रानीहाट राजराजेश्वरी मंदिर का संवरेगा स्वरुप-98.90 लाख से विकास कार्य शुरू,प्राचीन धरोहर को छेड़े बिना बढ़ेगी श्रद्धालुओं की सुविधाएं

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी कीर्तिनगर/श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले विकासखंड कीर्तिनगर के रानीहाट स्थित प्राचीन राजराजेश्वरी मंदिर के दिन अब संवरने जा रहे हैं।

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

कीर्तिनगर/श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले विकासखंड कीर्तिनगर के रानीहाट स्थित प्राचीन राजराजेश्वरी मंदिर के दिन अब संवरने जा रहे हैं। लंबे समय से मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण एवं श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास की उठ रही मांग आखिरकार धरातल पर उतर गई है। रविवार को देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी ने मुख्यमंत्री घोषणा के तहत स्वीकृत 98 लाख 90 हजार रुपये की लागत से होने वाले मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण एवं विकास कार्यों का विधिवत शिलान्यास किया। मंदिर परिसर में विकास कार्य शुरू होने से क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है। खास बात यह है कि मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के संरक्षण में होने के कारण इसके प्राचीन एवं मूल स्वरूप से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। विकास कार्यों को मंदिर की ऐतिहासिक विरासत और पुरातात्विक महत्व को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने के उद्देश्य से किया जाएगा। रानीहाट का राजराजेश्वरी मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं,बल्कि गढ़वाल की समृद्ध ऐतिहासिक एवं स्थापत्य विरासत का भी महत्वपूर्ण प्रतीक है। करीब आठवीं शताब्दी का यह प्राचीन मंदिर कत्यूरी स्थापत्य शैली में निर्मित बताया जाता है। जनआस्था में मंदिर का संबंध पंवार वंश की कुलदेवी से भी जोड़ा जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार प्राचीन समय में यहां रानियों का बाजार लगता था,जिसके चलते इस स्थान का नाम रानीहाट पड़ा। इतिहास,लोकविश्वास और धार्मिक आस्था से जुड़ी इस धरोहर को लंबे समय से संरक्षण एवं बेहतर व्यवस्थाओं की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। स्थानीय लोगों द्वारा वर्ष 2003 से मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और सुविधाओं के विकास की मांग लगातार उठाई जाती रही। रखरखाव के अभाव में समय के साथ मंदिर परिसर की स्थिति प्रभावित हुई और मंदिर की दीवारों तक पर पेड़-पौधे उग आए थे। वर्ष 1989 में मंदिर के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन आने के बाद इसके संरक्षण की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग के पास है। इन कार्यों से बदलेगी मंदिर परिसर की तस्वीर 98.90 लाख रुपये की स्वीकृत धनराशि से मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की सुविधा के लिए कई महत्वपूर्ण विकास कार्य किए जाएंगे। योजना के तहत बाहरी गर्भगृह के आवरण की रेट्रोफिटिंग,महंत आवास,अनुष्ठान हॉल और यात्री डोरमेट्री भवन का निर्माण प्रस्तावित है। इसके साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शौचालय निर्माण,मंदिर प्रवेश द्वार का सौंदर्यीकरण,क्षतिग्रस्त चारदीवारी का पुनर्निर्माण,पाथवे का विकास तथा परिसर में प्रकाश व्यवस्था जैसे कार्य भी किए जाएंगे। इन व्यवस्थाओं के पूर्ण होने के बाद मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को पहले की अपेक्षा कहीं बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी ने कहा कि रानीहाट का राजराजेश्वरी मंदिर क्षेत्र की गहरी धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण केंद्र है। ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही मांग को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा गया,जिसके बाद मंदिर परिसर के विकास के लिए योजना को स्वीकृति मिली। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर की ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्ता को देखते हुए इसके मूल ढांचे के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। विकास कार्य इस प्रकार किए जाएंगे कि मंदिर की प्राचीन पहचान और स्थापत्य विरासत सुरक्षित रहने के साथ श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं भी मिल सकें। विधायक ने कहा कि मंदिर परिसर के व्यवस्थित विकास से क्षेत्र में धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है। इससे रानीहाट को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। लंबे संघर्ष के बाद पूरी हुई क्षेत्रवासियों की मांग मंदिर के सौंदर्यीकरण की योजना को स्वीकृति मिलना स्थानीय ग्रामीणों के लिए लंबे समय से चली आ रही मांग के पूरा होने जैसा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि ऐतिहासिक महत्व के बावजूद मंदिर परिसर लंबे समय तक अपेक्षित सुविधाओं से वंचित रहा। अब विकास कार्य शुरू होने से प्राचीन धरोहर को संरक्षित रखने के साथ यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर वातावरण मिल सकेगा। शिलान्यास कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख कीर्तिनगर अचला खंडेवाल,ब्लॉक प्रमुख हिंडोलाखाल विनोद बिष्ट,नगर पंचायत अध्यक्ष राकेश मोहन मैठाणी,नगर पालिका अध्यक्ष देवप्रयाग ममता देवी,प्रधान संगठन अध्यक्ष वासुदेव भट्ट,ग्राम प्रधान रानीहाट विजय कुमार,क्षेत्र पंचायत सदस्य मनोज कुमार जोशी,कुलदीप रावत,नरेंद्र कुंवर सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण मौजूद रहे। रानीहाट राजराजेश्वरी मंदिर के सौंदर्यीकरण की यह पहल यदि निर्धारित मानकों और समयसीमा के अनुरूप पूरी होती है तो यह क्षेत्र की सदियों पुरानी धार्मिक विरासत को संरक्षित करते हुए आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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