तरुली में आखिरकार पिंजरे में कैद हुआ आदमखोर गुलदार-बीना देवी मौत के बाद दहशत में जी रहे ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड खिर्सू के तरुली गांव में लंबे समय से दहशत का पर्याय बने गुलदार के पिंजरे में कैद होने से ग्रामीणों ने बड़ी

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड खिर्सू के तरुली गांव में लंबे समय से दहशत का पर्याय बने गुलदार के पिंजरे में कैद होने से ग्रामीणों ने बड़ी राहत की सांस ली है। बीती रात वन विभाग की टीम को उस समय महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी,जब गांव में लगाए गए पिंजरे में करीब 4 से 5 वर्ष आयु का एक नर गुलदार कैद हो गया। गुलदार के पकड़े जाने की खबर मिलते ही क्षेत्र के ग्रामीणों ने राहत महसूस की है। हालांकि,ग्रामीणों के मन में अभी भी वन्यजीवों के हमले की आशंका बनी हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक से प्राप्त आदेशों के अनुपालन में वन विभाग की टीम ने तरुली गांव में गुलदार को पकड़ने के लिए अभियान चलाया हुआ था। लगातार निगरानी और प्रयासों के बाद आखिरकार बीती रात करीब 8:45 बजे गुलदार पिंजरे में कैद हो गया। पकड़े गए गुलदार को वन विभाग की टीम तत्काल नागदेव रेंज कार्यालय लेकर पहुंची,जहां विशेषज्ञों की देखरेख में उसका चिकित्सकीय परीक्षण किया जा रहा है। स्वास्थ्य परीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि बीते 9 अक्टूबर को तरुली गांव में गुलदार ने हमला कर ग्रामीण महिला बीना देवी की जान ले ली थी। इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल पैदा हो गया था। ग्रामीणों में अपने परिवारों,बच्चों और मवेशियों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्याप्त थी। ग्रामीण लगातार वन विभाग से गुलदार को पकड़ने की मांग कर रहे थे। महिला की मौत के बाद वन विभाग ने क्षेत्र में पिंजरा लगाने के साथ ही गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए निगरानी अभियान तेज किया था। इसके बावजूद गुलदार लंबे समय तक पिंजरे में नहीं आया और घटनास्थल के आसपास भी उसकी गतिविधियां दिखाई नहीं दे रही थीं। इस कारण वन विभाग की टीम के सामने उसे पकड़ना चुनौती बना हुआ था। वन विभाग की टीम लगातार क्षेत्र में निगरानी और आवश्यक कार्रवाई में जुटी हुई थी। आखिरकार बीती रात गुलदार के पिंजरे में कैद होने के साथ ही विभाग को बड़ी सफलता मिली। गुलदार के पकड़े जाने से तरुली सहित आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने राहत महसूस की है। लंबे समय से भय के साये में जी रहे ग्रामीणों को उम्मीद है कि अब क्षेत्र में जनजीवन सामान्य हो सकेगा। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि गुलदार के पकड़े जाने के बाद भी क्षेत्र में नियमित गश्त,निगरानी और सतर्कता अभियान जारी रहेगा। ग्रामीणों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए वन विभाग की टीमें क्षेत्र की परिस्थितियों पर नजर बनाए रखेंगी। यह घटना एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर चुनौती को सामने लाती है। जंगलों से सटे गांवों में रहने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए वन विभाग की सक्रियता,समयबद्ध कार्रवाई और निरंतर निगरानी बेहद आवश्यक है। फिलहाल तरुली गांव में गुलदार के पकड़े जाने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है और सभी की निगाहें वन विभाग की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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