
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती सदियों से सेवा,त्याग,तपस्या और मानवीय संवेदनाओं की समृद्ध परंपरा की साक्षी रही है। यहां नर सेवा को नारायण सेवा का स्वरूप माना जाता है। इसी मानवीय भावना को आत्मसात करते हुए पदमा देवी अमर देव नौटियाल चैरिटेबल ट्रस्ट पिछले तीन दशकों से जरूरतमंदों, निर्धन परिवारों,मेधावी विद्यार्थियों और ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षण संस्थानों के लिए निरंतर सहयोग का संबल बना हुआ है। वर्ष 2026 में भी ट्रस्ट ने अपनी सेवा परंपरा को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा के क्षेत्र के साथ-साथ समाज के जरूरतमंद परिवारों और प्रतिभाशाली पाल्यों को आर्थिक सहायता प्रदान कर मानवीय संवेदना की एक अनुकरणीय मिसाल पेश की है। ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रो.राजाराम नौटियाल,उपाध्यक्ष डॉ.सुभाष नौटियाल तथा मुख्य ट्रस्टी एवं सचिव हरिराम नौटियाल के संयुक्त मार्गदर्शन में संचालित यह सेवा अभियान केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है,बल्कि अभावों के बीच संघर्ष कर रहे लोगों को आत्मविश्वास,स्वाभिमान और आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। इस पुनीत कार्य को प्रो.डॉ.राजेश नौटियाल एवं उनकी धर्मपत्नी रीना नौटियाल के सेवा-संकल्प और स्मृतियों से भी निरंतर प्रेरणा मिल रही है। शिक्षा के मंदिर को मिला सहयोग,जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचा सेवा का हाथ ट्रस्ट द्वारा शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम मानते हुए राजकीय इंटर कॉलेज सुमाड़ी विकासखंड खिर्सू जनपद पौड़ी गढ़वाल को 50,000 रुपए की सहयोग राशि प्रदान की गई। विद्यालयों को मिलने वाला इस प्रकार का सहयोग ग्रामीण क्षेत्रों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी क्रम में ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी एवं सचिव हरिराम नौटियाल ने अपनी धर्मपत्नी की पावन स्मृति में 10,000 रुपए की सहयोग राशि भेंट कर सेवा और स्मृति को समाजहित से जोड़ने का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। ट्रस्ट की ओर से समाज के विभिन्न क्षेत्रों में चिह्नित जरूरतमंदों एवं मेधावी प्रतिभाओं को भी आर्थिक सहायता प्रदान की गई। इनमें किरन देवी ग्राम पंचायत चमराड़ा को 25,000 रुपए,शकुंतला देवी ग्राम सुमाड़ी को 25,000 रुपए,दिव्या पन्त पाबों को 25,000 रुपए,बालक दास मुनि की रेती को 20,000 रुपए तथा सबिता रावत को 30,000 रुपए की आर्थिक सहायता शामिल है। इस अवसर पर ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रो.राजाराम नौटियाल ने भावुक होते हुए कहा कि आज जीवन में जो कुछ भी प्राप्त हुआ है,उसके पीछे पूज्य माता-पिता के आशीर्वाद,संस्कार और संघर्ष की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि स्व.डॉ.राजेश नौटियाल एवं रीना नौटियाल का सेवाभाव भी ट्रस्ट के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहा है। प्रो.नौटियाल ने कहा कि उनके पूज्य पिताजी ने अपना जीवन अभावों और संघर्षों के बीच व्यतीत किया और उनका सपना था कि गरीबी अथवा आर्थिक अभाव किसी कर्मठ और आगे बढ़ने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति की राह में बाधा न बने। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट उसी सोच को आगे बढ़ाते हुए जरूरतमंदों का हाथ थामने और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने का अवसर देने का विनम्र प्रयास कर रहा है। कार्यक्रम में राज्यपाल पुरस्कार से अलंकृत एवं अंतरराष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त डॉ.अखिलेश चन्द्र चमोला ने ट्रस्ट के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सुदूर ग्रामीण अंचलों में अभावों के बीच जीवन यापन कर रहे परिवारों की पीड़ा को समझना, उनके होनहार पाल्यों को प्रोत्साहित करना और विद्यालयों को सहयोग देना समाज की महत्वपूर्ण सेवा है। उन्होंने कहा कि आर्थिक संसाधनों के अभाव में अनेक प्रतिभाएं अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पातीं। ऐसे समय में यदि समाज के सक्षम लोग आगे बढ़कर इन प्रतिभाओं का हाथ थामें तो यह सहायता किसी एक परिवार तक सीमित नहीं रहती,बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को संवारने का माध्यम बनती है। उन्होंने नौटियाल परिवार की इस सेवा पहल को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। तीन दशक से जारी है सेवा की अविरल धारा पदमा देवी अमर देव नौटियाल चैरिटेबल ट्रस्ट की सेवा यात्रा को तीन दशक से अधिक समय बीत चुका है। इस दौरान ट्रस्ट द्वारा शिक्षा,आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और जरूरतमंद लोगों के सहयोग की दिशा में लगातार प्रयास किए जाते रहे हैं। ट्रस्ट की यह पहल उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण बन रही है,जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने जीवन को बेहतर बनाने और अपने बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए संघर्षरत हैं। देवभूमि की सेवा और संस्कारों की धरती पर ट्रस्ट द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान यह संदेश भी देता है कि समाज में बदलाव केवल बड़े संसाधनों से नहीं,बल्कि संवेदना,संकल्प और जरूरतमंद के समय पर थामे गए हाथ से भी संभव है। आर्थिक सहायता की यह पहल लाभार्थियों के लिए केवल धनराशि नहीं,बल्कि उनके संघर्ष के बीच विश्वास,सम्मान और आगे बढ़ने का नया हौसला है।