विकास कार्यों में देरी और लापरवाही पर सख्त हुई जिलाधिकारी-धरातल पर दिखने चाहिए योजनाओं के परिणाम

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। विकास केवल बजट खर्च करने का माध्यम नहीं,बल्कि जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव का आधार है। योजनाओं का वास्तविक मूल्य तभी है,जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। विकास केवल बजट खर्च करने का माध्यम नहीं,बल्कि जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव का आधार है। योजनाओं का वास्तविक मूल्य तभी है,जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक समय पर और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पहुंचे। इसी सोच के साथ जनपद पौड़ी गढ़वाल में विकास कार्यों की रफ्तार तेज करने के लिए जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि अब विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही,अनावश्यक देरी या गुणवत्ता से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। बुधवार को विकास भवन सभागार में जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया की अध्यक्षता में जिला योजना,राज्य सेक्टर,केंद्र पोषित योजनाओं तथा 20 सूत्रीय कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों की प्रगति का विभागवार परीक्षण करते हुए जिलाधिकारी ने अधिकारियों को समयबद्ध,पारदर्शी एवं परिणामोन्मुख कार्य संस्कृति अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं का उद्देश्य केवल वित्तीय लक्ष्य पूरा करना नहीं,बल्कि धरातल पर आम जनता को उसका प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाना है। जिलाधिकारी ने सभी निर्माणदायी विभागों को निर्देशित किया कि जिन परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया अभी तक लंबित है,उन्हें प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण कर निर्माण कार्य तत्काल प्रारंभ कराया जाए। साथ ही वर्ष 2025-26 की सभी अपूर्ण परियोजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक अधिकारी अपने विभागीय कार्यों के प्रति व्यक्तिगत जवाबदेही सुनिश्चित करे और नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा करे। बैठक में उन्होंने विशेष रूप से कनिष्ठ अभियंताओं को निर्देश दिए कि वे कार्यालयों तक सीमित न रहें,बल्कि नियमित रूप से गांवों का भ्रमण करें,स्थानीय समस्याओं का मौके पर समाधान करें तथा दूरस्थ क्षेत्रों में रहकर जिम्मेदारी के साथ कार्य करें। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी को भी बड़े निर्माण कार्यों का नियमित स्थलीय निरीक्षण कर गुणवत्ता और प्रगति की निगरानी करने के निर्देश दिए गए। ग्रामीण विकास को प्राथमिकता देते हुए जिलाधिकारी ने कृषि,उद्यान,मत्स्य,पशुपालन,ग्रामीण विकास एवं अन्य संबंधित विभागों से कहा कि योजनाओं का संचालन केवल कागजी लक्ष्य पूरा करने तक सीमित न रहे। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक योजनाओं का लाभ पहुंचे तथा किसानों, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों के उत्पादों के विपणन के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए,जिससे उनकी आय में वास्तविक वृद्धि हो सके। उन्होंने अस्पतालों,विद्यालयों तथा अन्य सार्वजनिक संस्थानों में बिजली,पेयजल और मरम्मत से जुड़े कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। जल निगम के अधिकारियों से कहा गया कि निरीक्षण के दौरान केवल एक परियोजना तक सीमित न रहें,बल्कि क्षेत्र में संचालित अन्य योजनाओं का भी स्थलीय निरीक्षण करें। खेल विभाग,लोक निर्माण विभाग तथा पेयजल विभाग को संयुक्त निरीक्षण कर कंडोलिया मैदान एवं रांसी स्टेडियम से संबंधित सभी कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश भी दिए गए। ग्रामीण स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से पंचायतीराज विभाग को प्रमुख ग्रामीण बाजारों में मॉडल सार्वजनिक शौचालय विकसित करने की कार्ययोजना तैयार कर शीघ्र निर्माण शुरू करने को कहा गया। वहीं उद्योग विभाग को सेवायोजन,कृषि,उद्यान एवं अन्य विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर उच्च शिक्षण संस्थानों में रोजगार मेले,रोजगार परामर्श एवं कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए,ताकि अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा जा सके। बैठक में जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी ने जानकारी दी कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिला योजना की प्रथम किश्त 32 विभागों को जारी कर दी गई है, जिससे विभिन्न विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में जिलाधिकारी ने पांच करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की भी विशेष समीक्षा की। उन्होंने लोक निर्माण विभाग,प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना,पेयजल निगम,ग्रामीण निर्माण विभाग सहित सभी निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिए कि सड़क एवं पेयजल से संबंधित सभी परियोजनाएं अक्टूबर माह तक हर हाल में पूर्ण की जाएं। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं की नियमित निगरानी हो,गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। वर्षाकाल को देखते हुए जिलाधिकारी ने भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में भूस्खलन उपचार कार्यों को प्राथमिकता से कराने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने तथा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना एवं लोक निर्माण विभाग को वर्षा के कारण बंद होने वाले सभी मोटर मार्गों को 24 घंटे के भीतर खोलने के निर्देश दिए। साथ ही अधिक भूस्खलन प्रभावित स्थलों का छायाचित्र सहित विवरण प्रस्तुत कर उनके स्थायी समाधान की कार्ययोजना तैयार करने को भी कहा। 20 सूत्रीय कार्यक्रमों की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना,स्वास्थ्य,राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन,बाल विकास तथा पशुपालन विभाग सहित अपेक्षाकृत कम प्रगति वाले विभागों को कार्ययोजना बनाकर शीघ्र लक्ष्य प्राप्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने दोहराया कि विकास कार्यों का मूल्यांकन अब केवल कागजी प्रगति से नहीं,बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाले परिणामों से होगा। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी,परियोजना निदेशक डीआरडीए विवेक कुमार उपाध्याय,मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.विशाल शर्मा,मुख्य शिक्षाधिकारी अत्रेश सयाना,अधीक्षण अभियंता जल संस्थान प्रवीण सैनी,जिला पंचायत राज अधिकारी जितेंद्र कुमार,जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेंद्र थपलियाल,एसीएमओ डॉ.विनय त्यागी,अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग विवेक सेमवाल,रीना नेगी,जल संस्थान टी.एस.रावत,विद्युत विभाग अभिनव रावत,जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ.शैलेन्द्र पाण्डेय,जिला समाज कल्याण अधिकारी रोहित दुबड़िया,परियोजना अधिकारी उरेडा चंद्रप्रकाश उपाध्याय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी का स्पष्ट संदेश था कि विकास योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य जनता के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। समयबद्ध,गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी कार्य ही सुशासन की पहचान हैं और प्रत्येक अधिकारी को इसी भावना के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा।

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