिल्ली विश्वविद्यालय से एसोसिएट प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ.गौरव ने हिम-केयर कार्यक्रम की पिछले पांच वर्षों की उपलब्धियों,उद्देश्यों एवं भावी कार्ययोजना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कार्यक्रम हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर समाधान खोजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। वहीं कार्यक्रम समन्वयक डॉ.सिद्धार्थ राणा ने प्रतिभागियों द्वारा क्षेत्रीय अध्ययन के दौरान एकत्रित आंकड़ों,निष्कर्षों एवं अनुभवों का विस्तृत सार प्रस्तुत करते हुए बताया कि इन अध्ययनों से हिमालयी क्षेत्रों में जल संरक्षण,प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तथा सामुदायिक सहभागिता को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि क्षेत्रीय अध्ययन ने उन्हें पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर हिमालयी समाज,पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन की वास्तविक चुनौतियों को समझने का अवसर प्रदान किया। उन्होंने इसे अपने शैक्षणिक एवं शोध जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण अनुभव बताया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी विशेषज्ञों,शिक्षकों,सहयोगी संस्थानों,स्थानीय समुदायों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रशिक्षण एवं इंटर्नशिप कार्यक्रम का औपचारिक समापन किया गया। यह कार्यक्रम हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु अनुकूलन,जल संरक्षण,प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल के रूप में देखा जा रहा है।