बंदियों के जीवन में नई उम्मीद और सकारात्मकता का संचार करेगा गणेश उत्सव-जिला कारागार पौड़ी में सात दिवसीय आयोजन का शुभारंभ

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जहां एक ओर गणेश चतुर्थी का पर्व देशभर में श्रद्धा,भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है,वहीं जिला कारागार पौड़ी गढ़वाल भी भगवान श्री गणेश की

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जहां एक ओर गणेश चतुर्थी का पर्व देशभर में श्रद्धा,भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है,वहीं जिला कारागार पौड़ी गढ़वाल भी भगवान श्री गणेश की भक्ति से सराबोर हो उठा। विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की आराधना के साथ जिला कारागार परिसर में सात दिवसीय गणेश उत्सव का शुभारंभ हुआ। धार्मिक आयोजन ने कारागार की चारदीवारी के भीतर आध्यात्मिक वातावरण के साथ-साथ बंदियों के मन में आत्मचिंतन,सकारात्मक सोच और नई शुरुआत की भावना को भी जागृत करने का संदेश दिया। गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर जिला कारागार पौड़ी गढ़वाल में भगवान श्री गणेश की प्रतिमा की विधिवत स्थापना कर पूजा-अर्चना एवं आरती की गई। इस दौरान कारागार परिसर में भक्ति-भजनों की गूंज सुनाई दी। बंदियों ने श्रद्धा एवं उत्साह के साथ धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता की। गणेश उत्सव के अंतर्गत आगामी सात दिनों तक कारागार परिसर में प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों के माध्यम से बंदियों को आध्यात्मिक चिंतन,सद्भाव,अनुशासन,आत्मविश्वास तथा सकारात्मक जीवन मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उत्सव का समापन विधिवत पूजा-अर्चना के बाद भगवान श्री गणेश की प्रतिमा के विसर्जन के साथ किया जाएगा। आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न होकर बंदियों के भीतर आत्मपरिवर्तन,आत्मचिंतन और समाज की मुख्यधारा में सकारात्मक भूमिका निभाने की भावना को मजबूत करना भी है। धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां बंदियों को मानसिक रूप से सशक्त बनाने तथा उनके भीतर उम्मीद और बेहतर भविष्य के प्रति विश्वास पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस अवसर पर जेल अधीक्षक कौशल कुमार ने कहा कि भगवान श्री गणेश बुद्धि,विवेक और शुभारंभ के प्रतीक हैं। गणेश चतुर्थी का पर्व हमें जीवन में आने वाली बाधाओं का धैर्य और सकारात्मक सोच के साथ सामना करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्री गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है और उनकी आराधना व्यक्ति को नई ऊर्जा,आत्मविश्वास तथा सद्मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि कारागार में इस प्रकार के धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने का उद्देश्य बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना तथा उनके भीतर सकारात्मक परिवर्तन की भावना को प्रोत्साहित करना है। आध्यात्मिक वातावरण से बंदियों को आत्ममंथन का अवसर मिलता है और वे अपने जीवन की दिशा को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित होते हैं। जेल अधीक्षक ने कहा कि कारागार केवल दंड की व्यवस्था का स्थान नहीं,बल्कि सुधार और पुनर्वास का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे आयोजन बंदियों के भीतर मानवीय संवेदनाओं,भाईचारे,अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होते हैं। उन्होंने गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए भगवान श्री गणेश से सभी के जीवन में सुख,शांति,समृद्धि एवं सद्बुद्धि प्रदान करने की कामना की। गणेश उत्सव के शुभारंभ के साथ ही जिला कारागार पौड़ी में अगले सात दिनों तक धार्मिक आस्था,भक्ति और सांस्कृतिक चेतना का वातावरण बना रहेगा। आयोजन इस संदेश को भी मजबूती देता है कि सुधार की राह पर बढ़ने के लिए सकारात्मक सोच,आध्यात्मिक चेतना और आत्मविश्वास सबसे बड़ी शक्ति है।

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