पौड़ी से श्रीनगर तक सुरक्षित बचपन की गूंज-बाल अधिकारों की पाठशाला में बच्चों को सिखाया शोषण के खिलाफ आवाज उठाने के गुर

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने,बाल शोषण पर अंकुश लगाने और उन्हें सुरक्षित एवं भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जनपद पौड़ी गढ़वाल में

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने,बाल शोषण पर अंकुश लगाने और उन्हें सुरक्षित एवं भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जनपद पौड़ी गढ़वाल में सुरक्षित बचपन अभियान के तहत विधिक जागरूकता कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की गई। पौड़ी और श्रीनगर के विभिन्न विद्यालयों में आयोजित इन शिविरों के माध्यम से छात्र-छात्राओं को बाल अधिकारों,यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट),बाल विवाह निषेध,बाल श्रम,व्यक्तिगत सुरक्षा,साइबर अपराध और निःशुल्क विधिक सहायता के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। न्यायिक अधिकारियों और विधिक विशेषज्ञों ने बच्चों को अपने अधिकार पहचानने,गलत व्यवहार के विरुद्ध आवाज उठाने तथा किसी भी संकट की स्थिति में उचित सहायता लेने के लिए प्रेरित किया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के राष्ट्रव्यापी सुरक्षित बचपन अभियान के तहत आयोजित इन कार्यक्रमों का मूल उद्देश्य बच्चों को कानून की जानकारी देने के साथ ही उनमें आत्मविश्वास बढ़ाना और समाज में बाल सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना रहा। अभियान का प्रथम चरण 26 से 31 अक्टूबर 2026 तक संचालित किया जा रहा है। पौड़ी स्थित सेंट जेम्स स्कूल में आयोजित विधिक जागरूकता शिविर में सिविल जज रिजवान अंसारी और न्यायिक मजिस्ट्रेट अकमल ने विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण में रहने,शिक्षा प्राप्त करने और सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकारों की जानकारी दी। उन्होंने पॉक्सो एक्ट-2012 के प्रावधानों को समझाते हुए अच्छे और बुरे स्पर्श के बीच अंतर पहचानने तथा किसी भी प्रकार के शारीरिक,मानसिक अथवा यौन उत्पीड़न की स्थिति में चुप न रहने की सीख दी। उन्होंने बच्चों से कहा कि ऐसी परिस्थिति में अपने अभिभावकों,शिक्षकों या किसी विश्वसनीय व्यक्ति को तत्काल जानकारी दें। इसी क्रम में श्रीनगर स्थित पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं सिविल जज (सीनियर डिवीजन) नाजिश कलीम ने छात्राओं को बाल संरक्षण कानूनों,व्यक्तिगत सुरक्षा और इंटरनेट एवं सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग के बारे में जागरूक किया। उन्होंने छात्राओं को किसी भी अनुचित व्यवहार या शोषण की स्थिति में भय और संकोच छोड़कर सहायता लेने के लिए प्रेरित किया। तहसील विधिक सेवा समिति श्रीनगर के तत्वावधान में गुरुकुल स्कूल भक्तियाना में पूर्वाह्न 10.15 बजे सुरक्षित बचपन विषय पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) एवं अध्यक्ष तहसील विधिक सेवा समिति सुश्री अलका ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सुरक्षित और सशक्त समाज के निर्माण के लिए बच्चों का अपने अधिकारों और कानूनी संरक्षण के प्रति जागरूक होना आवश्यक है। उन्होंने साइबर सुरक्षा,सोशल मीडिया के सावधानीपूर्वक उपयोग,बाल श्रम निषेध कानून तथा बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न कानूनी प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से बच्चों और जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इस अवसर पर बार एसोसिएशन के संरक्षक अनूप पांथरी,अध्यक्ष प्रमेश चंद्र जोशी और वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद सिंह बुटोला ने भी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने बच्चों से अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने,अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने और दैनिक जीवन में नियमों का पालन करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के संचालन में पीएलवी सदस्य मानव बिष्ट,रोशनी देवी और प्रकाश नेगी ने सहयोग दिया। विद्यालय की अध्यापिका सुचिता सजवान सहित शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। श्रीनगर में हनुमान मंदिर के निकट स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में भी तहसील विधिक सेवा समिति के तत्वावधान में सुरक्षित बचपन विषय पर विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किया गया। उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल की कार्ययोजना तथा जिला जज एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पौड़ी गढ़वाल के निर्देशानुसार प्रातः 9.30 बजे आयोजित शिविर में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) एवं अध्यक्ष तहसील विधिक सेवा समिति सुश्री अलका ने छात्र-छात्राओं को बाल अधिकारों,पॉक्सो एक्ट,बाल विवाह की रोकथाम और अच्छे-बुरे स्पर्श के अंतर की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। किसी भी असहज परिस्थिति,अनुचित व्यवहार या उत्पीड़न की स्थिति में बच्चों को डरने के बजाय अपने शिक्षकों,अभिभावकों अथवा संबंधित सहायता तंत्र से संपर्क करना चाहिए। शिविर में बार एसोसिएशन श्रीनगर के संरक्षक अनूप पांथरी,अध्यक्ष प्रमेश चंद्र जोशी और वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद सिंह बुटोला ने भी विद्यार्थियों को कानूनी जागरूकता का महत्व समझाया। विद्यालय प्रबंध समिति के व्यवस्थापक वासुदेव कंडारी,पीएलवी सदस्य मानव बिष्ट,रोशनी देवी एवं प्रकाश नेगी,प्रधानाचार्य गोविंद सिंह और विद्यालय के शिक्षकगण सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। विधिक जागरूकता कार्यक्रमों के दौरान विद्यार्थियों को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की बाल हितैषी योजनाओं और जरूरतमंद बच्चों के लिए उपलब्ध निःशुल्क कानूनी सहायता के बारे में भी बताया गया। बच्चों को जानकारी दी गई कि कानूनी सहायता के लिए 15100 तथा बच्चों की सुरक्षा एवं संरक्षण से संबंधित सहायता के लिए 1098 पर संपर्क किया जा सकता है। कार्यक्रमों में बच्चों को यह संदेश दिया गया कि कानून उनके अधिकारों की रक्षा के लिए है और किसी भी तरह के शोषण या अन्याय को चुपचाप सहना आवश्यक नहीं है। सही समय पर विश्वसनीय व्यक्ति या संबंधित सहायता तंत्र तक अपनी बात पहुंचाकर वे संरक्षण प्राप्त कर सकते हैं। पौड़ी और श्रीनगर के विद्यालयों में आयोजित इन शिविरों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर कानूनी जागरूकता की आवश्यकता को रेखांकित किया। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि बाल सुरक्षा केवल कानून और प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं,बल्कि परिवार,विद्यालय और समाज की साझा जवाबदेही भी है। बच्चों को उनके अधिकारों की जानकारी देना,उनकी बात गंभीरता से सुनना और उन्हें भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना ही सुरक्षित बचपन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सुरक्षित बचपन अभियान के माध्यम से बच्चों को जागरूक,आत्मविश्वासी और अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाने का प्रयास किया जा रहा है,ताकि वे किसी भी अनुचित परिस्थिति को पहचान सकें और समय रहते सहायता प्राप्त कर सकें।

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