जीवीके परियोजना प्रभावितों के मुआवजे पर आर-पार के मूड में यूकेडी-सरस्वती देवी की गिरफ्तारी के विरोध में कंपनी कार्यालय घेरने का ऐलान

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। श्रीनगर की अलकनंदा घाटी में जीवीके जल विद्युत परियोजना से प्रभावित परिवारों को मुआवजा नहीं मिलने तथा अपने हक की आवाज उठाने के दौरान उत्तराखंड क्रांति दल

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। श्रीनगर की अलकनंदा घाटी में जीवीके जल विद्युत परियोजना से प्रभावित परिवारों को मुआवजा नहीं मिलने तथा अपने हक की आवाज उठाने के दौरान उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) की नेत्री सरस्वती देवी को जेल भेजे जाने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। परियोजना प्रभावितों के साथ कथित अन्याय और आंदोलनकारियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल ने कड़ा आक्रोश व्यक्त करते हुए सरकार और जीवीके कंपनी के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। गुरुवार को श्रीनगर गढ़वाल स्थित एक निजी होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में यूकेडी संरक्षक एवं देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र से दल के अधिकृत प्रत्याशी पूरण सिंह कठैत ने कहा कि जल विद्युत परियोजना के निर्माण और संचालन से प्रभावित परिवार लंबे समय से अपने अधिकारों एवं उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं,लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें संघर्ष के लिए विवश होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को अपनी जायज मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठाने और आंदोलन करने का अधिकार है। ऐसे में आंदोलन के दौरान यूकेडी नेत्री सरस्वती देवी को जेल भेजे जाने की कार्रवाई दुर्भाग्यपूर्ण है। पूरण सिंह कठैत ने कहा कि परियोजना प्रभावित परिवारों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना और उनका न्यायोचित समाधान करना सरकार तथा संबंधित कंपनी की जिम्मेदारी है। विकास परियोजनाओं का वास्तविक उद्देश्य क्षेत्र का विकास और स्थानीय लोगों का जीवन बेहतर बनाना होना चाहिए,लेकिन यदि परियोजनाओं से प्रभावित परिवार ही अपने अधिकारों के लिए वर्षों तक संघर्ष करते रहें,तो ऐसे विकास की सामाजिक जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड क्रांति दल प्रभावित परिवारों की आवाज को दबने नहीं देगा। यदि सरकार और जीवीके कंपनी ने शीघ्र सकारात्मक पहल करते हुए प्रभावितों की मुआवजे संबंधी मांगों का समाधान नहीं किया,तो दल व्यापक स्तर पर आंदोलन करेगा। यूकेडी संरक्षक ने आंदोलन की आगामी रणनीति का खुलासा करते हुए बताया कि दीपावली से पहले अथवा उसके बाद दल का सैनिक प्रकोष्ठ जीवीके कंपनी के कार्यालय पर प्रदर्शन करेगा। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन परियोजना प्रभावितों को न्याय दिलाने और उनकी लंबित मांगों को प्रमुखता से उठाने के उद्देश्य से आयोजित किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इसके बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो उत्तराखंड क्रांति दल आंदोलन को और व्यापक तथा उग्र रूप देने के लिए बाध्य होगा। इस अवसर पर यूकेडी युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय प्रवक्ता अरुण नेगी ने कहा कि सरस्वती देवी को जेल भेजे जाने की कार्रवाई को दल स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि जीवीके परियोजना प्रभावित लंबे समय से मुआवजे की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं,लेकिन उनकी समस्याओं पर ठोस कार्रवाई करने के बजाय आंदोलनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रभावितों की आवाज उठाना कोई अपराध नहीं है और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने वालों के साथ खड़े रहना दल अपनी जिम्मेदारी समझता है। अरुण नेगी ने कहा कि उत्तराखंड की जल,जंगल और जमीन से जुड़ी परियोजनाओं में स्थानीय लोगों के हितों और अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों ने विकास परियोजनाओं के लिए अनेक प्रकार के त्याग और कठिनाइयां झेली हैं। ऐसे में प्रभावित परिवारों को उनका न्यायोचित अधिकार और मुआवजा मिलना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। पत्रकार वार्ता के माध्यम से यूकेडी ने स्पष्ट संदेश दिया कि जीवीके परियोजना प्रभावितों के मुआवजे का मामला केवल कुछ परिवारों की समस्या नहीं,बल्कि स्थानीय लोगों के अधिकार,पुनर्वास और न्याय से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। दल ने सरकार से मांग की कि प्रभावितों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए तथा आंदोलन के दौरान गिरफ्तार की गई यूकेडी नेत्री सरस्वती देवी के प्रकरण में भी उचित कार्रवाई की जाए। पत्रकार वार्ता में गीता देवी,सोनू सहित यूकेडी के अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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