योग के हुनर से सुमन ने रची आत्मनिर्भरता की कहानी-स्वयं सहायता समूह के सहारे खड़ा किया सफल योग केंद्र

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी कीर्तिनगर/श्रीनगर गढ़वाल। कभी आर्थिक संसाधनों की कमी सपनों के रास्ते में बड़ी चुनौती बन जाती है,लेकिन जब हुनर के साथ मेहनत,आत्मविश्वास और सही अवसर मिल जाए तो यही सपने

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

कीर्तिनगर/श्रीनगर गढ़वाल। कभी आर्थिक संसाधनों की कमी सपनों के रास्ते में बड़ी चुनौती बन जाती है,लेकिन जब हुनर के साथ मेहनत,आत्मविश्वास और सही अवसर मिल जाए तो यही सपने आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव बन सकते हैं। जनपद टिहरी गढ़वाल के विकासखंड कीर्तिनगर की सुमन चमोली ने इसी सोच को अपनी मेहनत से हकीकत में बदलकर दिखाया है। योग की शिक्षा को केवल व्यक्तिगत ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उन्होंने इसे अपनी आजीविका का माध्यम बनाया और स्वयं सहायता समूह से मिले आर्थिक सहयोग के सहारे मढ़ी चौरास प्रज्ज्वल योग सेंटर की स्थापना कर सफलता की नई कहानी लिखी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने तथा उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए संचालित योजनाओं का सकारात्मक असर अब गांव-गांव दिखाई देने लगा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से गठित स्वयं सहायता समूह महिलाओं को न केवल आर्थिक सहयोग उपलब्ध करा रहे हैं,बल्कि उनके भीतर छिपे हुनर को पहचानकर उसे रोजगार में बदलने का अवसर भी दे रहे हैं। सुमन चमोली की कहानी इसी बदलाव की प्रेरणादायी मिसाल है। सुमन चमोली राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित महिला शक्ति स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं और वर्तमान में समूह में कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रही हैं। समूह से जुड़ने से पहले उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने हुनर को रोजगार में बदलने के लिए आवश्यक आर्थिक संसाधनों की थी। सुमन ने योग में एमए की शिक्षा प्राप्त की थी और उन्हें विश्वास था कि योग के क्षेत्र में वह बेहतर काम कर सकती हैं। आवश्यकता थी तो केवल अवसर और आर्थिक सहयोग की। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल वित्तीय सहायता मिली,बल्कि अपने सपने को साकार करने का आत्मविश्वास भी मिला। सुमन चमोली ने वर्ष 2024 में प्रथम सामुदायिक ऋण (सीसीएल) के रूप में 1.50 लाख रुपये की धनराशि प्राप्त की। उन्होंने इस धनराशि को किसी व्यक्तिगत खर्च में लगाने के बजाय अपने हुनर को रोजगार में बदलने का निर्णय लिया और इसी से मढ़ी चौरास प्रज्ज्वल योग सेंटर की नींव रखी। इसके बाद वर्ष 2025 में द्वितीय सीसीएल के रूप में तीन लाख रुपये की धनराशि प्राप्त हुई। इस राशि का उपयोग उन्होंने योग केंद्र के निर्माण और विस्तार में किया। इस प्रकार स्वयं सहायता समूह से मिले वित्तीय सहयोग को उन्होंने योजनाबद्ध तरीके से अपने उद्यम में लगाया और धीरे-धीरे योग केंद्र को एक स्थायी आजीविका के साधन के रूप में विकसित कर लिया। यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि यदि आर्थिक सहायता का सही दिशा में उपयोग किया जाए तो छोटा सा सहयोग भी बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकता है। योग सिखाकर बना रहीं आत्मनिर्भरता की राह
एमए योग की शिक्षा प्राप्त सुमन चमोली वर्तमान में अपने योग केंद्र में बेसिक से लेकर एडवांस स्तर तक योग का प्रशिक्षण प्रदान कर रही हैं। वह लोगों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से अब तक एक हजार से अधिक लोगों को योग का प्रशिक्षण दे चुकी है। वर्तमान में योग प्रशिक्षण के माध्यम से वह लगभग 30 हजार रुपये प्रतिमाह की आय अर्जित कर रही हैं। खास बात यह है कि सुमन की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत आय तक सीमित नहीं रही है। उन्होंने अपने उद्यम का विस्तार करते हुए एक अन्य योग शिक्षक को भी अपने साथ रोजगार दिया है। अर्थात जिस स्वरोजगार की शुरुआत उन्होंने स्वयं की आर्थिक मजबूरी और सीमित संसाधनों के बीच की थी,आज वही प्रयास उनके साथ दूसरे व्यक्ति के लिए भी रोजगार का माध्यम बन चुका है। सुमन चमोली का कहना है कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक तनाव और असंतुलित जीवनशैली से भी जूझ रहे हैं। उनके योग केंद्र में लोगों को नियमित योगाभ्यास के माध्यम से स्वस्थ और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। उनका मानना है कि योग केवल व्यायाम नहीं,बल्कि शरीर,मन और दिनचर्या में संतुलन स्थापित करने का माध्यम है। वह बेसिक से एडवांस स्तर तक प्रशिक्षण देकर लोगों को योग की नियमित साधना से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। सुमन चमोली कहती हैं कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और स्वयं सहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। समूह के माध्यम से मिले आर्थिक सहयोग और मार्गदर्शन ने उनके उस सपने को आकार दिया,जिसे वह लंबे समय से अपने मन में संजोए हुए थीं। उनका कहना है कि यदि स्वयं सहायता समूह के माध्यम से उन्हें आर्थिक सहायता और मार्गदर्शन नहीं मिला होता तो योग केंद्र स्थापित करने का सपना इतनी आसानी से पूरा नहीं हो पाता। उन्होंने स्वरोजगार और महिला सशक्तीकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उत्तराखंड सरकार का आभार व्यक्त किया। मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का उद्देश्य केवल महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ना नहीं,बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाकर स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना भी है। उन्होंने कहा कि सुमन चमोली की सफलता यह दर्शाती है कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उपलब्ध कराए जा रहे वित्तीय सहयोग का सही उपयोग कर महिलाएं अपने हुनर को सफल उद्यम में बदल सकती हैं। जिला प्रशासन की ओर से महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण,वित्तीय सहायता और आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुमन जैसी महिलाओं की सफलता अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। सही अवसर,मेहनत,हुनर और सरकारी सहयोग के बेहतर समन्वय से महिलाएं न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बन सकती हैं,बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकती हैं। सुमन चमोली की सफलता केवल एक योग केंद्र की स्थापना की कहानी नहीं है,बल्कि यह ग्रामीण महिला के हुनर,मेहनत,आत्मविश्वास और सरकारी योजनाओं के प्रभावी उपयोग की कहानी है। एक ओर स्वयं सहायता समूह ने उन्हें आर्थिक मजबूती दी,तो दूसरी ओर उनकी योग शिक्षा ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का हुनर दिया। दोनों के बेहतर समन्वय से आज सुमन न केवल स्वयं आत्मनिर्भर हैं,बल्कि एक अन्य योग शिक्षक को भी रोजगार दे रही हैं। ग्रामीण महिलाओं के लिए यह सफलता संदेश देती है कि हुनर को अवसर मिले और अवसर को मेहनत का साथ मिल जाए तो स्वरोजगार केवल सपना नहीं रहता,बल्कि आत्मनिर्भरता की मजबूत पहचान बन जाता है।

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