राष्ट्रीय शिक्षा मंच पर चमका उत्तराखंड-नवाचार,डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास माॅडल की देशभर में हुई सराहना

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी नई दिल्ली/देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा को आधुनिक,तकनीक-संपन्न,समावेशी और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ राज्य

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

नई दिल्ली/देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा को आधुनिक,तकनीक-संपन्न,समावेशी और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ राज्य सरकार नवाचार आधारित शिक्षा मॉडल विकसित कर रही है,ताकि दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा का समान अवसर मिल सके। इसी दूरदर्शी सोच और उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर साझा करते हुए विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने केंद्र सरकार के समक्ष उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था में हुए बदलावों,नवाचारों और भविष्य की कार्ययोजना का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में आयोजित राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा मंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन के दूसरे दिन डॉ.धन सिंह रावत ने समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत उत्तराखंड में किए जा रहे नवाचारों,आधारभूत सुविधाओं के विस्तार तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के क्षेत्र में हासिल उपलब्धियों की विस्तार से जानकारी दी। साथ ही उन्होंने राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण सुझाव भी रखे। डॉ.रावत ने कहा कि उत्तराखंड सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार कर रही है। राज्य में विद्यालयों की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के साथ-साथ डिजिटल शिक्षा,कौशल विकास,शिक्षक प्रशिक्षण तथा विद्यार्थियों के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के लगभग सभी विद्यालयों में विद्यालय भवन,पेयजल,विद्युत,फर्नीचर,पुस्तकालय,दिव्यांगजनों के लिए रैंप तथा बालिकाओं के लिए पृथक शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। इसके साथ ही प्रदेश में 1238 क्लस्टर विद्यालयों का विकास,1367 स्मार्ट कक्षाओं तथा 1340 आभासी कक्षाओं की स्थापना कर शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा रहा है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए आवासीय विद्यालयों,छात्रावासों और परिवहन सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है,जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक अवसर मिल सकें। बैठक में उन्होंने माध्यमिक स्तर पर सकल नामांकन अनुपात को शत-प्रतिशत तक पहुंचाने,विद्यालयी आधारभूत संरचना को और मजबूत करने,डिजिटल संसाधनों के विस्तार,व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने,शिक्षकों के सतत प्रशिक्षण तथा प्रत्येक विद्यार्थी की अपार पहचान संख्या सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा अपनाई जा रही रणनीति की भी जानकारी दी। डॉ.रावत ने बताया कि राज्य में माध्यमिक स्तर पर सकल नामांकन अनुपात 93.4 प्रतिशत तथा उच्च माध्यमिक स्तर पर 80.2 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि कक्षा 12 तक प्रत्येक विद्यार्थी कम से कम एक व्यावसायिक कौशल में दक्ष हो। इसी उद्देश्य से प्रदेश के एक हजार से अधिक विद्यालयों में कौशल आधारित शिक्षा संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है तथा राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद द्वारा शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत अपार पहचान संख्या,अधिगम स्तर में सुधार तथा विद्यालयों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की दिशा में भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। डॉ.धन सिंह रावत ने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तराखंड का नवाचार आधारित शिक्षा मॉडल भविष्य में देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों के समन्वित प्रयासों से समग्र शिक्षा अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा तथा प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण,समावेशी और आधुनिक शिक्षा पहुंचाने का लक्ष्य शीघ्र ही साकार होगा।

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