
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। राष्ट्रीय पोषण माह के अवसर पर जनपद पौड़ी गढ़वाल के विभिन्न विकासखंडों में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण जागरूकता को जन-जन तक पहुंचाने का अभियान निरंतर जारी है। हमारी आंगनबाड़ी,हमारी जिम्मेदारी थीम के साथ आयोजित हो रही गतिविधियों के माध्यम से बच्चों,महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को संतुलित आहार,आहार विविधता,स्वच्छता तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य पोषण को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रखकर प्रत्येक परिवार और समुदाय की सामूहिक जिम्मेदारी बनाना है। इसी क्रम में आंगनबाड़ी केंद्र हिसरिया मोहल्ला एवं पितृ मोहल्ला में पोषण माह के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। कार्यक्रम के दौरान तीन बच्चों का शाला पूर्व शिक्षा में प्रवेशोत्सव मनाया गया,जबकि एक बच्चे का अन्नप्राशन संस्कार भी कराया गया। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के प्रारंभिक विकास,शिक्षा से जुड़ाव तथा जीवन के प्रारंभिक चरण में उचित पोषण के महत्व का संदेश दिया गया। पारंपरिक पौष्टिक भोजन के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। बताया गया कि मोटे अनाज,विभिन्न प्रकार की दालें,हरी एवं मौसमी सब्जियां तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अन्य खाद्य पदार्थ शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भोजन में विविधता रखने से बच्चों और महिलाओं को आवश्यक पोषण प्राप्त करने में सहायता मिलती है। विकासखंड खिर्सू के अंतर्गत ग्राम सरणा (चलणस्यूं) स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में भी राष्ट्रीय पोषण माह के तहत पोषण जागरूकता एवं सामुदायिक सहभागिता से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। कार्यक्रम में गांव की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए संतुलित आहार और परिवार के बेहतर स्वास्थ्य को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त की। आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यकत्री रोशनी देवी रावत ने महिलाओं को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य पदार्थों के पोषण मूल्य के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हमारे पहाड़ी गांवों में पारंपरिक रूप से उपयोग किए जाने वाले कई खाद्य पदार्थ पोषण की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि इन्हें उचित मात्रा और विविधता के साथ दैनिक भोजन में शामिल किया जाए तो परिवार के भोजन को अधिक पौष्टिक बनाया जा सकता है। कार्यक्रम में मोटे अनाज,दाल,हरी सब्जियां एवं अन्य स्थानीय खाद्य पदार्थों से प्राप्त होने वाले पोषक तत्वों पर विशेष चर्चा की गई। महिलाओं को बच्चों के भोजन में विविधता रखने,उनकी उम्र के अनुसार पौष्टिक आहार देने तथा बच्चों की नियमित वृद्धि एवं विकास पर ध्यान रखने के लिए प्रेरित किया गया। सरणा आंगनबाड़ी केंद्र में आयोजित कार्यक्रम की विशेषता ग्रामीण महिलाओं की सक्रिय सहभागिता रही। महिलाओं ने पोषण संबंधी जानकारी को गंभीरता से सुना तथा परिवार के भोजन में स्थानीय एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थों को अधिक महत्व देने की बात कही। कार्यक्रम में महिलाओं के बीच यह संदेश भी दिया गया कि स्वस्थ परिवार की शुरुआत रसोई और दैनिक भोजन की आदतों से होती है। आंगनबाड़ी केंद्र की सहायिका कलावती भण्डारी ने भी कार्यक्रम के संचालन एवं व्यवस्थाओं में सहयोग किया। कार्यकत्री रोशनी देवी रावत और सहायिका कलावती भण्डारी ने उपस्थित महिलाओं के साथ संवाद करते हुए बच्चों के पोषण,स्वच्छता और आंगनबाड़ी केंद्र से मिलने वाली सेवाओं के संबंध में जानकारी साझा की। गांव की महिलाओं ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए स्थानीय खाद्य पदार्थों और पारंपरिक भोजन के उपयोग को लेकर चर्चा की। राष्ट्रीय पोषण माह की गतिविधियों में केवल भोजन और पोषण ही नहीं,बल्कि बच्चों के समग्र विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शाला पूर्व शिक्षा में बच्चों का प्रवेशोत्सव इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रारंभिक उम्र में बच्चों को शिक्षा के वातावरण से जोड़ने के साथ उनके स्वास्थ्य,पोषण,स्वच्छता और मानसिक विकास पर ध्यान दिया जाना उनके भविष्य की मजबूत नींव तैयार करता है। वहीं अन्नप्राशन संस्कार जैसी परंपरागत गतिविधियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और पारिवारिक संस्कारों को भी बाल विकास से जोड़ा जा रहा है। इस प्रकार आंगनबाड़ी केंद्र ग्रामीण समाज में पोषण,शिक्षा,स्वास्थ्य और संस्कार के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेंद्र थपलियाल ने बताया कि एक माह तक चलने वाले राष्ट्रीय पोषण अभियान के अंतर्गत जनपद के सभी विकासखंडों में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से विभिन्न जागरूकता एवं सामुदायिक आधारित गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। अभियान के माध्यम से बच्चों,महिलाओं एवं परिवारों को पौष्टिक और संतुलित आहार के प्रति जागरूक करने के साथ ही पोषण को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सही पोषण,देश रोशन की अवधारणा तभी सार्थक होगी,जब प्रत्येक परिवार अपने दैनिक जीवन में पौष्टिक भोजन,स्वच्छता और स्वस्थ आदतों को अपनाए। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से गांव-गांव पहुंच रहा पोषण जागरूकता का संदेश इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राष्ट्रीय पोषण माह के अंतर्गत सरणा सहित जनपद के विभिन्न गांवों में आयोजित हो रही गतिविधियां ग्रामीण समाज में स्वास्थ्य एवं पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ सामुदायिक सहभागिता की भावना को भी मजबूत कर रही हैं। हमारी आंगनबाड़ी,हमारी जिम्मेदारी का संदेश अब केवल एक अभियान की थीम नहीं,बल्कि स्वस्थ बच्चों,जागरूक माताओं और सशक्त परिवारों के निर्माण की सामूहिक जिम्मेदारी का संकल्प बनता दिखाई दे रहा है।