
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग पौड़ी की ओर से मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पौड़ी में जागरूकता एवं शपथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से आत्महत्या जैसी गंभीर सामाजिक एवं मानसिक स्वास्थ्य समस्या की रोकथाम,मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने तथा तनाव और निराशा से जूझ रहे लोगों को समय पर सहयोग,परामर्श एवं आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने आत्महत्या की रोकथाम के प्रति संवेदनशील रहने,मानसिक तनाव एवं भावनात्मक परेशानियों से गुजर रहे व्यक्तियों की समस्याओं को गंभीरता से समझने तथा जरूरतमंद लोगों को उचित सहायता एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने की शपथ ली। इस दौरान यह संदेश भी दिया गया कि मानसिक परेशानी को छिपाने के बजाय उसके बारे में खुलकर बात करना और समय रहते मदद लेना बेहद जरूरी है। इस अवसर पर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ.वीरेन्द्र कुमार पुनेडा ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे शारीरिक स्वास्थ्य से अलग करके नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति में लगातार निराशा,अत्यधिक तनाव,भावनात्मक परेशानी अथवा व्यवहार में असामान्य परिवर्तन जैसे संकेत दिखाई दें तो उसके प्रति संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। डॉ.पुनेडा ने कहा कि ऐसे व्यक्ति की बात को नजर-अंदाज करने के बजाय धैर्यपूर्वक सुनना,उसका भरोसा बनाए रखना और आवश्यकता पड़ने पर उसे विशेषज्ञ परामर्श एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है,बल्कि इसके लिए परिवार,विद्यालय,समुदाय,सामाजिक संस्थाओं और स्वास्थ्य सेवाओं को मिलकर निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के प्रति समाज में व्याप्त झिझक और कलंक को कम करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मानसिक परेशानी किसी भी व्यक्ति को हो सकती है और समय पर सहायता मिलने से अनेक गंभीर परिस्थितियों को टाला जा सकता है। इसलिए लोगों को एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील रहते हुए जरूरत के समय सहयोग का हाथ बढ़ाना चाहिए। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.मेघना असवाल ने कहा कि विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति की रोकथाम तथा मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से जनपद की सभी चिकित्सा इकाइयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना और जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर सहायता पहुंचाना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार की मानसिक समस्या,तनाव,चिंता अथवा भावनात्मक परेशानी की स्थिति में टेली मानस के टोल-फ्री नंबर 14416 पर संपर्क किया जा सकता है। इस सेवा के माध्यम से विशेषज्ञों द्वारा निःशुल्क परामर्श एवं आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने आमजन से अपील की कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या को छिपाने अथवा अकेले झेलने के बजाय समय रहते विशेषज्ञों से परामर्श लें। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने,आत्महत्या से जुड़े सामाजिक कलंक को कम करने तथा जरूरतमंद व्यक्तियों और उनके परिवारों तक परामर्श एवं सहायता सेवाओं की जानकारी पहुंचाने का संकल्प लिया। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि आत्महत्या की रोकथाम के लिए जागरूकता,संवेदनशील संवाद और समय पर सहायता तीनों बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि कोई व्यक्ति मानसिक तनाव या निराशा के दौर से गुजर रहा है तो उसे अकेला छोड़ने के बजाय उसकी बात सुनना और उचित सहायता तक पहुंचाना जिंदगी बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी,कर्मचारी एवं अन्य संबंधित कार्मिक उपस्थित रहे।