पुरानी पेंशन पर आर-पार के मूड में कर्मचारी-2027 से पहले फैसला नहीं तो 70 विधानसभाओं में गूंजेगा आंदोलन

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी कीर्तिनगर/श्रीनगर गढ़वाल। पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर कर्मचारियों का आंदोलन अब धीरे-धीरे निर्णायक चरण की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

कीर्तिनगर/श्रीनगर गढ़वाल। पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर कर्मचारियों का आंदोलन अब धीरे-धीरे निर्णायक चरण की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा के तत्वावधान में कीर्तिनगर ब्लॉक के बीआरसी सभागार में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में कर्मचारियों ने एकजुट होकर पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर आगामी रणनीति पर मंथन किया। बैठक में स्पष्ट किया गया कि यदि विधानसभा चुनाव-2027 से पूर्व सरकार पुरानी पेंशन बहाली को लेकर ठोस एवं सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है,तो कर्मचारी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को व्यापक रूप देते हुए निर्णायक संघर्ष के लिए बाध्य होंगे। बैठक की अध्यक्षता गढ़वाल मंडल सचिव राजीव उनियाल ने की। इस दौरान विभिन्न विभागों के कर्मचारियों एवं संगठन पदाधिकारियों ने पुरानी पेंशन व्यवस्था को कर्मचारियों के भविष्य,सामाजिक सुरक्षा और परिवार की आर्थिक स्थिरता से जोड़ते हुए सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की मांग की। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि लंबे समय से विभिन्न विभागों के कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक एवं सुरक्षित जीवन के लिए पेंशन अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में पुरानी पेंशन का मुद्दा किसी एक विभाग अथवा संगठन तक सीमित नहीं है,बल्कि यह प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा विषय है। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष महिला विंग रानीता विश्वकर्मा ने कहा कि सरकार को कर्मचारियों की भावनाओं और भविष्य की सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर विषय पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने चेताया कि मांग की अनदेखी जारी रही तो स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारी आंदोलन और आवश्यकता पड़ने पर हड़ताल जैसे कठोर लोकतांत्रिक कदम उठाने के लिए मजबूर हो सकते है। गढ़वाल मंडल सचिव महिला विंग शालिनी चौधरी ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली की लड़ाई में महिला कर्मचारी भी पूरी मजबूती के साथ संगठन के साथ खड़ी हैं। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल वर्तमान कर्मचारियों तक सीमित नहीं है,बल्कि उनके परिवारों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़ा है। इसके लिए व्यापक कर्मचारी संपर्क एवं जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। ब्लॉक अध्यक्ष महिला पूनम नेगी ने भी अधिक से अधिक महिला कर्मचारियों से आंदोलन में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया। सभी 70 विधानसभाओं तक आंदोलन पहुंचाने की तैयारी जनपद टिहरी गढ़वाल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संदीप मैठानी ने आंदोलन की आगामी रणनीति पर महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि पुरानी पेंशन बहाली की मांग को प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसके लिए उत्तराखंड की सभी 70 विधानसभा सीटों में संबंधित जनप्रतिनिधियों के आवासों पर धरना-प्रदर्शन आयोजित कर कर्मचारियों की आवाज को सरकार तक पहुंचाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव-2027 से पहले कर्मचारियों की वर्षों पुरानी मांग पर सरकार का स्पष्ट रुख सामने आना चाहिए। गढ़वाल मंडल सचिव राजीव उनियाल ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली किसी एक विभाग या वर्ग की मांग नहीं है। यह कर्मचारियों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा का विषय है। उन्होंने सभी विभागों के कर्मचारियों से संगठन के आगामी कार्यक्रमों में एकजुट होकर भागीदारी करने का आह्वान किया। प्रदेश समन्वयक जसपाल गुसाईं ने कहा कि किसी भी आंदोलन की सफलता उसकी एकजुटता पर निर्भर करती है। उन्होंने कर्मचारियों से आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे पर एक मंच पर आने का आह्वान किया। कीर्तिनगर ब्लॉक अध्यक्ष सुरजीत लिंगवाल ने कर्मचारियों से वोट फॉर ओपीएस कार्यक्रम को मजबूती से आगे बढ़ाने की अपील की। ब्लॉक मंत्री विनोद चौहान ने कहा कि अब कर्मचारी हर आंदोलन में अपने परिवार के साथ भागीदारी करेंगे। वरिष्ठ ब्लॉक उपाध्यक्ष अमित नौडियाल ने कहा कि पेंशन कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा है। कर्मचारी सरकार की योजनाओं और व्यवस्था को धरातल पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं,इसलिए उनके भविष्य की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सरकार की है। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि कर्मचारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपने मताधिकार की ताकत को भली-भांति समझते हैं। यदि विधानसभा चुनाव-2027 से पहले पुरानी पेंशन बहाली को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो कर्मचारी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी रणनीति तय करेंगे। वक्ताओं ने कहा कि कर्मचारियों की मांग को पूरा करने वाली सरकार के पक्ष में कर्मचारी अपनी भूमिका तय करेंगे,जबकि मांग की अनदेखी करने वालों को लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दिया जाएगा। हालांकि आंदोलन को पूरी तरह लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से संचालित करने पर जोर दिया गया। बैठक में आगामी दिनों में कर्मचारी संपर्क अभियान,जनजागरण अभियान,ज्ञापन,धरना-प्रदर्शन,रैली तथा विधानसभा स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। कर्मचारियों ने कहा कि आंदोलन को ब्लॉक स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक मजबूत किया जाएगा और अधिक से अधिक कर्मचारियों को इससे जोड़ा जाएगा। फार्मेसी अधिकारी पंकज शाह,राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष धर्मेंद्र रावत,विक्रम सजवाण एवं मिलिंद भट्ट ने भी पुरानी पेंशन बहाली के समर्थन में अपने विचार रखे। बैठक में कर्मचारियों ने संकल्प लिया कि पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर संघर्ष तब तक जारी रखा जाएगा,जब तक सरकार इस विषय पर ठोस निर्णय नहीं लेती। इस अवसर पर पंकज शाह,अनीता भारती,शालिनी चौधरी,प्रियंका टम्टा,सुष्मिता कुमारी,दीपक रावत,सुरेश,शिवम,कविता,अंजुला लखेड़ा,विनय रावत,ओमप्रकाश,विक्रम सिंह,महिपाल सिंह राणा,जगदीश वर्धन,कुलदीप सिंह नेगी,अमित कुमार,सुरजीत सिंह,वीरेंद्र सिंह,विनोद चौहान,रमेश सिंह,सूरज पाल,राजेंद्र कैंतुरा,संतोष सिंह,राहुल कुमार,दीपक सिंह,संदीप मैठाणी,मीनाक्षी,अनीता,अनीता बिष्ट,राजकुमार,पूनम नेगी,अनिता जोशी,रीना खत्री सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे। बैठक के अंत में कर्मचारियों ने सरकार को संदेश देते हुए कहा कि अभी भी समय है कि पुरानी पेंशन बहाली पर सकारात्मक निर्णय लेकर कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित किया जाए। अन्यथा आगामी विधानसभा चुनाव-2027 में कर्मचारी अपनी एकजुटता,लोकतांत्रिक अधिकार और मत की ताकत का परिचय देने के लिए तैयार हैं। कर्मचारियों का स्पष्ट संदेश रहा-पुरानी पेंशन बहाल करो,कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित करो।

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