गांव-गांव की प्राचीन ज्ञान विरासत होगी डिजिटल-भारतम ज्ञान मिशन में जनभागीदारी पर जोर

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं,प्राचीन ज्ञान,धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक दस्तावेजों को डिजिटल रूप में संरक्षित करने की दिशा में प्रशासन ने कदम तेज कर दिए हैं। इसी

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं,प्राचीन ज्ञान,धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक दस्तावेजों को डिजिटल रूप में संरक्षित करने की दिशा में प्रशासन ने कदम तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी ने गुरुवार को विकास भवन में जनपद के सभी एडीओ पंचायत एवं ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों के साथ बैठक कर भारत सरकार द्वारा संचालित भारतम ज्ञान मिशन अभियान की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने अधिकारियों को अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने तथा अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा केवल पुस्तकों और अभिलेखागार तक सीमित नहीं है,बल्कि देश के गांवों,मंदिरों,धार्मिक स्थलों,संस्थानों और आम लोगों के पास भी इसका महत्वपूर्ण भंडार मौजूद है। कई परिवारों और संस्थाओं के पास ऐसे पुराने दस्तावेज,पांडुलिपियां,धार्मिक ग्रंथ,ऐतिहासिक सामग्री एवं परंपराओं से जुड़े अभिलेख मौजूद हैं,जो आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण धरोहर साबित हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि भारतम ज्ञान मिशन का उद्देश्य प्राचीन ज्ञान एवं महत्वपूर्ण दस्तावेजों को डिजिटल स्वरूप प्रदान कर सुरक्षित रखना और उन्हें भावी पीढ़ियों तक पहुंचाना है। अभियान के अंतर्गत विभिन्न संस्थानों,मंदिरों,धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों तथा व्यक्तिगत स्तर पर उपलब्ध प्राचीन ज्ञान से संबंधित दस्तावेजों को चिन्हित किया जाएगा। संबंधित दस्तावेजों की फोटो लेकर उन्हें डिजिटल माध्यम से अपलोड कर संरक्षित किया जाएगा। सीडीओ अशोक जोशी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्राम पंचायत स्तर पर अभियान को केवल सरकारी गतिविधि के रूप में न चलाया जाए,बल्कि इसे जनभागीदारी से जुड़ा व्यापक संरक्षण अभियान बनाया जाए। इसके लिए ग्राम पंचायतों में ऐसे परिवारों,व्यक्तियों,मंदिर समितियों,धार्मिक संस्थाओं एवं अन्य संस्थानों की जानकारी जुटाई जाए,जिनके पास प्राचीन ज्ञान,लोक परंपरा,संस्कृति,इतिहास अथवा महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत विकास अधिकारी एवं एडीओ पंचायत अपने-अपने क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों के साथ समन्वय स्थापित कर अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार करें। लोगों को यह भी समझाया जाए कि उनके पास सुरक्षित पुराने दस्तावेज केवल उनके परिवार की धरोहर नहीं,बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण ज्ञान-संपदा हो सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सर्वेयर के गांव या संबंधित क्षेत्र में पहुंचने पर स्थानीय लोग सहयोग करें और उनके पास उपलब्ध महत्वपूर्ण दस्तावेजों को डिजिटल संरक्षण के लिए उपलब्ध कराने हेतु प्रेरित हों। विशेष रूप से धार्मिक स्थलों,प्राचीन मंदिरों,मठों,पारंपरिक संस्थाओं और ऐसे परिवारों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा गया,जहां वर्षों से ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक सामग्री सुरक्षित रखी गई है। सीडीओ ने कहा कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से प्राचीन ज्ञान को सुरक्षित रखने से न केवल दस्तावेजों के नष्ट होने अथवा समय के साथ क्षतिग्रस्त होने का खतरा कम होगा,बल्कि शोधकर्ताओं,विद्यार्थियों और भावी पीढ़ियों के लिए भी यह ज्ञान लंबे समय तक उपलब्ध रह सकेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे समृद्ध सांस्कृतिक विरासत वाले राज्य में इस अभियान की सफलता के लिए ग्रामीण स्तर पर जनभागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। बैठक में अधिकारियों को अभियान के प्रति गंभीरता से कार्य करने तथा ग्राम स्तर तक इसकी जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए गए। साथ ही स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्राचीन ज्ञान और दस्तावेजों की पहचान कर उन्हें डिजिटल संरक्षण की प्रक्रिया से जोड़ने पर जोर दिया गया। इस अवसर पर जिला पंचायतीराज अधिकारी जितेंद्र कुमार,अपर जिला पंचायतीराज अधिकारी प्रदीप सुंदरियाल सहित जनपद के विभिन्न विकासखंडों से आए एडीओ पंचायत एवं ग्राम पंचायत विकास अधिकारी उपस्थित रहे।

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