कूर्म महापुराण कथा में छलका सनातन ज्ञान का अमृत-श्रीहरि के कूर्म अवतार की महिमा से भक्तिमय हुआ श्रीनगर

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक,सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक नगरी श्रीनगर स्थित श्री गणेश मंदिर में आयोजित श्री कूर्म महापुराण कथा के द्वितीय दिवस का वातावरण भक्ति,ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक,सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक नगरी श्रीनगर स्थित श्री गणेश मंदिर में आयोजित श्री कूर्म महापुराण कथा के द्वितीय दिवस का वातावरण भक्ति,ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना से ओतप्रोत रहा। कथा व्यासपीठ से भगवान विष्णु के कूर्म अवतार की महिमा का मार्मिक एवं भावपूर्ण वर्णन किया गया,जिसे सुनकर श्रद्धालुजन आध्यात्मिक अनुभूति में डूब गए। मंदिर परिसर में दिनभर भगवान श्रीहरि के जयकारों और धार्मिक मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय बना रहा। व्यासपीठ पर विराजमान आचार्य मधुसूदन घिल्डियाल ने श्री कूर्म महापुराण की महिमा का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए कहा कि भगवान विष्णु ने समय-समय पर लोककल्याण,धर्म की स्थापना और सृष्टि के संरक्षण के लिए विभिन्न अवतार धारण किए। भगवान का कूर्म अवतार भी इसी दिव्य परंपरा का महत्वपूर्ण अध्याय है। उन्होंने समुद्र मंथन के प्रसंग से भगवान कूर्म अवतार की महत्ता को जोड़ते हुए बताया कि जब मंदराचल पर्वत को मथनी बनाकर समुद्र मंथन किया गया,तब भगवान विष्णु ने कच्छप अर्थात कूर्म रूप धारण कर मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण किया। यह प्रसंग केवल पौराणिक आख्यान नहीं,बल्कि धैर्य,आधार,त्याग और लोककल्याण की सनातन प्रेरणा भी प्रदान करता है। कथा के दौरान भगवान विष्णु की दिव्य माया का भी विस्तार से वर्णन किया गया। ब्राह्मी,सौरी एवं वैष्णवी माता के स्वरूप और उनकी आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए आचार्य ने कहा कि सनातन परंपरा में शक्ति और भगवान का संबंध सृष्टि के संचालन का मूल आधार है। भगवान की माया जीव को संसार के विविध रूपों से परिचित कराती है,वहीं ज्ञान और भक्ति के माध्यम से मनुष्य उस माया के वास्तविक स्वरूप को समझकर परम सत्य की ओर अग्रसर होता है। आचार्य मधुसूदन घिल्डियाल ने श्री कूर्म महापुराण की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कूर्म महापुराण में धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष-इन चार पुरुषार्थों का अत्यंत महत्वपूर्ण प्रतिपादन मिलता है। ये चारों पुरुषार्थ मानव जीवन को संतुलित,मर्यादित और सार्थक बनाने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में धर्म को जीवन का आधार माना गया है,जबकि अर्थ और काम को धर्मसम्मत मर्यादाओं में रहते हुए स्वीकार किया गया है तथा अंततः मोक्ष को जीवन की परम आध्यात्मिक उपलब्धि माना गया है। उन्होंने बताया कि श्री कूर्म महापुराण लगभग छह हजार श्लोकों से युक्त पवित्र पुराण है,जिसमें सर्ग,प्रतिसर्ग,वंश तथा मन्वन्तरों से संबंधित महत्वपूर्ण कथाओं और प्रसंगों का वर्णन मिलता है। पुराण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं हैं,बल्कि भारतीय संस्कृति,दर्शन,सामाजिक व्यवस्था,नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चिंतन के विशाल भंडार भी हैं। इनके श्रवण से मनुष्य को अपने जीवन,कर्तव्यों और संस्कारों के प्रति नई दृष्टि प्राप्त होती है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा गया कि वर्तमान भौतिक जीवन की आपाधापी के बीच पुराण कथा जैसे आयोजन समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। मंदिरों में होने वाले धार्मिक आयोजन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होते,बल्कि वे समाज में आपसी प्रेम,भाईचारे,सेवा,सद्भाव और संस्कारों की भावना को भी मजबूत करते हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली सनातन परंपरा और संस्कृति से परिचित होने का अवसर मिलता है। कथा स्थल पर आचार्य विद्वान पंडित मनीष डोभाल,वीरेन्द्र दत्त घिल्डियाल,संदीप पुरोहित,मनोज बंगवाल,संदीप उनियाल,भुवनेश भट्ट,नवीन सैफ,चन्द्र प्रकाश नैथानी सहित श्रद्धालुओं एवं धर्मप्रेमियों की उपस्थिति रही। कथा श्रवण के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीहरि के जयकारे लगाए और मंदिर परिसर भक्तिरस में सराबोर हो गया। कूर्म महापुराण कथा के सफल आयोजन में गणेश मंदिर के मुख्य पुजारी रामकृष्ण पाण्डे के साथ प्रभात पाण्डे,मुकेश जोशी,कुशलानंद भट्ट,सुधीर बिष्ट,राघव जोशी,पवन बंसल,सुरेंद्र चौहान,हिमांशु अग्रवाल,राजेंद्र प्रसाद बड़थ्वाल,मुकेश अग्रवाल सहित आयोजन मंडल के सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। श्री गणेश मंदिर में चल रही यह कथा धार्मिक आस्था के साथ-साथ श्रीनगर की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और सामुदायिक एकजुटता की भी सुंदर मिसाल बन रही है। कथा के माध्यम से जहां श्रद्धालु भगवान की लीलाओं का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं,वहीं धर्म,संस्कार और सद्भाव का संदेश भी जन-जन तक पहुंच रहा है। देवभूमि की पावन धरती पर गूंज रहा कूर्म महापुराण का यह आध्यात्मिक स्वर निश्चित रूप से समाज को अपनी सनातन सांस्कृतिक चेतना से जोड़ने का कार्य कर रहा है।

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