
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। आध्यात्मिक चेतना जब ब्रह्मज्ञान से जागृत होती है,हृदय में प्रेम का प्रकाश फैलता है और सेवा जीवन का मूल मंत्र बन जाती है,तब संत समागम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं,बल्कि मानवता,सद्भाव और आत्मिक जागृति का महापर्व बन जाता है। ऐसे ही दिव्य भावों के साथ संत निरंकारी मिशन का 79 वां वार्षिक निरंकारी संत समागम श्रद्धा,भक्ति,प्रेम और निस्वार्थ सेवा का संदेश लेकर आध्यात्मिक चेतना की अलख जगाने जा रहा है। सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित की पावन छत्रछाया में 23 से 26 अक्टूबर 2026 तक संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल समालखा में 79 वें वार्षिक निरंकारी संत समागम का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस पावन अवसर पर देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु एकत्र होकर सत्संग,भक्ति,सेवा और आध्यात्मिक विचारों के माध्यम से जीवन को सकारात्मक दिशा देने की प्रेरणा प्राप्त करेंगे। संत समागम को लेकर आयोजन स्थल पर तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। संतों,सेवादारों और श्रद्धालुओं के निःस्वार्थ परिश्रम,अनुशासन तथा समर्पण से विशाल मैदान एक सुव्यवस्थित आध्यात्मिक नगरी का स्वरूप धारण कर रहा है। समागम स्थल पर की जा रही व्यवस्थाएं इस बात का प्रमाण हैं कि जब सेवा का भाव सर्वोपरि हो,तो सामूहिक प्रयासों से बड़े से बड़ा आयोजन भी सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न किया जा सकता है। श्रद्धालुओं की विशाल सहभागिता को ध्यान में रखते हुए बड़े-बड़े पंडाल तैयार किए गए हैं। इसके साथ ही आधुनिक एलईडी स्क्रीन स्थापित की जा रही हैं,ताकि समागम स्थल के प्रत्येक क्षेत्र में उपस्थित श्रद्धालु प्रेरणादायक प्रवचनों,भावपूर्ण भजनों और आध्यात्मिक संदेशों को सहजता से देख एवं सुन सकें। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य प्रत्येक श्रद्धालु तक सत्संग की विचारधारा को पहुंचाना और सभी को आध्यात्मिक वातावरण से जोड़ना है। समागम की तैयारियों में सेवादारों का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है। बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ और अपेक्षा के सेवा में जुटे श्रद्धालु अपने श्रम,समय और समर्पण से इस आयोजन को भव्य स्वरूप प्रदान कर रहे हैं। यहां सेवा केवल व्यवस्थाओं को संभालने का माध्यम नहीं,बल्कि प्रेम,विनम्रता और मानवता को जीवन में उतारने का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आ रही है। भव्य स्वागत द्वार बनेगा श्रद्धा और सृजनशीलता का प्रतीक समागम स्थल की भव्यता के बीच श्रद्धालुओं द्वारा निर्मित मुख्य स्वागत द्वार विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। अपनी आकर्षक कलात्मकता,विशिष्ट बनावट और भव्य स्वरूप के कारण यह द्वार आगंतुकों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। यह केवल समागम में प्रवेश का माध्यम नहीं,बल्कि सामूहिक श्रद्धा,सृजनशीलता,सेवा और समर्पण की भावना का प्रतीक भी है। श्रद्धालुओं के सहयोग और सहभागिता से इस स्वागत द्वार का स्वरूप निरंतर निखर रहा है। इसकी भव्यता के माध्यम से प्रत्येक आगंतुक का स्वागत प्रेम,अपनत्व और समभाव की भावना के साथ करने का संदेश उभरकर सामने आता है। संत समागम की मूल भावना भी यही है कि मनुष्य आपसी भेदभाव से ऊपर उठकर एक-दूसरे के प्रति सम्मान,सद्भाव और आत्मीयता का भाव विकसित करे। संत निरंकारी मंडल के सचिव जोगिंदर सुखीजा ने समागम की तैयारियों एवं व्यवस्थाओं की जानकारी साझा करते हुए बताया कि सतगुरु माता की दिव्य प्रेरणा और आशीर्वाद से आयोजन संबंधी कार्य सुव्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा,सुचारु संचालन और सहज आवागमन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पूरे समागम परिसर को चार प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। उन्होंने बताया कि संतों और सेवादारों की कर्मठता तथा निस्वार्थ सेवा भावना ने आयोजन स्थल को एक भव्य,सुंदर और सुव्यवस्थित आध्यात्मिक नगरी का स्वरूप प्रदान किया है। व्यवस्थाओं को इस प्रकार विकसित किया जा रहा है कि देश-विदेश से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को समागम के दौरान सुविधाजनक वातावरण मिल सके और वे एकाग्र भाव से सत्संग एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता कर सकें। निरंकारी संत समागम की विशेषता इसकी आध्यात्मिक विचारधारा है,जो मनुष्य को बाहरी उपलब्धियों के साथ-साथ अपने अंतर्मन को पहचानने और जीवन के वास्तविक उद्देश्य पर विचार करने की प्रेरणा देती है। ब्रह्मज्ञान के माध्यम से परमात्मा से संबंध की अनुभूति,प्रेम के माध्यम से मानवीय रिश्तों में मधुरता और सेवा के माध्यम से समाज के प्रति उत्तरदायित्व का भाव विकसित करना इस आध्यात्मिक आयोजन के प्रमुख संदेशों में शामिल है। यह समागम विश्वबंधुत्व,सामाजिक सौहार्द,परस्पर सम्मान और निस्वार्थ सेवा जैसे मानवीय मूल्यों को आत्मसात करने का अवसर प्रदान करता है। आज के समय में जब समाज को आपसी सद्भाव,सहिष्णुता और सकारात्मक सोच की आवश्यकता है,ऐसे आध्यात्मिक आयोजन मानव जीवन में प्रेम,शांति और एकता के महत्व को रेखांकित करते हैं। संत समागम की पावन भावना यही प्रेरणा देती है कि आध्यात्मिकता केवल प्रवचनों और धार्मिक आयोजनों तक सीमित न रहे,बल्कि व्यक्ति के व्यवहार,विचार और कर्म में भी दिखाई दे। जब मनुष्य अपने जीवन में सेवा,विनम्रता,प्रेम और सद्भाव को स्थान देता है,तभी आध्यात्मिक चेतना समाज के व्यापक कल्याण का माध्यम बनती है। संत निरंकारी मिशन श्रीनगर शाखा के मीडिया प्रभारी गम्मा सिंह ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि 79 वें वार्षिक निरंकारी संत समागम को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित की पावन छत्रछाया में आयोजित होने वाला यह समागम श्रद्धालुओं को ब्रह्मज्ञान,भक्ति,प्रेम और निस्वार्थ सेवा की भावना से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि संत समागम का मूल संदेश मानवता,आपसी सद्भाव और विश्वबंधुत्व की भावना को मजबूत करना है। सेवादार पूरे समर्पण के साथ व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं,ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु आध्यात्मिक वातावरण में सत्संग का लाभ प्राप्त कर सकें। 23 से 26 अक्टूबर 2026 तक समालखा में आयोजित होने वाला 79 वां वार्षिक निरंकारी संत समागम श्रद्धालुओं को प्रेम,ब्रह्मज्ञान और सेवा की पावन भावना से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा। यह आयोजन इस संदेश को भी सशक्त करेगा कि सच्ची आध्यात्मिकता केवल विचारों तक सीमित नहीं रहती,बल्कि व्यक्ति के व्यवहार,कर्म और दूसरों के प्रति उसके दृष्टिकोण में भी दिखाई देती है। संत समागम के माध्यम से श्रद्धालु अपने अंतर्मन में प्रेम,विनम्रता और सद्भाव के भावों को जागृत करने तथा मानवता की सेवा को जीवन का अभिन्न अंग बनाने की प्रेरणा प्राप्त करेंगे। संत निरंकारी मिशन की ओर से सभी सज्जन महात्माओं एवं श्रद्धालु भक्तों का इस दिव्य आध्यात्मिक मिलन में सादर स्वागत है।