
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। मार्क्सवादी विचारक एवं सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया कम्युनिस्ट के संस्थापक महासचिव कामरेड शिबदास घोष का 50 वां स्मृति दिवस उत्तराखंड राज्य इकाई की ओर से पूरी गरिमा,श्रद्धा और वैचारिक प्रतिबद्धता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित स्मरण सभा में पार्टी के पदाधिकारियों,सदस्यों,कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय नागरिकों ने एकत्र होकर कामरेड शिबदास घोष के जीवन,संघर्ष और उनके स्थायी वैचारिक योगदान को श्रद्धापूर्वक याद किया। स्मरण सभा की अध्यक्षता पार्टी के वरिष्ठ नेता कामरेड हरिंदर बिष्ट ने की,जबकि संचालन कामरेड रेशमा पंवार ने किया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कामरेड शिबदास घोष के जीवन संघर्ष,उनके वैचारिक चिंतन तथा समाज के शोषित और मेहनतकश वर्ग के अधिकारों के लिए उनके द्वारा किए गए कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। सभा को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए एसयूसीआई कम्युनिस्ट की केंद्रीय समिति के सदस्य डॉ.अशोक सामंत ने कामरेड शिबदास घोष की क्रांतिकारी विरासत पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि शिबदास घोष का जीवन संघर्ष,वैचारिक दृढ़ता और सामाजिक परिवर्तन के प्रति प्रतिबद्धता से जुड़ा रहा। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में शिबदास घोष की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने देश की आजादी के संघर्ष में सक्रिय योगदान दिया और आगे चलकर समाज में आर्थिक एवं सामाजिक असमानताओं के खिलाफ वैचारिक संघर्ष को आगे बढ़ाने का कार्य किया। डॉ.सामंत ने कहा कि शिबदास घोष का चिंतन केवल किसी एक समय या परिस्थिति तक सीमित नहीं था,बल्कि उन्होंने समाज की मौजूदा परिस्थितियों को समझने और मेहनतकश जनता के जीवन से जुड़े सवालों को केंद्र में रखने पर विशेष जोर दिया। पूर्व लोकसभा सांसद डॉ.तरुण मंडल ने वर्तमान सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए देश में बढ़ते पूंजीवादी शोषण पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आर्थिक नीतियों का सीधा प्रभाव आम जनता के जीवन,रोजगार,आजीविका और सामाजिक सुरक्षा पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि महंगाई,बेरोजगारी और बढ़ती आर्थिक असमानता जैसे मुद्दे आम लोगों के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। ऐसे समय में मेहनतकश वर्ग,श्रमिकों और आम जनता के अधिकारों से जुड़े सवालों को मजबूती से उठाने की आवश्यकता है। डॉ.मंडल ने कहा कि सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था में व्यापक बदलाव के लिए जनता के संघर्षों और आंदोलनों को समझना तथा उनके साथ खड़ा होना आवश्यक है। एसयूसीआई कम्युनिस्ट के उत्तराखंड राज्य समन्वयक मुकेश सेमवाल ने स्थानीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर छात्र और युवा आंदोलनों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार रखे। उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्रों और युवाओं से जुड़े सवालों को लेकर हुए एकजुट संघर्ष ने केंद्र सरकार की नीतियों और रवैये पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग देश का महत्वपूर्ण हिस्सा है और शिक्षा,रोजगार तथा बेहतर भविष्य से जुड़े उसके सवालों की अनदेखी समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने युवाओं से अपने अधिकारों और सामाजिक सरोकारों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया। स्मरण सभा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि कामरेड शिबदास घोष का जीवन संघर्ष,वैचारिक प्रतिबद्धता और सामाजिक परिवर्तन के प्रति समर्पण का उदाहरण है। उन्होंने उनके विचारों और आदर्शों को वर्तमान परिस्थितियों में समझने तथा समाज के कमजोर और मेहनतकश वर्गों के मुद्दों को मजबूती से उठाने पर जोर दिया। कार्यक्रम के अंत में पूंजीवादी शोषण के खिलाफ तथा मजदूर वर्ग एवं आम जनता के अधिकारों के लिए जारी संघर्ष को आगे बढ़ाने का आह्वान किया गया। साथ ही कामरेड शिबदास घोष की वैचारिक विरासत और उनके संघर्षपूर्ण जीवन से प्रेरणा लेते हुए संगठनात्मक एवं जन आंदोलनों को मजबूत करने का संकल्प व्यक्त किया गया। स्मरण सभा में उपस्थित लोगों ने कामरेड शिबदास घोष को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके संघर्षपूर्ण जीवन और सामाजिक परिवर्तन के लिए किए गए प्रयासों को याद किया।