प्रकृति के अमर चितरे चंद्र कुंवर को भावभीनी श्रद्धांजलि-साहित्यकारों ने किया उनकी अमूल्य विरासत का स्मरण

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। प्रकृति के अनुपम चितेरे और हिंदी साहित्य के विशिष्ट रचनाकार स्व.चंद्र कुंवर बर्त्वाल की जन्मतिथि के अवसर पर हिमालयन साहित्य एवं कला परिषद् श्रीनगर की ओर से

📘 इन्हें भी पढ़ें

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। प्रकृति के अनुपम चितेरे और हिंदी साहित्य के विशिष्ट रचनाकार स्व.चंद्र कुंवर बर्त्वाल की जन्मतिथि के अवसर पर हिमालयन साहित्य एवं कला परिषद् श्रीनगर की ओर से साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संध्या का आयोजन कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। परिषद् के शिविर कार्यालय में आयोजित गोष्ठी में साहित्य,संस्कृति और रंगमंच से जुड़े रचनाकारों ने स्व.बर्त्वाल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद करते हुए उनकी साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। वरिष्ठ रंगकर्मी विमल बहुगुणा की अध्यक्षता में आयोजित साहित्यिक गोष्ठी में परिषद् की प्रधान ट्रस्टी प्रो.उमा मैठाणी ने कहा कि स्व.चंद्र कुंवर बर्त्वाल की रचनाएं हिमालयी प्रकृति,मानवीय संवेदनाओं और जीवन-दर्शन का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने बताया कि स्व.बर्त्वाल के तत्कालीन मित्र स्व.शम्भू प्रसाद बहुगुणा ने उनके निधन के बाद उनकी साहित्यिक रचनाओं की खोज और संकलन का महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने बिखरी हुई रचनाओं को एकत्रित कर काव्य संग्रह के रूप में प्रकाशित कराया और इस प्रकार हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर को संरक्षित करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। प्रो.मैठाणी ने बताया कि स्व.शम्भू प्रसाद बहुगुणा ने चंद्र कुंवर बर्त्वाल की जन्मपत्री को भी सामने लाकर उनके जन्मदिन को 21 अगस्त को मनाए जाने की परंपरा स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि किसी साहित्यकार को केवल स्मरण करना पर्याप्त नहीं है,बल्कि उसकी रचनाओं और विचारों को समाज तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष कृष्णानंद मैठाणी ने कहा कि स्व.प्रताप सिंह पुष्पबाण और प्रो.उमा मैठाणी के संयुक्त प्रयासों से अगस्त्यमुनि में लगातार करीब 12 वर्षों तक स्व.चंद्र कुंवर बर्त्वाल की जन्मतिथि की पूर्व संध्या पर 20 अगस्त को कवि सम्मेलन तथा 21 अगस्त को जन्मदिवस मनाने की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन साहित्यकारों के योगदान को जनमानस से जोड़ने के साथ ही आने वाली पीढ़ी को अपनी साहित्यिक विरासत से परिचित कराने का माध्यम बनते हैं। कवि नीरज नैथानी ने स्व.चंद्र कुंवर बर्त्वाल की साहित्यिक यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उन्हें छायावादी युग के प्रमुख रचनाकारों की श्रेणी का कवि बताया। उन्होंने कहा कि बर्त्वाल ने अल्पायु में ही हिंदी साहित्य को ऐसी रचनाएं दीं,जिनमें प्रकृति के प्रति गहरी आत्मीयता,मानवीय संवेदना और जीवन की सूक्ष्म अनुभूतियों का सशक्त चित्रण मिलता है। क्षय रोग से पीड़ित होने के कारण उनका जीवन भले ही अल्प रहा,लेकिन अपनी रचनात्मक प्रतिभा के बल पर उन्होंने हिंदी साहित्य में स्थायी और विशिष्ट पहचान बनाई। वक्ताओं ने कहा कि स्व.चंद्र कुंवर बर्त्वाल का साहित्य हिमालय की प्रकृति और यहां के जनजीवन की संवेदनशील अभिव्यक्ति है। उनकी कविताओं में पहाड़ केवल भौगोलिक क्षेत्र के रूप में नहीं,बल्कि जीवंत अनुभूति,सौंदर्य और संवेदना के रूप में उपस्थित होता है। यही कारण है कि समय बीतने के बावजूद उनकी रचनाओं की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। इस अवसर पर नगर के वरिष्ठ एवं प्रसिद्ध रंगकर्मी विमल बहुगुणा को उत्तराखंड यंग सिने अवार्ड प्रदान किए जाने की घोषणा पर साहित्यकारों एवं संस्कृति प्रेमियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी। वक्ताओं ने कहा कि रंगमंच और कला के क्षेत्र में उनका योगदान युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है। गोष्ठी में आगामी 30 अगस्त को डॉ.प्रकाश चमोली की पुस्तक के लोकार्पण को लेकर भी चर्चा की गई। इसके साथ ही परिषद् की ओर से प्रतिवर्ष प्रदान की जाने वाली छात्रवृत्ति के आयोजन को लेकर आवश्यक विचार-विमर्श किया गया। साहित्यकारों ने छात्रवृत्ति जैसे प्रयासों को प्रतिभावान विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। कार्यक्रम में प्रो.रामानंद गैरोला,डॉ.विमला चमोली,वीरेंद्र रतूड़ी,डॉ.प्रकाश चमोली,जयकृष्ण पैन्यूली,डॉ.प्रदीप अणथ्वाल,मेनका मिश्रा सहित साहित्य एवं संस्कृति से जुड़े अनेक लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित साहित्यकारों ने स्व.चंद्र कुंवर बर्त्वाल के साहित्यिक योगदान को नमन करते हुए उनकी रचनाओं को व्यापक स्तर पर प्रचारित-प्रसारित करने का संकल्प व्यक्त किया।

नवीनतम समाचार – Dainik Himalya Times

नवीनतम समाचार

Loading...