
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनसमस्याओं के त्वरित समाधान,राजस्व व्यवस्था को प्रभावी बनाने और प्रशासनिक कार्यों में जवाबदेही सुनिश्चित करने को लेकर जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया ने अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पुराने राजस्व वादों का समयबद्ध निस्तारण,राजस्व वसूली में तेजी तथा दैवीय आपदा की स्थिति में तत्काल कार्रवाई प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया की अध्यक्षता में बुधवार को कलक्ट्रेट सभागार में उपजिलाधिकारियों के साथ राजस्व विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राजस्व वसूली,राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों,दैवीय आपदा प्रबंधन,विविध देयकों की वसूली,खातेदारों के अंश निर्धारण,भूलेख,फार्मर रजिस्ट्री,डिजिटल क्रॉप सर्वे,भू-अनुमति पोर्टल,तहसील दिवस एवं मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायतों सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की विस्तार से समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने राजस्व प्राप्ति में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि उपजिलाधिकारी एवं तहसीलदार अपने-अपने क्षेत्रों में राजस्व वसूली की नियमित समीक्षा करें और निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप वसूली सुनिश्चित करें। विविध देयकों की वसूली की समीक्षा के दौरान उन्होंने बड़े बकायेदारों से नियमानुसार वसूली में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि जिन अमीनों की विविध देयकों की वसूली 50 प्रतिशत से कम है,उनका वेतन रोका जाए। जिलाधिकारी ने एक वर्ष तथा तीन वर्ष से अधिक पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुराने मामलों की नियमित सुनवाई करते हुए आगामी एक माह में अधिकाधिक वादों का निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। धारा 166 एवं 167 से संबंधित मामलों को भी प्राथमिकता से निस्तारित करने तथा उनकी अद्यतन स्थिति जिला कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। उन्होंने सभी उपजिलाधिकारियों एवं तहसीलदारों को अपने न्यायालयों और तहसीलों का निरीक्षण कर लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करने को कहा। दैवीय आपदा प्रबंधन की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आपदा की सूचना मिलते ही संबंधित राजस्व उपनिरीक्षक उसी दिन मौके पर पहुंचकर क्षति का आकलन करें और रिपोर्ट उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में राजस्व उपनिरीक्षक क्षेत्र में सबसे पहले मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई करने वाला महत्वपूर्ण कर्मचारी होता है,इसलिए त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी है। उन्होंने ग्राम स्तर पर हुई क्षति का शीघ्र आकलन करने के लिए खंड विकास अधिकारियों एवं संबंधित विभागों के साथ साप्ताहिक बैठक करने तथा पुराने आपदा कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कर उनकी प्रगति और गुणवत्ता की समीक्षा करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि जनपद में क्षतिग्रस्त 63 पटवारी चौकियों में से अधिकांश का कार्य पूर्ण हो चुका है,जबकि शेष पर कार्य प्रगति पर है। जिलाधिकारी ने आपदा प्रबंधन के लिए उपलब्ध उपकरणों की जानकारी लेते हुए निर्देश दिए कि वुडकटर सहित आवश्यक उपकरण तहसीलों में तथा आपदा किट संबंधित वाहनों में उपलब्ध रहें,ताकि आपात स्थिति में उनका तत्काल उपयोग किया जा सके। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी सेवानिवृत्त कर्मचारी की पेंशन अथवा अन्य देयता अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रहनी चाहिए। संबंधित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। खातेदारों के अंश निर्धारण कार्य की समीक्षा के दौरान उन्होंने सत्यापन में गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा सभी उपजिलाधिकारियों को खातों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। भूलेख एप्लिकेशन में ऑनलाइन प्राप्त उत्तराधिकार एवं विरासत संबंधी विवरण पत्रों के निस्तारण में कम प्रगति पर उन्होंने नाराजगी जताई और ऑफलाइन निरस्त किए गए प्रकरणों में कारण स्पष्ट रूप से दर्ज करने को कहा। भू-अनुमति पोर्टल पर लंबित कार्यों में भी तेजी लाने के निर्देश दिए। फार्मर रजिस्ट्री की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने विकासखंड स्तर पर लापरवाही बरतने वाले संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने खरीफ फसल के डिजिटल क्रॉप सर्वे का कार्य भी शीघ्र शुरू कराने को कहा। तहसील दिवस एवं मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों की समीक्षा करते हुए उन्होंने शिकायतों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिकायतों के निस्तारण में केवल औपचारिकता नहीं होनी चाहिए,बल्कि शिकायतकर्ता की समस्या का वास्तविक समाधान सुनिश्चित किया जाए। ई-ऑफिस प्रणाली की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने लंबित प्रकरणों का निर्धारित समयसीमा में निस्तारण करने तथा कार्यालयों में डिजिटल कार्यप्रणाली को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि प्रत्येक तहसील में डिजिटल व्यवस्था मजबूत करने के लिए कंप्यूटर उपलब्ध कराए गए हैं तथा आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त कंप्यूटर भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारियों को जिला पर्यटन विकास अधिकारी के साथ होटल एवं होमस्टे का सत्यापन कराने के निर्देश दिए। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार चालान एवं जुर्माने की कार्रवाई करने को कहा। तहसीलों के आवासीय भवनों के निर्माण कार्य की प्रगति की भी समीक्षा की गई। बैठक में अपर जिलाधिकारी एफ.आर.चौहान,संयुक्त मजिस्ट्रेट गौरी प्रभात,उपजिलाधिकारी श्रीनगर नूपुर वर्मा,चौबट्टाखाल रेखा आर्य,लैंसडाउन शालिनी मौर्य सहित तहसीलदार एवं संबंधित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।