सूखते जलस्रोतों को संजीवनी की तैयारी-15 सितंबर से मिशन मोड में जोड़ेंगे सारा-मनरेगा के काम

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पहाड़ों में लगातार सूखते जलस्रोतों,वर्षा आधारित नदियों और गदेरों के संरक्षण तथा पुनर्जीवन को लेकर जिला प्रशासन ने अब कार्यों में तेजी लाने की तैयारी शुरू कर

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पहाड़ों में लगातार सूखते जलस्रोतों,वर्षा आधारित नदियों और गदेरों के संरक्षण तथा पुनर्जीवन को लेकर जिला प्रशासन ने अब कार्यों में तेजी लाने की तैयारी शुरू कर दी है। जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए 15 सितंबर से सारा स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवनेशन अथॉरिटी योजना के अंतर्गत मनरेगा से जुड़े कार्य मिशन मोड में संचालित किए जाएंगे। मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी ने शनिवार को विकास भवन सभागार में सारा योजना एवं एक जनपद-एक नदी कार्यक्रम की समीक्षा बैठक लेते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जल संरक्षण और स्रोत संवर्धन से जुड़े कार्यों को केवल कागजी प्रगति तक सीमित न रखा जाए,बल्कि उनका वास्तविक लाभ धरातल पर दिखाई देना चाहिए। उन्होंने विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर विशेष जोर दिया। बैठक में एक जनपद-एक नदी कार्यक्रम के तहत विभिन्न विभागों के बीच कन्वर्जेंस की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने वन विभाग,विकासखंड पाबों एवं थलीसैंण से संशोधित कार्ययोजना शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने पाबों एवं थलीसैंण के खंड विकास अधिकारियों को 6 सितंबर तक संशोधित कार्ययोजना प्रस्तुत करने को कहा। सीडीओ ने अधिकारियों से कहा कि संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्यों की प्राथमिकता तय करें और जहां भी किसी स्तर पर कार्य में बाधा आ रही है,उसका तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए। मुख्य विकास अधिकारी ने वर्षा आधारित नदियों,गदेरों,जलधाराओं और प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण के लिए तैयार उपचार योजनाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में जल संकट से निपटने के लिए प्राकृतिक जलस्रोतों का संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण से जुड़े छोटे-छोटे कार्य भले ही तत्काल बड़े दिखाई न दें,लेकिन इनका दीर्घकाल में व्यापक और स्थायी प्रभाव पड़ता है। इसलिए प्रत्येक कार्य में गुणवत्ता,उपयोगिता और धरातलीय प्रभाव को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। सीडीओ ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जलस्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए तैयार योजनाओं को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप क्रियान्वित किया जाए,ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल एवं सिंचाई की संभावनाओं को मजबूत किया जा सके। मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी ने कहा कि सारा योजना के अंतर्गत मनरेगा मद से कराए जाने वाले सभी संबंधित कार्य 15 सितंबर से मिशन मोड में संचालित किए जाएं। इसका उद्देश्य निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के साथ जल संरक्षण के कार्यों को गति देना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं की प्रगति का नियमित अनुश्रवण किया जाए तथा मासिक प्रगति प्रतिवेदन (एमपीआर) समय से सारा कार्यालय को उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि प्रगति रिपोर्ट में केवल आंकड़े दर्ज करने के बजाय कार्य की वास्तविक स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाया जाए। सीडीओ ने सारा एवं मनरेगा के तहत स्वीकृत कार्यों को समानांतर रूप से पूरा करने तथा पूर्ण हो चुके कार्यों के उपयोगिता प्रमाण पत्र समय से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण से जुड़े कार्यों की नियमित निगरानी जरूरी है,क्योंकि इन योजनाओं का उद्देश्य केवल बजट का उपयोग करना नहीं,बल्कि आने वाले वर्षों के लिए जल स्रोतों को सुरक्षित और मजबूत बनाना है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पूर्ण हो चुके कार्यों की उपयोगिता और उनके प्रभाव का भी समय-समय पर आकलन किया जाए। बैठक में सीडीओ ने कहा कि पहाड़ की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन का बड़ा आधार प्राकृतिक जलस्रोत हैं। इसलिए स्रोतों का संरक्षण,नदी-गदेरों का पुनर्जीवन और वर्षाजल का बेहतर प्रबंधन प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि जल संरक्षण के कार्यों को आपसी तालमेल के साथ आगे बढ़ाएं और योजनाओं का लाभ अधिकतम ग्रामीण आबादी तक पहुंचाना सुनिश्चित करे। बैठक में उपनिदेशक जलागम अजय कुमार,जिला विकास अधिकारी रमेश चंद,उप प्रभागीय वनाधिकारी आयशा बिष्ट एवं राखी जुयाल,जिला उद्यान अधिकारी मनोरंजन भंडारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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