गांव की तरक्की से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था-योजनाओं के बेहतर कन्वर्जेंस से रोजगार और पलायन पर वार–भरत चौधरी

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पहाड़ की खुशहाली का रास्ता गांवों की मजबूत अर्थव्यवस्था और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों से होकर गुजरता है। यदि सरकारी योजनाओं का लाभ अलग-अलग स्तर

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पहाड़ की खुशहाली का रास्ता गांवों की मजबूत अर्थव्यवस्था और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों से होकर गुजरता है। यदि सरकारी योजनाओं का लाभ अलग-अलग स्तर पर देने के बजाय उनका बेहतर कन्वर्जेंस किया जाए और स्थानीय संसाधनों को आजीविका से जोड़ा जाए,तो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के साथ पलायन की चुनौती से भी काफी हद तक निपटा जा सकता है। इसी सोच के साथ ग्राम्य विकास,लघु,सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यम तथा खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री भरत सिंह चौधरी ने शनिवार को जिला मुख्यालय पौड़ी पहुंचकर विभिन्न विभागों की विकास योजनाओं और कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। जिला मुख्यालय पहुंचने पर स्थानीय विधायक राजकुमार पोरी,जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार एवं मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी ने कैबिनेट मंत्री का स्वागत किया। इस दौरान उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। बैठक में वीबी-जी रामजी योजना,मनरेगा,प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना,पशुपालन,बांस मिशन,राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन सहित विभिन्न विभागों की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। कैबिनेट मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि योजनाओं का उद्देश्य केवल लक्ष्य पूरा करना नहीं,बल्कि उनका वास्तविक लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना होना चाहिए। कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए विभिन्न विभागों की योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय और कन्वर्जेंस बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि गांवों में उपलब्ध प्राकृतिक एवं स्थानीय संसाधनों को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़कर ग्रामीणों की आय में वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के साथ यह भी देखा जाए कि एक योजना का लाभ दूसरी योजना से किस प्रकार जोड़ा जा सकता है। इससे सीमित संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी आजीविका के नए अवसर तैयार किए जा सकेंगे। वीबी-जी रामजी योजना की समीक्षा के दौरान कैबिनेट मंत्री ने मनरेगा की लंबित देनदारियों को शीघ्र निस्तारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नई योजना के प्रावधानों और कार्यप्रणाली की जानकारी ग्राम प्रधानों,जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जानी चाहिए। उन्होंने इसके लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने तथा प्रधान संगठन के पदाधिकारियों से भी ग्रामीणों को योजना के संबंध में जानकारी देने में सहयोग करने का आह्वान किया। मुख्य विकास अधिकारी को अधिकाधिक मानव दिवस सृजित करने तथा मनरेगा सहायकों को सक्रिय रूप से कार्य करने के निर्देश दिए गए। मंत्री ने आपदा में क्षतिग्रस्त पुश्तों सहित आवश्यक कार्यों को योजनाओं के माध्यम से कराने,सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और वाटरशेड मैनेजमेंट को प्राथमिकता देने के भी निर्देश दिए। बैठक में स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि बांस और रिंगाल जैसे पहाड़ के पारंपरिक संसाधनों को व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़कर ग्रामीणों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने बताया कि ग्राम्य विकास संस्थान रुद्रपुर में बांस की विभिन्न प्रजातियों को विकसित किया जा रहा है,जबकि देहरादून के सभावाला में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। उन्होंने पौड़ी जिले में उपयुक्त भूमि,विशेषकर सड़क किनारे उपलब्ध भूमि पर बांस की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बांस का उपयोग केवल फेंसिंग तक सीमित नहीं है,बल्कि इसे चारे के विकल्प के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे कृषि और पशुपालन दोनों को लाभ मिलेगा तथा किसानों की आर्थिकी मजबूत होगी। पशुपालन विभाग की समीक्षा करते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि पर्वतीय जिलों में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। इसे अन्य विभागीय योजनाओं के साथ जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को पशु सखियों को कृत्रिम गर्भाधान का अनिवार्य प्रशिक्षण देने तथा किसानों को बंजर भूमि पर नेपियर घास उगाने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए। उन्होंने गोट वैली जैसी गतिविधियों को भी विभिन्न योजनाओं के कन्वर्जेंस से आगे बढ़ाने पर जोर दिया। कहा कि अच्छी नस्ल के पशुओं का पालन बढ़ने से दूध उत्पादन,डेयरी,गोबर गैस प्लांट सहित कई सहायक रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे ग्रामीणों की आय बढ़ाने के साथ ही पलायन को रोकने में भी मदद मिलेगी। जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया ने जिले में महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा किए जा रहे विभिन्न नवाचारों की जानकारी कैबिनेट मंत्री को दी। उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूहों द्वारा अपशिष्ट पिरूल से पेलेट तैयार किए जा रहे हैं। वहीं ग्रामोत्थान परियोजना प्रबंधक कुलदीप बिष्ट ने बताया कि महिला समूहों द्वारा माल्टे के छिलकों से फेस पैक,बायो-एंजाइम सहित कई उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। कैबिनेट मंत्री ने महिला समूहों के इन प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों को केवल तैयार करना पर्याप्त नहीं है,बल्कि उनके लिए बेहतर बाजार,ब्रांडिंग और विपणन की व्यवस्था भी जरूरी है। उन्होंने अधिक से अधिक ग्रामीणों,विशेषकर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने तथा जिले में कीवी उत्पादन को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की समीक्षा के दौरान कैबिनेट मंत्री ने चरण-4 में अधिक से अधिक पात्र सड़कों को चिन्हित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं,बल्कि शिक्षा,स्वास्थ्य,रोजगार और बाजार तक पहुंच की जीवनरेखा है। इसलिए छोटे और दूरस्थ गांवों को भी बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। वन भूमि से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिकारियों को चेकलिस्ट के अनुसार सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रस्ताव भेजने तथा सर्वे,डीपीआर और अन्य प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। कैबिनेट मंत्री ने जिले में विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों की सराहना करते हुए अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं की सफलता तभी मानी जाएगी,जब उनका वास्तविक लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने,योजनाओं की नियमित निगरानी करने और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधन,स्थानीय हुनर और सरकारी योजनाओं का बेहतर तालमेल ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी आधार बन सकता है। इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख अस्मिता नेगी,संयुक्त मजिस्ट्रेट गौरी प्रभात,जिला विकास अधिकारी रमेश चंद्र,जिला पंचायत राज अधिकारी जितेंद्र कुमार,मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.विशाल शर्मा,अर्थ एवं संख्याधिकारी राम सलोने,खंड विकास अधिकारी पौड़ी दृष्टि आनंद,परियोजना अधिकारी उरेडा चंद्र प्रकाश उपाध्याय,जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेंद्र थपलियाल,जिला समाज कल्याण अधिकारी रोहित सिंह,मत्स्य अधिकारी अभिषेक मिश्रा,ग्रामोत्थान परियोजना अधिकारी कुलदीप बिष्ट सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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