अलकनंदा की तलहटी में साकार हुआ गोकुल-श्रीकृष्ण की भव्य झांकी से भक्तिमय हुआ श्रीनगर

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती अलकनंदा की कल-कल धारा और श्रीक्षेत्र श्रीनगर की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति से सराबोर नजर आई।

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती अलकनंदा की कल-कल धारा और श्रीक्षेत्र श्रीनगर की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति से सराबोर नजर आई। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भागीरथी कला संगम सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था के तत्वावधान में नगर में भव्य एवं आकर्षक कृष्ण जन्माष्टमी झांकी निकाली गई। झांकी में धार्मिक आस्था,लोक संस्कृति,बाल प्रतिभा और आध्यात्मिक भावनाओं का ऐसा सुंदर संगम देखने को मिला कि नगरवासी देर तक मंत्रमुग्ध होकर कृष्ण लीलाओं का आनंद लेते रहे। झांकी का शुभारंभ वीर चंद्र सिंह गढ़वाली मार्ग से हुआ,जो नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए गणेश बाजार,गोला बाजार सहित विभिन्न क्षेत्रों से गुजरी और अंत में शिशु मंदिर विद्यालय परिसर पहुंचकर संपन्न हुई। झांकी के दौरान पूरा नगर राधे-राधे,जय श्रीकृष्ण और नंद के घर आनंद भयो जैसे भक्तिमय जयघोषों से गूंज उठा। भागीरथी कला संगम के कलाकारों एवं नन्हे-मुन्ने बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर उनकी बाल लीलाओं तक की कथा को झांकियों और नृत्य प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत कर दिया। झांकी में वासुदेव और देवकी को कारागार में जंजीरों से जकड़े हुए,भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य जन्म तथा इसके पश्चात माता यशोदा के स्नेहिल वात्सल्य को अत्यंत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। झांकी में कृष्ण जन्म के साथ ही वातावरण में भक्ति और उल्लास का ऐसा संचार हुआ मानो श्रीनगर में स्वयं गोकुल उतर आया हो। झांकी का सबसे आकर्षक एवं रोमांचकारी प्रसंग कालिया नाग मर्दन रहा। ग्वाल-बालों और गोपियों के साथ कृष्ण लीला के दौरान यमुना में गेंद गिरने और भगवान श्रीकृष्ण द्वारा यमुना में छलांग लगाने के प्रसंग को बच्चों ने अत्यंत प्रभावशाली नृत्य एवं अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया। कालिया नाग के साथ भगवान श्रीकृष्ण के द्वंद्व युद्ध और उसके फनों पर भगवान कृष्ण के मनमोहक नृत्य की प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। नन्हे कलाकारों के चेहरे पर कृष्ण भक्ति,अभिनय में आत्मविश्वास और नृत्य में दिखाई दी ऊर्जा ने हर किसी का मन जीत लिया। विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका निभा रहे नन्हे कलाकार के मनमोहक नृत्य ने खूब तालियां बटोरीं। बच्चों की मासूमियत,उनकी प्रतिभा और मंचन की सुंदरता ने झांकी को यादगार बना दिया। जन्माष्टमी की इस झांकी की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें बच्चों ने पूरे उत्साह और समर्पण के साथ भागीदारी की। धार्मिक प्रसंगों को नृत्य,अभिनय और झांकी के माध्यम से प्रस्तुत कर इन बाल कलाकारों ने यह संदेश भी दिया कि हमारी आने वाली पीढ़ी अपनी सनातन संस्कृति,परंपराओं और धार्मिक विरासत से जुड़कर समाज को नई दिशा दे सकती है। बच्चों को तैयार करने वाले प्रशिक्षकों एवं उन अभिभावकों का योगदान भी सराहनीय रहा,जिन्होंने अपने बच्चों को नियमित अभ्यास करवाने के साथ पूरे कार्यक्रम के दौरान उनका उत्साह बढ़ाया और आयोजन समिति को हर स्तर पर सहयोग प्रदान किया। भागीरथी कला संगम के पदाधिकारियों एवं वरिष्ठ सदस्यों ने बताया कि इस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए संस्था के सदस्यों,कलाकारों,बच्चों,अभिभावकों तथा नृत्य अभ्यास कराने वाले प्रशिक्षकों ने कई दिनों तक अथक मेहनत की। निरंतर अभ्यास,बेहतर समन्वय और सामूहिक प्रयासों का परिणाम झांकी के दौरान साफ दिखाई दिया। संस्था की ओर से सभी पदाधिकारियों,वरिष्ठ सदस्यों,कलाकारों,बच्चों और अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा गया कि सभी के सहयोग से ही यह धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन भव्य स्वरूप ले सका। झांकी के दौरान मौसम भी मानो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में सहभागी बन गया। आयोजन से जुड़े सदस्यों ने भावुक होकर कहा कि भगवान इंद्र की कृपा रही कि झांकी के संपन्न होने तक बारिश थमी रही। आयोजकों ने इसे भगवान श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा,आस्था और विश्वास का प्रतिफल बताया। देवभूमि की धरती पर धर्म और संस्कृति के इस सुंदर मिलन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि पर्व और उत्सव केवल मनोरंजन के अवसर नहीं,बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों,संस्कारों और सनातन परंपराओं से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी हैं। भागीरथी कला संगम द्वारा आयोजित जन्माष्टमी की भव्य झांकी ने श्रीनगर की सांस्कृतिक पहचान को और समृद्ध किया। अलकनंदा की तलहटी में बसे श्रीक्षेत्र श्रीनगर में जब नन्हे-नन्हे कदमों से कृष्ण लीला साकार हुई तो पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। आयोजकों ने भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना करते हुए कहा कि श्रीहरि नारायण की कृपा सभी भक्तों पर बनी रहे,प्रत्येक परिवार में सुख-शांति,समृद्धि और खुशहाली आए तथा समाज में प्रेम,सद्भाव और भाईचारे की भावना मजबूत हो।

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