
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। वीरांगना तीलू रौतेली की जयंती के अवसर पर प्रदेश की मातृशक्ति के सम्मान में आयोजित राज्य स्तरीय तीलू रौतेली एवं आंगनबाड़ी कार्यकत्री पुरस्कार समारोह में जनपद पौड़ी गढ़वाल की छह महिलाओं ने जिले का मान बढ़ाया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट एवं उल्लेखनीय योगदान के लिए पौड़ी की प्रियंका पंत थपलियाल को तीलू रौतेली पुरस्कार तथा पांच आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को आंगनबाड़ी कार्यकत्री पुरस्कार से सम्मानित किया। सम्मानित सभी महिलाओं को प्रशस्ति पत्र के साथ 51-51 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। समारोह में पौड़ी की मातृशक्ति की उपलब्धियों की विशेष सराहना की गई। महिलाओं ने समाजसेवा,महिला सशक्तिकरण,स्वरोजगार,शिक्षा,संस्कृति,बाल विकास और पोषण जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर यह साबित किया कि पहाड़ की महिलाएं न केवल अपने परिवार और समाज को मजबूत आधार देती हैं,बल्कि विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। जनपद पौड़ी की प्रियंका पंत थपलियाल को समाजसेवा,महिला सशक्तिकरण,स्वरोजगार,शिक्षा एवं संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित किया गया। प्रियंका पंत थपलियाल ने वर्ष 2019 में आह्वान संस्था की स्थापना कर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य शुरू किया। उन्होंने विभिन्न महिला समूहों को स्वरोजगार से जोड़ते हुए दोना-पत्तल,डिस्पोजेबल ग्लास निर्माण सहित कई गतिविधियों के लिए प्रशिक्षण और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया। महिलाओं एवं किशोरियों के स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर भी उन्होंने महत्वपूर्ण पहल की। उनके प्रयासों से सैनिटरी नैपकिन यूनिट स्थापित की गई,जिसके माध्यम से किशोरियों को मासिक धर्म स्वच्छता एवं स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देकर जागरूक किया गया। उन्होंने पीएमईजीपी एवं मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के माध्यम से करीब 650 लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने में सहयोग किया। वहीं 200 से अधिक महिलाओं को सिलाई प्रशिक्षण देकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समाजसेवा के क्षेत्र में भी प्रियंका पंत थपलियाल की सक्रियता उल्लेखनीय रही है। उन्होंने पौड़ी में स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन कर 600 से अधिक लोगों को निःशुल्क स्वास्थ्य जांच एवं दवाएं उपलब्ध कराने में योगदान दिया। महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार के क्षेत्र में उनके लगातार प्रयासों को देखते हुए उन्हें राज्य स्तरीय तीलू रौतेली पुरस्कार के लिए चुना गया। पांच आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को भी मिला सम्मान जनपद पौड़ी के विभिन्न विकासखंडों से चयनित पांच आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट सेवाओं एवं विभागीय दायित्वों के प्रभावी निर्वहन के लिए आंगनबाड़ी कार्यकत्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सम्मानित कार्यकत्रियों में नैनीडांडा के जमनधार आंगनबाड़ी केंद्र की दर्शनी देवी,दुगड्डा के नयाबाद-2 केंद्र की माधुरी देवी,पाबों के बुरांसी केंद्र की संगीता देवी,पोखड़ा के चोपड़ा केंद्र की तुलसी तथा बीरोंखाल के सुकई केंद्र की रेनू देवी शामिल हैं। इन आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा अपने-अपने केंद्रों पर शाला पूर्व शिक्षा का नियमित संचालन करने के साथ बच्चों के वजन एवं लंबाई की नियमित निगरानी,पोषण दिवस एवं स्वास्थ्य-पोषण शिक्षा दिवस का आयोजन तथा गर्भवती एवं धात्री महिलाओं और बच्चों की स्वास्थ्य जांच एवं टीकाकरण सुनिश्चित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है। इसके साथ ही पोषण ट्रैकर एप पर लाभार्थियों का विवरण अद्यतन करने,नंदा गौरा योजना,मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट वितरण सहित अन्य विभागीय योजनाओं को पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने में भी इन कार्यकत्रियों ने प्रभावी भूमिका निभाई है। जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेंद्र थपलियाल ने बताया कि प्रियंका पंत थपलियाल द्वारा महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा उनके लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के प्रयासों को देखते हुए उन्हें इस वर्ष राज्य स्तरीय तीलू रौतेली पुरस्कार के लिए चयनित किया गया। उन्होंने कहा कि प्रियंका पंत थपलियाल का कार्य अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणादायी है। वहीं जनपद के पांच विकासखंडों से चयनित आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने भी अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए बाल विकास,पोषण,स्वास्थ्य और महिला कल्याण की योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में सराहनीय योगदान दिया है। तीलू रौतेली के शौर्य और साहस की धरती उत्तराखंड में पौड़ी की इन छह मातृशक्तियों को मिला सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं,बल्कि महिला शक्ति,आत्मनिर्भरता,सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी की उस भावना का सम्मान है,जो पहाड़ की महिलाओं को सदैव विशिष्ट पहचान देती रही है।