बेस अस्पताल श्रीनगर के मरीज सहायता केंद्र ने पूरा किया एक वर्ष-1050 से अधिक समस्याओं का किया समाधान

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की देवभूमि के प्रमुख चिकित्सा केंद्रों में शामिल हेमवती नंदन बहुगुणा राजकीय बेस चिकित्सालय श्रीनगर में मरीजों और उनके तीमारदारों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की देवभूमि के प्रमुख चिकित्सा केंद्रों में शामिल हेमवती नंदन बहुगुणा राजकीय बेस चिकित्सालय श्रीनगर में मरीजों और उनके तीमारदारों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में स्थापित जनसंपर्क एवं मरीज सहायता केंद्र ने अपने सफल संचालन का एक वर्ष पूर्ण कर लिया है। बीते एक वर्ष में केंद्र द्वारा 1050 से अधिक मामलों का समाधान किया जाना इसकी उपयोगिता और मरीजों की समस्याओं के त्वरित निराकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को दर्शाता है। अस्पताल में उपचार के दौरान आने वाली परेशानियों को सुनने,संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए समन्वय स्थापित करने में यह केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जनसंपर्क एवं मरीज सहायता केंद्र की स्थापना 10 अक्टूबर 2025 को तत्कालीन विभागीय सचिव आर.राजेश द्वारा तत्कालीन प्राचार्य आशुतोष सयाना की पहल पर की गई थी। केंद्र की शुरुआत के समय ही इसे चौबीसों घंटे,सातों दिन संचालित करने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए चौबीस घंटे दूरभाष सेवा की व्यवस्था भी की गई,ताकि मरीजों और उनके तीमारदारों को किसी भी समय अपनी समस्याएं बताने तथा आवश्यक सहायता प्राप्त करने में परेशानी न हो। शुरुआत में दो जनसंपर्क अधिकारियों के साथ इस व्यवस्था को प्रारंभ किया गया था। बाद में मरीजों की जरूरतों और केंद्र की कार्यप्रणाली को ध्यान में रखते हुए इसमें अन्य अधिकारियों को भी जोड़ा गया। बेस चिकित्सालय के वर्तमान प्राचार्य डॉ.सीएमएस रावत के कार्यकाल में भी मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और सहायता केंद्र की व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण बनी हुई है। वर्तमान में नौ जनसंपर्क अधिकारी निर्धारित कार्यपाली के आधार पर चौबीसों घंटे अपनी सेवाएं दे रहे हैं। बेस चिकित्सालय के जनसंपर्क एवं मरीज सहायता केंद्र में अरुण बडोनी प्रभारी,जतिन सिंह,पंकज नौटियाल,योगेश मणपाल,राहुल पाल,राहुल कुकरेती,अनुज सिंह,डॉ.नरेश मिश्रा और सुरजीत सिंह मरीजों तथा उनके तीमारदारों की सहायता के लिए कार्यरत हैं। इन नौ जनसंपर्क अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल मरीजों की शिकायतें सुनने तक सीमित नहीं है,बल्कि अस्पताल की विभिन्न व्यवस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित कर समस्याओं का समाधान कराने में सहयोग देना भी है। निर्धारित कार्यपाली के माध्यम से केंद्र को चौबीसों घंटे सक्रिय रखने का प्रयास किया जाता है,जिससे मरीजों और उनके परिजनों को आवश्यकता के समय सहायता मिल सके। एक वर्ष में 1050 से अधिक मामलों का निस्तारण केंद्र की एक वर्ष की उपलब्धियों में 1050 से अधिक मामलों का समाधान विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कई समस्याओं का निराकरण लगभग एक घंटे के भीतर करने का प्रयास किया जाता है। इससे मरीजों और उनके तीमारदारों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए विभिन्न विभागों के चक्कर लगाने से राहत मिलती है। अस्पताल में भर्ती मरीजों को कभी उपचार संबंधी जानकारी की जरूरत होती है,तो कभी व्हीलचेयर,स्ट्रेचर,एम्बुलेंस अथवा अन्य उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में सहायता की आवश्यकता पड़ती है। ऐसी परिस्थितियों में जनसंपर्क अधिकारी मरीजों की जरूरतों को समझकर संबंधित विभागों और अधिकारियों से संपर्क स्थापित करते हैं,ताकि उन्हें समय पर आवश्यक मदद मिल सके। मरीज सहायता केंद्र की जिम्मेदारियों में आपातकालीन परिस्थितियों में एम्बुलेंस की व्यवस्था कराने में सहयोग,असहाय मरीजों के लिए व्हीलचेयर एवं स्ट्रेचर जैसी सुविधाओं को उपलब्ध कराने में समन्वय तथा अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा सेवाओं की जानकारी देना शामिल है। इसके साथ ही मरीजों और चिकित्सकों के बीच संवाद स्थापित करना,समस्याओं को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना तथा उनके समाधान के लिए आवश्यक पहल करना भी केंद्र की कार्यप्रणाली का हिस्सा है। अस्पताल में दूर-दराज के पर्वतीय क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में उन्हें सही जानकारी और समय पर सहायता मिलना बेहद महत्वपूर्ण है। जनसंपर्क केंद्र इस आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए सहायता का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। बेस चिकित्सालय में मरीज सहायता केंद्र द्वारा खोया-पाया व्यवस्था का संचालन भी किया जाता है। अस्पताल में किसी मरीज अथवा तीमारदार का सामान खो जाने या किसी वस्तु के मिलने की स्थिति में केंद्र के माध्यम से संबंधित व्यक्ति तक उसे पहुंचाने में सहायता की जाती है। अस्पताल जैसे व्यस्त परिसर में यह व्यवस्था भी मरीजों और उनके परिजनों के लिए उपयोगी साबित होती है। स्वास्थ्य सेवाओं में चिकित्सकीय उपचार के साथ-साथ संवेदनशील व्यवहार,सही जानकारी और समय पर सहायता का भी विशेष महत्व है। मरीजों की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान के लिए एक समर्पित केंद्र की स्थापना से अस्पताल प्रशासन तथा मरीजों के बीच संवाद को व्यवस्थित करने में मदद मिलती है। जनसंपर्क एवं मरीज सहायता केंद्र ने अपने पहले वर्ष में 1050 से अधिक मामलों का समाधान कर अपनी उपयोगिता को सामने रखा है। नौ जनसंपर्क अधिकारियों की तैनाती और चौबीसों घंटे सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था इस पहल को निरंतर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण है। बेस चिकित्सालय श्रीनगर का जनसंपर्क एवं मरीज सहायता केंद्र मरीजों को राहत पहुंचाने,उनकी समस्याओं के समाधान में सहयोग देने और अस्पताल की सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उम्मीद है कि वर्तमान प्राचार्य डॉ.सीएमएस रावत के मार्गदर्शन में भी यह केंद्र आने वाले समय में इसी सेवा भावना,तत्परता और समन्वय के साथ कार्य करते हुए मरीजों के विश्वास को और मजबूत करेगा।

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