
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। बरसात के मौसम में सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पौड़ी की ओर से अंतरराष्ट्रीय सर्पदंश जागरूकता दिवस के अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोट में जन-जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने लोगों को सर्पदंश से बचाव,उसके लक्षणों तथा आपात स्थिति में किए जाने वाले आवश्यक उपायों की जानकारी देते हुए समय पर चिकित्सकीय उपचार लेने का आह्वान किया। गोष्ठी में चिकित्साधिकारी डॉ.संचित ने उपस्थित प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि सर्पदंश के बढ़ते मामलों को देखते हुए आमजन में जागरूकता बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो सबसे पहले घबराने के बजाय शांत रहना चाहिए और बिना समय गंवाए उसे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाना चाहिए। समय पर समुचित उपचार मिलने पर सर्पदंश से प्रभावित व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने विशेष रूप से लोगों को झाड़-फूंक और अंधविश्वास से दूर रहने की सलाह दी। डॉ.संचित ने कहा कि सर्पदंश के बाद उपचार में देरी स्थिति को गंभीर बना सकती है,इसलिए किसी भी प्रकार के घरेलू अथवा पारंपरिक उपचार में समय न गंवाकर व्यक्ति को तत्काल चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी है। डॉ.संचित ने बताया कि सांप के काटने के बाद प्रभावित स्थान पर दो दांतों के निशान दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा हाथ-पैर में सुन्नपन,काटे गए स्थान पर तेज दर्द,लालिमा,मतली एवं उल्टी,सांस लेने में परेशानी तथा अत्यधिक पसीना आने जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी लक्षण को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्पदंश की स्थिति में घाव को बर्फ या पानी से नहीं धोना चाहिए,रक्तस्राव रोकने के लिए अत्यधिक दबाव नहीं बनाना चाहिए, घाव को चाकू अथवा किसी धारदार वस्तु से काटना नहीं चाहिए और न ही मुंह से जहर चूसकर निकालने का प्रयास करना चाहिए। ऐसे उपाय नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपने घरों और आसपास के क्षेत्रों में विशेष साफ-सफाई रखने की अपील की। चिकित्साधिकारी ने कहा कि घरों के आसपास ईंट,पत्थर,लकड़ी अथवा अन्य सामग्री के अनावश्यक ढेर नहीं लगाने चाहिए। चूहों के बिलों को बंद रखने से भी सांपों के घरों के आसपास आने की संभावना कम की जा सकती है। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में सांप जहरीले नहीं होते,लेकिन किसी भी सर्पदंश की घटना को हल्के में नहीं लेना चाहिए। सांप की पहचान करने में समय गंवाने के बजाय प्रभावित व्यक्ति को शीघ्र अस्पताल पहुंचाना ही सबसे सुरक्षित कदम है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.मेघना असवाल ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सर्पदंश दिवस के अवसर पर जनपद के सभी ब्लॉकों में सामुदायिक स्तर पर विभिन्न जनजागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सर्पदंश से बचाव तथा आपात स्थिति में सही कदम उठाने के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने बताया कि सर्पदंश के मामलों में त्वरित उपचार सुनिश्चित करने तथा एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) इंजेक्शन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए सभी चिकित्सालयों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि सर्पदंश की किसी भी घटना में प्रभावित व्यक्ति को समय पर उपचार उपलब्ध हो और अनावश्यक देरी के कारण किसी की जान न जाए। गोष्ठी के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने लोगों से अपील की कि वे सर्पदंश को लेकर अंधविश्वास से बचें,प्राथमिक स्तर पर सही जानकारी रखें और किसी भी घटना की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सुविधा प्राप्त करें। इस अवसर पर ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक महेन्द्र कुकरेती,ब्लॉक लेखा प्रबंधक अजय प्रकाश चमोली,सोनाली पटवाल,नीरज डोभाल,सरोज,रुचि पंत सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मचारी एवं प्रतिभागी मौजूद रहे।