कीर्तिनगर के अंतिम गांव टोला में कुदरत का कहर-सड़क बंद,विद्यालय भवन और घरों पर मंडराया भूस्खलन का खतरा

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी कीर्तिनगर/श्रीनगर गढ़वाल। कीर्तिनगर विकासखंड के दूरस्थ एवं डागर पट्टी के अंतिम गांव टोला में बारिश ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गांव का सड़क संपर्क पिछले चार दिनों

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

कीर्तिनगर/श्रीनगर गढ़वाल। कीर्तिनगर विकासखंड के दूरस्थ एवं डागर पट्टी के अंतिम गांव टोला में बारिश ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गांव का सड़क संपर्क पिछले चार दिनों से बाधित है। सड़क पर मलबा,बोल्डर और पेड़ आने के साथ ही कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ है। वहीं ग्वाड़ गांव के प्राथमिक विद्यालय के पुश्ते का बड़ा हिस्सा टूटने से विद्यालय भवन के साथ ही नीचे स्थित घरों पर भी खतरा मंडरा रहा है। ऐसे हालात में ग्रामीण दहशत के बीच रात गुजारने को मजबूर हैं। टोला गांव में इसी वर्ष जनवरी में सड़क पहुंची थी। सड़क का अभी पहला चरण ही पूरा हुआ है और शुरुआती दौर में ही इसकी स्थिति बारिश के दौरान चिंता का कारण बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि हल्की बारिश में भी सड़क पर मलबा और पत्थर आने लगते हैं,जबकि भारी बारिश के बाद स्थिति और गंभीर हो जाती है। छोटे-मोटे मलबे को ग्रामीण स्वयं श्रमदान कर हटाते रहे हैं,लेकिन इस बार तीन अलग-अलग स्थानों पर सड़क बुरी तरह बाधित होने के कारण समस्या गंभीर हो गई है। भारी बारिश के कारण ग्वाड़ गांव के प्राथमिक विद्यालय के पुश्ते का बड़ा हिस्सा ढहकर सड़क पर आ गया। इससे विद्यालय भवन की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है। इतना ही नहीं,विद्यालय के नीचे स्थित परिवारों के मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है। भवन स्वामी कमल सिंह ने बताया कि पुश्ता टूटने के बाद से परिवारों में भय का माहौल है। उन्होंने कहा कि रात में भी जागकर रहना पड़ रहा है। उन्होंने विभाग से मांग की कि दो-तीन परिवारों की सुरक्षा को देखते हुए क्षतिग्रस्त पुश्ते का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि विद्यालय भवन के समीप जमा मलबे को हटाने में भी सावधानी बरतनी पड़ रही है। ग्रामीणों के अनुसार यदि मलबा हटाने के दौरान पुश्ते पर दबाव पड़ा तो बचा हुआ हिस्सा भी नीचे आ सकता है और इससे विद्यालय भवन को नुकसान पहुंचने की आशंका है। यही कारण है कि विभाग सड़क खोलने और पुश्ते को सुरक्षित रखने के बीच रास्ता तलाश रहा है। टोला गांव के विजयपाल सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि तीन स्थानों पर सड़क बाधित होने से गांव का संपर्क लगभग कट गया है। जरूरी काम से बाहर निकलने वाले लोगों को भारी बारिश के बीच लंबी दूरी पैदल तय कर ग्वाड़ गांव तक पहुंचना पड़ रहा है,जहां से वाहन मिल पा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि रास्ते में लगातार पत्थर गिरने का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा जंगली क्षेत्र होने के कारण बाघ का भय भी ग्रामीणों को परेशान कर रहा है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से तत्काल सड़क खोलने की मांग की है। बारिश के दौरान टोला गांव की बिजली लाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण गांव की पंपिंग योजना भी नहीं चल सकी,जिससे कई दिनों तक पेयजल आपूर्ति प्रभावित रही। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली और सड़क दोनों के बाधित होने से गांव में मुश्किलें और बढ़ गईं। बिजली विभाग की एसडीओ प्रियंका नेगी ने बताया कि क्षतिग्रस्त विद्युत लाइन को ठीक करने के लिए कर्मचारियों की टीम मौके पर भेजी गई है। शीघ्र ही विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। लोक निर्माण विभाग के अवर अभियंता नदीम ने बताया कि विभाग मशीन भेजकर बाधित सड़क को खोलना चाहता था,लेकिन ग्रामीणों की ओर से पहले क्षतिग्रस्त पुश्ते का निर्माण कराने की बात कही गई है। उनका कहना है कि सड़क की खुदाई या मलबा हटाने के दौरान पुश्ते का बचा हुआ हिस्सा भी नीचे आने की आशंका है। अवर अभियंता के अनुसार विभाग की प्राथमिकता फिलहाल सड़क को खोलना है। इसके बाद पुश्ते के निर्माण की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि पुश्ते के निर्माण के लिए निर्धारित प्रक्रिया और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। इधर कुछ ग्रामीणों ने सड़क और पुश्तों के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर ठेकेदारों के माध्यम से कराए जाने वाले कार्यों की गुणवत्ता कई बार संतोषजनक नहीं रहती। ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय स्तर की जान-पहचान और भाई-भतीजावाद के कारण निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर खुलकर सवाल उठाना भी मुश्किल होता है। ग्रामीणों ने कहा कि गांव की सड़क और पुश्तों से संबंधित निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि भविष्य में गांव में होने वाले महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों की निगरानी कड़ाई से की जाए और आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय ठेकेदारों के बजाय अनुभवी बाहरी एजेंसियों से कार्य कराया जाए। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन मामले को महज सड़क खोलने तक सीमित न रखे,बल्कि विद्यालय भवन और नीचे बसे परिवारों की सुरक्षा को देखते हुए क्षतिग्रस्त पुश्ते का स्थायी समाधान भी तत्काल सुनिश्चित करे।

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