
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। हिमालय दिवस के पावन अवसर पर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग में हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक,पर्यावरणीय,सामाजिक एवं पर्यटन संबंधी चुनौतियों और संभावनाओं को अकादमिक विमर्श से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण पत्रिका हिमालय बुलेटिन के द्वितीय अंक का गरिमापूर्ण विमोचन किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षाविदों,भूगोलवेत्ताओं एवं शोधकर्ताओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया। हिमालय बुलेटिन के द्वितीय अंक का विमोचन विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो.एन.एस.पंवार,कुलसचिव वाई.पी.रैवानी,डीन अर्थ साइंस प्रो.एम.एस.नेगी,कन्वीनर एवं ज्योग्राफिकल सोसाइटी ऑफ सेंट्रल हिमालय की अध्यक्ष प्रो.अनीता रूडोला,प्रो.बी.पी.नैथानी,डॉ.किरण त्रिपाठी,डॉ.मंजू भंडारी एवं डॉ.राजेश भट्ट की गरिमापूर्ण उपस्थिति में किया गया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि हिमालय केवल भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पर्वतीय क्षेत्र नहीं है,बल्कि यह देश की जलवायु,जैव विविधता,जल संसाधनों,संस्कृति,लोकजीवन और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार भी है। ऐसे में हिमालय से जुड़े विषयों पर वैज्ञानिक एवं तथ्यपरक अध्ययन को प्रोत्साहित करना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। हिमालय बुलेटिन इसी दिशा में शोधकर्ताओं,शिक्षाविदों और समाज के बीच संवाद का एक प्रभावी मंच तैयार करने का प्रयास कर रहा है। हिमालय बुलेटिन के मुख्य संपादक प्रो.वी.पी.सती,वरिष्ठ प्रोफेसर मिजोरम विश्वविद्यालय हैं। वहीं सह-संपादक डॉ.राजेश भट्ट तथा संरक्षक प्रो.कमलेश कुमार हैं। संपादक मंडल में प्रो.अनीता रूडोला,प्रो.अनीता पांडे सहित देश-विदेश के अनेक वरिष्ठ भूगोलवेत्ता एवं विषय विशेषज्ञ जुड़े हुए हैं। द्वितीय अंक में हिमालयी क्षेत्र से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों को अकादमिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। इसमें भौगोलिक परिवर्तन,पर्यावरण संरक्षण,सामाजिक सरोकार,हिमालयी पारिस्थितिकी,पर्यटन तथा समसामयिक हिमालयी चुनौतियों से संबंधित विषयों पर विमर्श को प्रमुखता दी गई है। पत्रिका का उद्देश्य हिमालय को लेकर हो रहे शोध एवं अकादमिक कार्यों को व्यापक मंच प्रदान करने के साथ ही नीति-निर्माताओं और समाज तक महत्वपूर्ण शोध निष्कर्षों को पहुंचाना भी है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन,प्राकृतिक आपदाओं,अनियोजित विकास,पलायन,पर्यावरणीय असंतुलन और पर्यटन के बदलते स्वरूप जैसी चुनौतियां हिमालयी क्षेत्र के सामने गंभीर प्रश्न खड़े कर रही हैं। इन विषयों पर वैज्ञानिक अध्ययन और स्थानीय अनुभवों के बीच समन्वय स्थापित कर ही हिमालय के सतत विकास की राह तैयार की जा सकती है। उन्होंने कहा कि हिमालय बुलेटिन जैसे अकादमिक प्रयास हिमालयी समाज और पर्यावरण से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को शोध एवं तथ्यों के आधार पर सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हिमालय दिवस पर द्वितीय अंक का विमोचन इस बात का संदेश भी है कि हिमालय के संरक्षण और उसके सतत विकास के लिए ज्ञान,शोध और जनभागीदारी को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा। इस अवसर पर ज्योग्राफिकल सोसाइटी ऑफ सेंट्रल हिमालय की ओर से भूगोल के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ.वीर सिंह को यंग ज्योग्रफर अवार्ड से सम्मानित किया गया। सम्मान मिलने पर उपस्थित शिक्षाविदों एवं भूगोलवेत्ताओं ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल अकादमिक भविष्य की कामना की। कार्यक्रम ने एक ओर जहां हिमालयी अध्ययन और शोध की दिशा में हिमालय बुलेटिन के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया,वहीं दूसरी ओर युवा शोधकर्ताओं को हिमालय के ज्वलंत विषयों पर गंभीर एवं वैज्ञानिक अध्ययन के लिए प्रेरित किया। हिमालय दिवस पर आयोजित यह विमोचन समारोह विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण में हिमालयी सरोकारों को केंद्र में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।