जंतर-मंतर आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश–चौधरी भोपाल सिंह ने जताई कड़ी आपत्ति

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी मुजफ्फरनगर/श्रीनगर गढ़वाल। देश के किसान आंदोलनों की दिशा और दशा को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अन्ना हजारे कोर समिति के सदस्य एवं राष्ट्रीय

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

मुजफ्फरनगर/श्रीनगर गढ़वाल। देश के किसान आंदोलनों की दिशा और दशा को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अन्ना हजारे कोर समिति के सदस्य एवं राष्ट्रीय किसान मंच के प्रवक्ता चौधरी भोपाल सिंह ने जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को लेकर बड़ा बयान देते हुए आरोप लगाया कि विभिन्न राजनीतिक दल आंदोलन को अपने प्रभाव में लेने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी जनआंदोलन की सबसे बड़ी ताकत उसकी निष्पक्षता और गैर-राजनीतिक पहचान होती है,जिसे कमजोर करने की कोशिश लोकतांत्रिक आंदोलनों के लिए शुभ संकेत नहीं है। बुधवार शाम मुजफ्फरनगर पहुंचे चौधरी भोपाल सिंह ने भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी शाह आलम एवं उनकी टीम से मुलाकात की। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने किसान आंदोलन,जंतर-मंतर पर चल रहे धरने तथा आगामी रणनीति को लेकर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि 21 जुलाई को प्रस्तावित देश बचाओ,किसान बचाओ आंदोलन के तहत किसान नेताओं को दिल्ली स्थित किसान भवन पहुंचना था,लेकिन आंदोलन शुरू होने से पहले ही पुलिस ने कई प्रमुख किसान नेताओं को उनके घरों में ही नजरबंद कर दिया। वहीं हरियाणा और पंजाब से दिल्ली की ओर बढ़ रहे हजारों किसानों को शंभू सीमा पर रोक दिया गया,जिससे आंदोलन प्रभावित हुआ। चौधरी भोपाल सिंह ने कहा कि अब किसान संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक शीघ्र आयोजित की जाएगी,जिसमें आंदोलन की नई रूपरेखा तय की जाएगी। उन्होंने संकेत दिए कि अगला बड़ा आंदोलन दिल्ली के बजाय किसी अन्य स्थान से शुरू किया जा सकता है,ताकि किसानों की आवाज अधिक प्रभावी ढंग से देश के सामने रखी जा सके। जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के संबंध में उन्होंने कहा कि उन्हें भी वहां शामिल होने का निमंत्रण मिला था,लेकिन उन्होंने जानबूझकर दूरी बनाए रखी। उनका आरोप था कि विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता आंदोलन में सक्रिय होकर उसे अपने राजनीतिक हितों के अनुरूप मोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस,समाजवादी पार्टी,आम आदमी पार्टी,भारतीय जनता पार्टी सहित कई राजनीतिक दलों के लोग आंदोलन में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं,जिससे आंदोलन की मूल भावना प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि समाजसेवी अन्ना हजारे स्वयं आंदोलन का नेतृत्व कर रहे होते तो वह निश्चित रूप से उसमें शामिल होते,क्योंकि अन्ना हजारे की पहचान एक निष्पक्ष और गैर-राजनीतिक समाजसेवी के रूप में रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने अन्ना हजारे के आंदोलन के सहारे राजनीति में ऊंचा मुकाम हासिल किया,आज वही लोग उन्हें आंदोलन से दूर रखने का प्रयास कर रहे हैं। चौधरी भोपाल सिंह ने कहा कि किसी भी युवा या किसान आंदोलन में राजनीतिक हस्तक्षेप उसकी ताकत को कमजोर करता है। उन्होंने वर्ष 2020-21 के कृषि कानूनों के विरोध में चले 13 महीने लंबे किसान आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस आंदोलन में किसी भी राजनीतिक दल को मंच साझा करने की अनुमति नहीं दी गई थी,जिसके कारण आंदोलन अपनी मूल भावना और उद्देश्य के साथ सफल रहा। उन्होंने दोहराया कि उनका नैतिक समर्थन आंदोलन कर रहे युवाओं और किसानों के साथ है,लेकिन किसी भी राजनीतिक दल द्वारा जनआंदोलन को अपने हितों के लिए कब्जाने या प्रभावित करने के प्रयास का वे समर्थन नहीं करते। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक आंदोलनों की सफलता उनकी स्वतंत्रता,पारदर्शिता और जनविश्वास पर निर्भर करती है। इस अवसर पर भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी शाह आलम भी उपस्थित रहे। उन्होंने किसानों के मुद्दों पर एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने की बात कही तथा कहा कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए भविष्य में व्यापक रणनीति के साथ आंदोलन आगे बढ़ाया जाएगा।

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