कीर्तिनगर में अधिशासी अभियंता की तैनाती पर घमासान-स्थानांतरण के साथ पूर्व कार्यकाल की उच्चस्तरीय जांच की मांग

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी कीर्तिनगर/श्रीनगर गढ़वाल। लोक निर्माण विभाग कीर्तिनगर में अधिशासी अभियंता के पद पर धीरेंद्र कुमार की हालिया तैनाती को लेकर क्षेत्रीय जनता और जनप्रतिनिधियों में असंतोष के स्वर उठने लगे

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

कीर्तिनगर/श्रीनगर गढ़वाल। लोक निर्माण विभाग कीर्तिनगर में अधिशासी अभियंता के पद पर धीरेंद्र कुमार की हालिया तैनाती को लेकर क्षेत्रीय जनता और जनप्रतिनिधियों में असंतोष के स्वर उठने लगे हैं। इस संबंध में उपजिलाधिकारी कीर्तिनगर टिहरी गढ़वाल के माध्यम से मुख्यमंत्री उत्तराखंड को पत्र भेजकर अधिशासी अभियंता के स्थानांतरण के साथ-साथ उनके पूर्व कार्यकाल की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की गई है। मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि लोक निर्माण विभाग कीर्तिनगर में अधिशासी अभियंता के पद पर हाल ही में धीरेंद्र कुमार की तैनाती की गई है। इस तैनाती को लेकर क्षेत्रीय जनता एवं जनप्रतिनिधियों में असंतोष और अनेक सवाल उत्पन्न हो रहे हैं। पत्र में मांग की गई है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए उनकी तैनाती की निष्पक्ष समीक्षा की जाए तथा उन्हें तत्काल अन्यत्र स्थानांतरित किया जाए। पत्र में पूर्व तैनाती को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। उल्लेख किया गया है कि इससे पूर्व लोक निर्माण विभाग कीर्तिनगर में अधिशासी अभियंता के पद पर कार्यरत रहे जगदीश प्रसाद थपलियाल को मात्र लगभग दो माह के अल्प कार्यकाल के बाद क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून स्थानांतरित कर दिया गया था। वहीं पत्र के अनुसार धीरेंद्र कुमार को पूर्व में इसी डिवीजन में दो बार सेवाएं देने के बाद पुनः तीसरी बार उसी डिवीजन में तैनाती दी गई है। इस स्थिति को लेकर स्थानांतरण नीति एवं विभागीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र में धीरेंद्र कुमार के पूर्व कार्यकाल के दौरान विभागीय कार्यप्रणाली एवं उनके आचरण को लेकर शासन-प्रशासन स्तर पर शिकायतें किए जाने का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पूर्व में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराया जाना जनहित में आवश्यक है। शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि पूर्व कार्यकाल के दौरान कुछ विभागीय कार्यों में निर्धारित प्रक्रिया एवं मानकों के पालन को लेकर सवाल उठे थे। साथ ही कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने,खुली निविदा प्रक्रिया के स्थान पर सीमित स्तर पर कार्य आवंटित किए जाने तथा विभागीय कार्यों में पारदर्शिता को लेकर भी शिकायतें सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनकी वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पत्र में विशेष रूप से पूर्व कार्यकाल में कराए गए निर्माण कार्यों,निविदा प्रक्रिया,कार्य आवंटन,भुगतान तथा संबंधित विभागीय अभिलेखों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही पूर्व में प्राप्त शिकायतों,उन पर हुई विभागीय कार्रवाई एवं संबंधित अभिलेखों की भी जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने का आग्रह किया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि लोक निर्माण विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभाग में पारदर्शिता,जवाबदेही और जनहित सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता,निविदा प्रक्रिया तथा सरकारी धनराशि के उपयोग में किसी भी प्रकार की अनियमितता की शिकायत सामने आने पर उसका निष्पक्ष परीक्षण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता को गुणवत्तापूर्ण विकास कार्य और सरकारी योजनाओं का पारदर्शी क्रियान्वयन मिलना चाहिए। ऐसे में किसी अधिकारी की तैनाती को लेकर यदि क्षेत्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं तो शासन को पूरे प्रकरण का निष्पक्ष परीक्षण कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। शिकायती पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि प्रकरण पर शीघ्र संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो क्षेत्रीय जनता के साथ मिलकर उपजिलाधिकारी कार्यालय कीर्तिनगर के समक्ष शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। पत्र में कहा गया है कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में 20 सितंबर 2026 से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन एवं हड़ताल के लिए बाध्य होना पड़ेगा,जिसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग एवं शासन-प्रशासन की होगी। शिकायत पत्र की प्रतिलिपि लोक निर्माण विभाग मंत्री सतपाल महाराज,सचिव लोक निर्माण विभाग उत्तराखंड,जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल,मुख्य अभियंता लोक निर्माण विभाग पौड़ी गढ़वाल तथा उपजिलाधिकारी कीर्तिनगर को भी प्रेषित की गई है। इस प्रकरण में सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप गोदियाल ग्राम पाणव लोस्तू,राम सिंह चौहान प्रधान धारकोट ढुण्डसीर,उत्तम सिंह पंवार प्रधान पारकोट,सामाजिक कार्यकर्ता अंचल सिंह नेगी,तथा कीर्तिनगर क्षेत्र से नरेंद्र सिंह,मनोज राणा,सोबन सिंह चौहान,उदय सिंह और दिनेश भट्ट सहित अन्य लोगों ने भी मामले में निष्पक्ष जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की मांग उठाई है। अब देखना यह होगा कि शिकायत में उठाए गए सवालों पर शासन-प्रशासन क्या रुख अपनाता है और क्या धीरेंद्र कुमार की तैनाती तथा उनके पूर्व कार्यकाल से संबंधित अभिलेखों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाती है। यदि जांच होती है तो उससे लगाए गए आरोपों की वास्तविकता सामने आने के साथ ही विभागीय पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों का भी समाधान हो सकेगा।

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