देवभूमि में शुरू होगा आध्यात्मिक महायात्रा का शुभारंभ-7 अप्रैल गाडू घड़ा यात्रा,23 अप्रैल को खुलेंगे श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। हिमालय की गोद में बसे विश्वप्रसिद्ध तीर्थ श्री बदरीनाथ धाम की पावन यात्रा वर्ष 2026 के लिए एक बार फिर आध्यात्मिक उल्लास और श्रद्धा के साथ प्रारंभ

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। हिमालय की गोद में बसे विश्वप्रसिद्ध तीर्थ श्री बदरीनाथ धाम की पावन यात्रा वर्ष 2026 के लिए एक बार फिर आध्यात्मिक उल्लास और श्रद्धा के साथ प्रारंभ होने जा रही है। परंपरा,संस्कृति और आस्था का अद्भुत संगम मानी जाने वाली गाडू घड़ा (तेल कलश) यात्रा 7 अप्रैल से विधिवत प्रारंभ होगी जो देवभूमि के जनमानस में भक्ति की नई ऊर्जा का संचार करेगी। श्री बद्रीनाथ डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत एवं श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के संयुक्त तत्वावधान में यह पावन यात्रा मंगलवार 7 अप्रैल को नरेंद्र नगर राजदरबार से प्रारंभ होगी। राजपरंपरा के अनुसार इस यात्रा का शुभारंभ महाराजा मनुजयेंद्र शाह द्वारा किया जाएगा,जिसमें राजपरिवार की गरिमामयी उपस्थिति इसे और भी दिव्य स्वरूप प्रदान करेगी। राजमहल में महारानी मालाराज्य लक्ष्मी शाह एवं सुहागिन महिलाएं तिलों के पवित्र तेल को विधिवत तैयार कर गाडू घड़ा (तेल कलश) को डिमरी पंचायत को सौंपेंगी। यह तेल भगवान बद्रीविशाल के अभिषेक में प्रयोग किया जाता है,जिसकी धार्मिक महत्ता अत्यंत विशिष्ट मानी जाती है। उक्त यात्रा 7 अप्रैल की रात्रि में ऋषिकेश स्थित मंदिर समिति की चेला चेतराम धर्मशाला पहुंचेगी,जहां रात्रि विश्राम होगा। 8 अप्रैल की प्रात-श्रद्धालु गाडू घड़ा के दर्शन,पूजा-अर्चना एवं प्रसाद ग्रहण करेंगे। इसके पश्चात यह यात्रा लक्ष्मण झूला होते हुए श्रीनगर गढ़वाल की ओर अग्रसर होगी। इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी भी दर्शन के लिए उपस्थित रहेंगे। धार्मिक परंपराओं के अनुसार यह पवित्र तेल कलश कुछ समय के लिए डिमरी तीर्थ पुरोहितों के मूल गांव डिम्मर स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में विराजमान रहेगा,जहां प्रतिदिन विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके बाद यात्रा क्रमश-19 अप्रैल को पाखी गांव,20 अप्रैल को श्री नृसिंह मंदिर एवं रविग्राम,21 अप्रैल को पांडुकेश्वर में रात्रि विश्राम करते हुए 22 अप्रैल की सायंकाल तक श्री बदरीनाथ धाम पहुंचेगी। अंततः समस्त धार्मिक अनुष्ठानों के उपरांत गुरुवार 23 अप्रैल को प्रात-6 बजकर 15 मिनट पर विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्री बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। यह क्षण न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश के श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पावन और प्रतीक्षित होता है। इस अवसर पर डिमरी पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी,उपाध्यक्ष भास्कर डिमरी,सदस्य राजेंद्र डिमरी,सचिव भगवती डिमरी,पूर्व अध्यक्ष विनोद डिमरी सहित मंदिर समिति के अनेक पदाधिकारी एवं श्रद्धालुजन उपस्थित रहेंगे। आस्था,परंपरा और सनातन संस्कृति का यह दिव्य संगम एक बार फिर देवभूमि में आध्यात्मिक चेतना का संचार करेगा,जहां हर कदम पर भक्ति,हर श्वास में श्रद्धा और हर मन में भगवान बदरीविशाल के दर्शन की अभिलाषा जीवंत होगी।

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